बकरी का चारा-दाना: हरा-सूखा चारा, दाना मिश्रण और पानी

हर दौर में बकरियों को क्या खिलाएं: चराई या बाड़े में चारा-दाना, हरा और सूखा चारा, दाना मिश्रण, खनिज मिश्रण, पानी, और उगाने लायक चारे की फ़सलें।

अपडेट: 23 अक्टूबर 2026जाँचा गया: 23 अक्टूबर 2026कट्टुतरै टीम ने लिखा

इस अनुवाद की जाँच अभी चल रही है। English

इस पेज पर
  1. खिलाने का तरीका चुनें
  2. बकरियाँ क्या खाती हैं
  3. दाना, खनिज मिश्रण और नमक
  4. हर दौर का चारा-दाना
  5. मेमनों को खिलाना
  6. पानी
  7. अपना चारा खुद उगाएं
  8. चारा धीरे-धीरे बदलें और ज़हरीले पौधों से बचें
  9. आम गलतियाँ
  10. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
  11. आगे क्या करें

बकरियाँ तब अच्छी तरह बढ़ती और ब्याती हैं जब उन्हें पेड़-झाड़ियों की पत्तियाँ, हरा चारा, थोड़ा सूखा चारा और सही समय पर थोड़ा दाना — सब मिलाकर मिले। ज़्यादातर चारा चराई से और आपके खुद उगाए चारे से आ सकता है; दाना मुख्य रूप से गाभिन और दूध देने वाली बकरियों, बढ़ते मेमनों और प्रजनन वाले बकरों के लिए है। हर दिन साफ़ पानी, नमक और खनिज मिश्रण से आहार पूरा होता है।

खिलाने का तरीका चुनें

तरीका कैसे होता है किसके लिए ठीक
चराई बकरियाँ दिन भर घास और पत्तियाँ चरती हैं और रात को लौट आती हैं चराई की ज़मीन ज़्यादा, नकद पैसा कम
चराई के साथ बाड़े में चारा-दाना कुछ घंटे चराई, और बाड़े में चारा और दाना ज़्यादातर छोटे किसान
बाड़े में चारा-दाना बकरियाँ बाड़े में ही रहती हैं; सारा चारा काटकर उनके पास लाया जाता है चराई की ज़मीन कम, अपना सिंचित चारे का खेत
  • मिले-जुले तरीके में बकरियाँ रोज़ 3–5 घंटे चरती हैं (TNAU); ICAR-CIRG थोड़े अनाज के साथ 6–8 घंटे की सलाह देता है (ICAR-CIRG)। ICAR-CIRG के अनुसार सिर्फ़ चराई से इस तरीके पर आने से उत्पादन 40–100% तक बढ़ सकता है (ICAR-CIRG)।
  • बाड़े में खिलाने के लिए NABARD का अनुमान है कि एक एकड़ सिंचित चारे की ज़मीन करीब 25 बकरियों का पेट भर सकती है (NABARD)।
  • अगर आप चराते हैं, तो झुंड को बारी-बारी से अलग-अलग टुकड़ों में चराएं (रोटेशनल चराई)। इससे घास को फिर से उगने का समय मिलता है, और TNAU के अनुसार इससे पेट के कीड़ों पर भी काबू रहता है (TNAU)।

बकरियाँ क्या खाती हैं

बकरियाँ सादी घास से ज़्यादा पत्तियाँ और दलहनी चारा पसंद करती हैं, और उन्हें तरह-तरह का चारा अच्छा लगता है (TNAU)। तीन तरह के चारे की योजना बनाएं:

  • हरा चारा: घासें, जैसे बाजरा-नेपियर संकर घास (CO-4 और दूसरी किस्में) और गिनी घास; दलहनी चारा, जैसे डेस्मैन्थस (हेज ल्यूसर्न), लोबिया, लूसर्न (रिजका) और स्टाइलो; पेड़ों की पत्तियाँ, जैसे अगस्ती, सुबबूल और ग्लिरिसिडिया, और नीम, सिरस और बबूल जैसे स्थानीय पेड़ (TNAU, TNAU)।
  • सूखा चारा: दलहनी फ़सलों का भूसा, जैसे मूँगफली की सूखी बेल, और अरहर, उड़द और मूँग के सूखे पौधे, साथ में पेड़ों की सूखी पत्तियाँ (TNAU)। ICAR-CIRG गेहूँ के भूसे की जगह दलहनी फ़सलों का भूसा देने की सलाह देता है (ICAR-CIRG)।
  • दाना: दला हुआ अनाज, चोकर और खली, साथ में खनिज मिश्रण और नमक (अगला हिस्सा देखें)।

घास और दलहनी चारा साथ में, लगभग आधा-आधा दें (NABARD)। चारे को काटकर दिन में कुछ बार थोड़ा-थोड़ा रैक में डालें — पैरों तले रौंदा गया या गीला चारा बकरियाँ बर्बाद कर देती हैं (TNAU)।

अपने पास चारा और पशु आहार खरीदें

आपके पास के किसान कट्टुतरै पर धान का पुआल, हरा चारा, साइलेज और पशु आहार बेचते हैं। विक्रेता को कॉल करें और पैसे देने से पहले लोड जाँचें।

Download on the App Storeइसे Google Play पर पाएं

दाना, खनिज मिश्रण और नमक

ICAR-CIRG के अनुसार दाना इनके लिए ज़रूरी है: गर्भ के आखिरी दिनों वाली बकरियाँ, 3 से 9 महीने के बढ़ते मेमने, दूध देने के पहले 60–90 दिनों वाली बकरियाँ, और प्रजनन के मौसम में बकरे। जब चराई कमज़ोर हो, तो बड़ी बकरियों को रोज़ करीब 150–250 ग्राम दें; गाभिन, दूध देने वाली और बढ़ती बकरियों को 150–250 ग्राम और चाहिए (ICAR-CIRG)।

NABARD का एक उदाहरण दाना मिश्रण, वज़न के हिसाब से (NABARD):

सामग्री 100 में से हिस्से
बाजरा (या मक्का) 40
तेल निकली मूँगफली की खली 25
चावल का चोकर (राइस ब्रान) 20
दाल चूनी (दालों के टूटे दाने और छिलका) 13
खनिज मिश्रण 1.5
नमक 0.5
  • मिलाने से पहले अनाज को दल लें या पीस लें (ICAR-CIRG)।
  • आप कोई भी मिश्रण बनाएं, उसमें करीब 1.5–2% खनिज मिश्रण और 0.5–1% नमक रखें (NABARD, ICAR-CIRG)।
  • बकरियों की पहुँच में सेंधा नमक का एक ढेला भी लटकाएं, या चाटने वाली नमक की ईंट रखें (TNAU)।
  • पशुओं के लिए बना खनिज मिश्रण किसी भरोसेमंद दुकान से खरीदें।

हर दौर का चारा-दाना

ये मात्राएं TNAU–TANUVAS की चारा-दाना गाइड से हैं (TNAU):

बकरी चारा रोज़ का दाना
बकरी, गाभिन नहीं अच्छी चराई काफ़ी है नहीं; चराई कमज़ोर हो तो 150–200 ग्राम
बकरी, गर्भ के पहले 4 महीने 4–5 घंटे चराई + करीब 5 किलो हरा चारा सिर्फ़ तब, जब चराई कमज़ोर हो
बकरी, गर्भ का आखिरी महीना 4–5 घंटे अच्छी चराई + करीब 7 किलो हरा चारा 250–350 ग्राम
दूध देने वाली बकरी 6–8 घंटे चराई + 10 किलो हरा चारा या 800 ग्राम दलहनी चारे की सूखी घास या अतिरिक्त चारे की जगह 400 ग्राम
जवान बकरी, 3–12 महीने करीब 8 घंटे चराई; गर्मियों में और बारिश के दिनों में रात को सूखा चारा 100–200 ग्राम
प्रजनन वाला बकरा बकरियों के साथ चरता है अलग खिलाएं तो करीब 500 ग्राम
  • गर्भ के करीब 100वें दिन से बकरी को अलग रखें और बेहतर खिलाएं (ICAR-CIRG)।
  • प्रजनन के मौसम में बकरों को 200–300 ग्राम अनाज ज़्यादा दें, ताकि उनका वज़न न घटे (ICAR-CIRG)।
  • ब्याने के आसपास: अनाज कम कर दें, अच्छा सूखा चारा भरपूर दें और खूब साफ़ पानी। ब्याने के दिन हल्का खिलाएं, ब्याने के बाद गुनगुना पानी दें, और फिर धीरे-धीरे खाना बढ़ाएं (TNAU)।
  • मेल से पहले अतिरिक्त चारा-दाना बकरियों को गाभिन होने में मदद करता है — देखें फ़्लशिंग।

मेमनों को खिलाना

  • जन्म के बाद पहले आधे घंटे के अंदर मेमनों को खीस (पहला दूध) ज़रूर मिलनी चाहिए (TNAU)। और जानकारी के लिए पढ़ें: बकरी के मेमनों की देखभाल: खीस, क्रीप फ़ीड और दूध छुड़ाना।
  • पहले 2–3 दिन मेमनों को माँ के साथ रखें; उसके बाद दूध छुड़ाने तक उन्हें दिन में 2–3 बार दूध पीने दें (TNAU)।
  • करीब 2 हफ़्ते की उम्र से कुतरने के लिए नरम हरी पत्तियाँ दें। करीब 1 महीने से शुरुआती दाना (क्रीप फ़ीड) दें: रोज़ 50–100 ग्राम से शुरू करें और 3 महीने तक इसे बढ़ाकर करीब 200–250 ग्राम करें (TNAU)।
  • पहले 2–3 महीने मेमनों को चराने भेजने के बजाय बाड़े में रखें; वहीं उन्हें पेड़ों की नरम पत्तियाँ और दला हुआ अनाज दें (ICAR-CIRG)।
  • करीब 3 महीने पर दूध छुड़ाएं (ICAR-CIRG)।

पानी

  • छोटे मेमनों के सामने हर समय साफ़ पानी रखें, और बड़ी बकरियों को दिन में कम से कम 2–3 बार पानी दें (ICAR-CIRG)।
  • दूध देने वाली बकरियाँ, सूखे चारे पर रहने वाली बकरियाँ, और गर्म दिनों में सभी बकरियाँ ज़्यादा पानी पीती हैं — पानी की नाँद भरी रखें, और उसे छाँव में रखें।
  • नाँद रोज़ धोएं।

अपना चारा खुद उगाएं

हरे चारे की योजना पूरे साल के लिए बनाएं, सिर्फ़ बारिश के महीनों के लिए नहीं (ICAR-CIRG)। ये समय TNAU के बताए हुए हैं (TNAU):

  • बाजरा-नेपियर संकर घास: बहुवर्षीय घास; लगाने के 75–80 दिन बाद पहली कटाई, फिर हर 45 दिन पर। घास की 3 कतारों पर डेस्मैन्थस की 1 कतार लगाएं और दोनों को साथ काटें।
  • डेस्मैन्थस: 90 दिन पर पहली कटाई, ज़मीन से 50 सेमी ऊपर, फिर हर 40 दिन पर।
  • अगस्ती: हर तरफ़ 1 मीटर की दूरी पर लगाएं; 8 महीने बाद पहली कटाई, फिर हर 60–80 दिन पर।
  • सुबबूल: पहली कटाई तभी करें जब तना करीब 3 सेमी मोटा हो जाए; फिर हर 40–80 दिन पर 90–100 सेमी की ऊँचाई पर काटें।
  • ग्लिरिसिडिया: कलम से उगती है, हर कटाई के बाद फिर फूटती है, और अच्छी हरी (जीवित) बाड़ बनती है।
  • चारे वाली ज्वार: करीब 50% फूल आने पर काटें, बुवाई के 60–65 दिन बाद।

चारा धीरे-धीरे बदलें और ज़हरीले पौधों से बचें

  • चारा कभी अचानक न बदलें; कई दिनों में धीरे-धीरे बदलें। बकरियों को घर लाएं, तो आते ही ज़रूरत से ज़्यादा न खिलाएं (ICAR-CIRG)।
  • बारिश के ठीक बाद भूखी बकरियों को ताज़ी, हरी-भरी घास में न छोड़ें। TNAU इसे आंत विषाक्तता (एंटरोटॉक्सीमिया) से जोड़ता है (TNAU); बारिश से पहले टीका लगवाएं, जैसा यहाँ बताया गया है: बकरी की सेहत: टीकाकरण कैलेंडर और कृमिनाशन।
  • सुबबूल को कभी अकेला चारा न बनाएं। इसे कुल चारे के एक-चौथाई से कम रखें (KAU); ICAR के एक अध्ययन में जिन बकरियों को ज़्यादातर सुबबूल खिलाया गया, उनमें थायरॉइड और गर्भ की दिक्कतें हुईं (ICAR पत्रिका)।
  • फूल आने से पहले की कच्ची ज्वार, या सूखे के बाद दोबारा उगी मुरझाई ज्वार कभी न खिलाएं।
  • लैंटाना ज़हरीला है। भूखी बकरियाँ, या किसी इलाके में नई आई बकरियाँ ही इसे खाती हैं — उन्हें वहाँ चराएं जहाँ दूसरा चारा काफ़ी हो, और चराई की ज़मीन से लैंटाना साफ़ करें (पशु चिकित्सा रिपोर्ट)।
  • फफूंद लगा, सड़ा या गंदा चारा कभी न खिलाएं; बकरियाँ सिर्फ़ साफ़, ताज़ा चारा खाती हैं (TNAU)।

आम गलतियाँ

  • गर्भ के आखिरी दिनों में भी सिर्फ़ चराई, कोई अतिरिक्त चारा-दाना नहीं — मेमने कमज़ोर पैदा होते हैं (TNAU)।
  • चारा ज़मीन पर फेंक देना।
  • चारा अचानक बदलना, या एक साथ बहुत ज़्यादा अनाज देना।
  • नमक या खनिज मिश्रण न देना।
  • सिर्फ़ एक ही तरह की पत्ती खिलाना, जैसे अकेला सुबबूल।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

बकरी को रोज़ कितना दाना चाहिए?

चराई कमज़ोर हो तो बड़ी बकरी को करीब 150–250 ग्राम, और गाभिन, दूध देने वाली और बढ़ती बकरियों को 150–250 ग्राम और (ICAR-CIRG)। अच्छी चराई पर, जो बकरी गाभिन नहीं है, उसे शायद दाने की ज़रूरत ही न हो।

क्या बकरियाँ सिर्फ़ चराई पर रह सकती हैं?

अगर चराई अच्छी हो, तो जो बड़ी बकरियाँ गाभिन नहीं हैं, वे रह सकती हैं। गाभिन और दूध देने वाली बकरियों, बढ़ते मेमनों और प्रजनन वाले बकरों को अतिरिक्त चारा या दाना चाहिए।

बकरियों को किन पेड़ों की पत्तियाँ खिला सकते हैं?

अगस्ती, सुबबूल और ग्लिरिसिडिया में प्रोटीन भरपूर होता है, और बकरियाँ नीम, सिरस और बबूल भी खाती हैं। मिलाकर खिलाएं, और सुबबूल को कुल चारे के एक-चौथाई से कम रखें।

बकरियों को कितनी बार पानी पीना चाहिए?

मेमनों के पास हर समय साफ़ पानी हो, और बड़ी बकरियों को दिन में कम से कम 2–3 बार — गर्मियों में और ज़्यादा बार।

क्या चारे वाली ज्वार बकरियों के लिए सुरक्षित है?

हाँ, अगर करीब 50% फूल आने पर काटी जाए। कच्ची ज्वार, या सूखे की मार झेली हुई ज्वार कभी न खिलाएं।

आगे क्या करें

टीकाकरण और कृमिनाशन के कैलेंडर से अपने झुंड को बचाएं — पढ़ें: बकरी की सेहत: टीकाकरण कैलेंडर और कृमिनाशन; मेल से पहले और गर्भ में खिलाने के बारे में पढ़ें: बकरी पालन में प्रजनन: गर्मी के लक्षण, मेल और ब्याना। अपना चारा कम पड़ जाए, तो पास के किसानों से हरा या सूखा चारा खरीदें। झुंड शुरू करने या बढ़ाने के लिए बिकाऊ बकरियाँ देखें।

स्रोत

  1. ICAR-Central Institute for Research on Goats (ICAR-CIRG), Makhdoom — Tips for commercial goat farming (December 2019) · पढ़ा गया 23 अक्टूबर 2026
  2. ICAR-Central Institute for Research on Goats (ICAR-CIRG), Makhdoom — Good management practices for profitable goat farming (extension leaflet) · पढ़ा गया 23 अक्टूबर 2026
  3. TNAU Agritech — Expert System for Sheep and Goat (TNAU with TANUVAS Directorate of Extension Education) — Feeding management of sheep and goats · पढ़ा गया 23 अक्टूबर 2026
  4. TNAU Agritech — Expert System for Sheep and Goat (TNAU with TANUVAS Directorate of Extension Education) — Fodder production for sheep and goat · पढ़ा गया 23 अक्टूबर 2026
  5. TNAU Agritech — Expert System for Sheep and Goat (TNAU with TANUVAS Directorate of Extension Education) — Young stock management · पढ़ा गया 23 अक्टूबर 2026
  6. TNAU Agritech portal (Tamil Nadu Agricultural University) — Livestock: Goat: Feeding · पढ़ा गया 23 अक्टूबर 2026
  7. TNAU Agritech portal (Tamil Nadu Agricultural University) — Livestock: Goat: Management practices · पढ़ा गया 23 अक्टूबर 2026
  8. TNAU Agritech portal (Tamil Nadu Agricultural University), Tamil page — கால்நடைகள் :: வெள்ளாடு வளர்ப்பு :: நோய் மேலாண்மை (Goat rearing: disease management) · पढ़ा गया 23 अक्टूबर 2026
  9. NABARD (National Bank for Agriculture and Rural Development) — Model bankable scheme on goat (2017) · पढ़ा गया 23 अक्टूबर 2026
  10. Kerala Agricultural University — Centre for E-Learning — Forage crops: tree fodder · पढ़ा गया 23 अक्टूबर 2026
  11. Indian Journal of Animal Sciences (ICAR), vol. 78(3), 2008 — M. S. Sastry and Rajendra Singh — Toxic effects of subabul (Leucaena leucocephala) on the thyroid and reproduction of female goats · पढ़ा गया 23 अक्टूबर 2026
  12. The Haryana Veterinarian (LUVAS), vol. 61(SI), 2022 — V. K. Meena, S. Meena and S. D. Choudhary (RAJUVAS, Bikaner) — Lantana poisoning in Sirohi goats in Bojunda, Chittorgarh · पढ़ा गया 23 अक्टूबर 2026

इससे जुड़ी गाइड

हम गाइड कैसे लिखते हैंकोई गलती दिखी? हमें WhatsApp पर बताएं

अपने पास खरीदें और बेचें

कट्टुतरै आपके गाँव के पास बिक रहे पशु सबसे पहले दिखाता है। विज्ञापन डालना मुफ़्त है।

Download on the App Storeइसे Google Play पर पाएं
मुफ़्त विज्ञापन डालें