बकरी पालन में प्रजनन: गर्मी के लक्षण, मेल और ब्याना

बकरी को कब गाभिन कराएं, गर्मी के लक्षण, एक बकरे पर कितनी बकरियाँ, इनब्रीडिंग से बचाव, गर्भ के दिन और देखभाल, ब्याने के लक्षण, पशु चिकित्सक को कब बुलाएं।

अपडेट: 23 अक्टूबर 2026जाँचा गया: 23 अक्टूबर 2026कट्टुतरै टीम ने लिखा

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  1. पहली बार गाभिन कराने की उम्र और वज़न
  2. गर्मी (हीट) के लक्षण और मेल का सही समय
  3. एक बकरे पर कितनी बकरियाँ
  4. इनब्रीडिंग (करीबी रिश्ते में मेल) से बचें
  5. मेल से पहले अच्छा खिलाएं (फ़्लशिंग)
  6. गर्भ: कितने दिन, और देखभाल कैसे करें
  7. ब्याने का बाड़ा तैयार करें
  8. ब्याने का समय पास होने के लक्षण
  9. पशु चिकित्सक को कब बुलाएं
  10. आम गलतियाँ
  11. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
  12. आगे क्या करें

बकरी को तब गाभिन कराएं जब वह शरीर से भी पूरी बड़ी हो जाए, सिर्फ़ उम्र से नहीं; ऐसा स्वस्थ बकरा लें जो उसका रिश्तेदार न हो; और करीब 5 महीने बाद ब्याने की तैयारी रखें। सही प्रजनन से आपको ज़्यादा ज़िंदा मेमने मिलते हैं और ब्याने में दिक्कतें कम आती हैं।

पहली बार गाभिन कराने की उम्र और वज़न

बकरियाँ 7–12 महीने में जवान हो जाती हैं (TNAU), लेकिन उम्र से ज़्यादा ज़रूरी वज़न है। बकरी को तभी गाभिन कराएं जब उसका वज़न उसकी नस्ल की बड़ी बकरी के वज़न का करीब 70% हो जाए; बहुत कम उम्र में गाभिन कराई गई बकरियाँ कमज़ोर मेमने देती हैं, और उनमें से ज़्यादा मेमने मर जाते हैं (ICAR-CIRG)।

नस्ल का आकार पहली बार गाभिन कराने की उम्र पहली बार गाभिन कराने पर वज़न
छोटी 7–9 महीने 8–9 किलो
मध्यम 10–12 महीने 16–18 किलो
बड़ी 12–16 महीने 20 किलो से ज़्यादा

ये आँकड़े ICAR-CIRG के हैं (ICAR-CIRG)। TNAU के अनुसार ज़्यादातर बकरियाँ 8–12 महीने में और करीब 15–18 किलो वज़न पर गाभिन कराई जा सकती हैं (TNAU)। आपकी नस्ल की बड़ी बकरी का वज़न कितना होता है, यह जानने के लिए पढ़ें: बकरी की नस्ल कैसे चुनें: दक्षिण भारत की नस्लों की तुलना।

बकरे। बकरे को 10–12 महीने की उम्र से मेल के काम में लें (TNAU); ICAR-CIRG छोटी नस्लों के लिए 12 महीने, मध्यम नस्लों के लिए 14–16 महीने और बड़ी नस्लों के लिए 16–18 महीने की सलाह देता है (ICAR-CIRG)। मज़बूत और फुर्तीला बकरा चुनें, जिसकी टाँगें सीधी हों और दोनों अंडकोष अच्छी तरह विकसित हों, और जिसकी माँ ने अपने मेमने अच्छी तरह पाले हों; जुड़वाँ पैदा हुआ बकरा अच्छा रहता है (ICAR-CIRG)।

गर्मी (हीट) के लक्षण और मेल का सही समय

जो बकरी गाभिन नहीं है, वह करीब हर 3 हफ़्ते (18–21 दिन) में गर्मी में आती है, और हर बार गर्मी आधे दिन से 2 दिन (14–48 घंटे) तक रहती है (TNAU)। सुबह और शाम ये लक्षण देखें (TNAU, TNAU):

  • वह पूँछ हिलाती है, खासकर जब बकरा पास हो;
  • वह बार-बार मिमियाती है, बेचैन रहती है और कम खाती है;
  • योनि सूजी हुई और लाल दिखती है, और उससे थोड़ा साफ़, चिपचिपा तार निकलता है;
  • वह बकरे को ढूँढती है, और बकरा ऊपर चढ़े तो चुपचाप खड़ी रहती है;
  • वह दूसरी बकरियों पर चढ़ती है, या उन्हें अपने ऊपर चढ़ने देती है।

मेल कब कराएं। सुबह गर्मी दिखे तो उसी शाम मेल कराएं; शाम को दिखे तो अगली सुबह (ICAR-CIRG)। 8–12 घंटे के अंतर पर दो बार मेल कराने से गाभिन होने की संभावना बढ़ती है (TNAU)। जो बकरी 2 चक्रों तक फिर गर्मी में न आए, वह शायद गाभिन है — उसे गाभिन बकरियों के समूह में कर दें (TNAU)।

एक बकरे पर कितनी बकरियाँ

  • करीब 20 बकरियों पर एक बड़ा (वयस्क) बकरा रखें (ICAR-CIRG, TNAU)।
  • एक मज़बूत बकरा 25–35 बकरियों को गाभिन कर सकता है, लेकिन ICAR-CIRG की सलाह है कि शुरुआत में एक बकरे पर 10–15 बकरियाँ ही रखें, ताकि आपके झुंड में एक से ज़्यादा वंश (बकरों का खून) रहें (ICAR-CIRG)।
  • एक बकरा अतिरिक्त रखें: ICAR-CIRG के फ़ार्म के नक्शों में 100 बकरियों पर 7 बकरे रखे जाते हैं, ताकि कोई एक बकरा नाकाम रहे, तब भी काम चलता रहे (ICAR-CIRG)।
  • बकरे को दिन भर बकरियों के साथ खुला न छोड़ें। उसे रात में उनके साथ रखें और दिन में अलग, ताकि वह आराम करे और अच्छी तरह खाए; अगर आप हर बकरी को उसके पास लाते हैं, तो एक दिन में उससे 3 से ज़्यादा बकरियों का मेल न कराएं (TNAU)।
  • प्रजनन के मौसम में बकरे को अतिरिक्त अनाज (दाना) दें — देखें हर दौर का चारा-दाना।

इनब्रीडिंग (करीबी रिश्ते में मेल) से बचें

इनब्रीडिंग का मतलब है करीबी रिश्तेदार पशुओं का आपस में मेल: पिता का बेटी से, माँ का बेटे से, भाई का बहन से। समय के साथ इससे झुंड कमज़ोर होता जाता है।

  • हर 2 साल में अपना बकरा बदलें या किसी से अदला-बदली करें (TNAU) — ज़्यादा से ज़्यादा 2–3 साल बाद (ICAR-CIRG)। इससे वह अपनी ही बेटियों से मेल नहीं कर पाता।
  • नया बकरा किसी दूसरे झुंड से लाएं, जो आपकी बकरियों का रिश्तेदार न हो (ICAR-CIRG)।
  • अपने ही झुंड के नर मेमने को उसकी माँ या बहनों से मेल के लिए न रखें; ज़रूरत से ज़्यादा नर मेमने बेच दें।
  • लिखकर रखें कि किस बकरे का किस बकरी से मेल हुआ, और कब (ICAR-CIRG)। देखें सेहत का रिकॉर्ड।

कट्टुतरै पर अपने पास बकरियाँ खोजें

अपने गाँव के पास के किसानों की बिकाऊ बकरियाँ सीधे देखें — फ़ोटो, गाँव के नाम और दूरी के साथ। कोई दलाल नहीं। किसान को कॉल या चैट करें, फिर पैसे देने से पहले बकरी को खुद देखें और उसकी सेहत जाँचें।

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मेल से पहले अच्छा खिलाएं (फ़्लशिंग)

मेल से कुछ हफ़्ते पहले दिया जाने वाला अतिरिक्त चारा-दाना फ़्लशिंग कहलाता है। इससे ज़्यादा बकरियाँ गर्मी में आती हैं और जुड़वाँ मेमने ज़्यादा होते हैं (TNAU)।

  • मेल से 3–4 हफ़्ते पहले शुरू करें: हर बकरी को रोज़ करीब 250 ग्राम दाना या 500 ग्राम दलहनी चारे की सूखी घास दें। TNAU के अनुसार इससे ब्याने की दर 10–20% तक बढ़ सकती है (TNAU)।
  • ICAR-CIRG की सलाह है कि मेल के मौसम में रोज़ 100–200 ग्राम अनाज (दाना) खनिज मिश्रण के साथ दें (ICAR-CIRG)।
  • फ़्लशिंग से सबसे ज़्यादा फ़ायदा दुबली बकरियों को होता है। बकरियों या बकरों को मोटा न होने दें — मोटे पशुओं में प्रजनन ठीक से नहीं होता (TNAU)।

गर्भ: कितने दिन, और देखभाल कैसे करें

बकरी 145–156 दिन, यानी करीब 5 महीने गाभिन रहती है (TNAU)। मेल की तारीख लिख लें और उससे 5 महीने आगे गिनें, ताकि पता रहे कि मेमने कब आएंगे।

  • गाभिन बकरियों को उनके अपने अलग समूह में रखें, जिसमें 15–20 से ज़्यादा बकरियाँ न हों, ताकि वे एक-दूसरे को टक्कर न मारें (TNAU)।
  • उन्हें आराम से और जितना हो सके उतना कम पकड़ें (TNAU), लेकिन उन्हें रोज़ चरने और चलने दें, और बारिश व ठंड से बचाएं (TNAU)।
  • गाभिन बकरी को कभी भूखा न रहने दें: गर्भ के शुरुआती दिनों में 2 दिन भी बिना चारे के रहने से गर्भ गिर सकता है (TNAU)।
  • गर्भ के करीब 100वें दिन से उसे अलग रखें और बेहतर खिलाएं (ICAR-CIRG); देखें हर दौर का चारा-दाना।
  • उसे उन बकरियों से दूर रखें जिनका हाल ही में गर्भ गिरा हो (TNAU)।
  • अगर आप उसका दूध दुहते हैं, तो ब्याने से 6–8 हफ़्ते पहले दुहना बंद कर दें (TNAU)।
  • गर्भ के आखिरी दिनों में उसे गाड़ी से कहीं न ले जाएं (ICAR-CIRG), और कोई भी टीका लगवाने से पहले पशु चिकित्सक से पूछें — पीपीआर का राष्ट्रीय टीकाकरण अभियान सिर्फ़ उन्हीं बकरियों को टीका लगाता है जो गाभिन न हों (ICAR-NIVEDI)।

ब्याने का बाड़ा तैयार करें

  • ब्याने की तारीख से 4–6 दिन पहले बकरी को साफ़ ब्याने वाले बाड़े में ले जाएं (TNAU)।
  • बाड़ा करीब 1.5 मीटर × 1.2 मीटर का हो, सूखा हो, उसमें सीधी ठंडी हवा न लगे, और उसमें चारे की नाँद और पानी की बाल्टी हो (TNAU)। और जानकारी के लिए पढ़ें: बकरी का बाड़ा (शेड): हर बकरी की जगह, फ़र्श और छत।
  • नरम, साफ़ और सूखा बिछावन बिछाएं, जैसे पुआल या सूखी घास (TNAU)।
  • उसके अयन और पूँछ के आसपास के बाल काट दें, ताकि ये जगहें साफ़ रहें (TNAU)।
  • मेमनों को पोंछने के लिए साफ़ कपड़े तैयार रखें, और पशु चिकित्सक का नंबर और 1962 अपने फ़ोन में सेव कर लें।

ब्याने का समय पास होने के लक्षण

मेल के करीब 145 दिन बाद से बकरी पर ध्यान से नज़र रखें। ब्याने का समय पास होने के लक्षण (TNAU):

  • अयन भर जाता है और थन कसे हुए और चमकदार दिखते हैं;
  • पूँछ के दोनों तरफ़ की जगह अंदर धँस जाती है;
  • योनि से गाढ़ा, चिपचिपा तार लटकता है;
  • वह बेचैन रहती है, झुंड से अलग चली जाती है, पैर से ज़मीन खुरचती है, बार-बार लेटती और उठती है, मुड़कर अपने पेट की ओर देखती है और धीमे-धीमे मिमियाती है।

ब्याना शुरू होने पर वह ज़ोर लगाती है, और पानी की थैली दिख सकती है। मेमना आम तौर पर आगे के पैरों के बल आता है, जिन पर उसकी नाक टिकी होती है, या पीछे के पैरों के बल — दोनों सामान्य हैं (TNAU)। थोड़ी दूरी से चुपचाप देखें और बकरी को मेमनों को चाटने दें; करीब 30 मिनट के अंदर मेमनों को दूध पीना शुरू कर देना चाहिए (TNAU)। नवजात मेमनों की देखभाल के लिए पढ़ें: बकरी के मेमनों की देखभाल: खीस, क्रीप फ़ीड और दूध छुड़ाना।

पशु चिकित्सक को कब बुलाएं

इनमें से कुछ भी हो, तो तुरंत अपने पशु चिकित्सक को या 1962 पर कॉल करें (TNAU, TNAU):

  • बकरी करीब 1 घंटे से ज़ोर लगा रही है और मेमना नहीं दिख रहा;
  • पानी की थैली फट गई है और करीब 2 घंटे में भी मेमना नहीं आया;
  • सिर्फ़ सिर, सिर्फ़ एक पैर, या पूँछ दिख रही है;
  • स्राव लाल-भूरा हो गया है या उससे बदबू आ रही है;
  • ब्याने से पहले उसने खाना छोड़ दिया है और वह उठना नहीं चाहती (TNAU);
  • करीब 24 घंटे में भी जेर नहीं गिरी;
  • कोई मेमना कमज़ोर है और जन्म के करीब 1 घंटे में भी खड़ा नहीं हो पा रहा।

कमज़ोर हालत वाली कम उम्र की बकरियों को, और बड़े बकरे से गाभिन हुई छोटी बकरियों को, ब्याने में मदद की ज़रूरत ज़्यादा पड़ती है (TNAU)। मेमने को खींचें नहीं और बकरी के अंदर हाथ न डालें — पशु चिकित्सक का इंतज़ार करें।

आम गलतियाँ

  • बहुत कम उम्र की या बहुत छोटी बकरियों को गाभिन कराना।
  • कई साल तक एक ही बकरा रखना, जिससे वह अपनी ही बेटियों से मेल करता है।
  • बकरे को दिन भर बकरियों के साथ छोड़ देना, जिससे वह कमज़ोर हो जाता है।
  • मेल की तारीखें न लिखना, जिससे ब्याना अचानक आ जाता है।
  • गर्भ के आखिरी महीने में ठीक से न खिलाना।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

बकरी को पहली बार किस उम्र में गाभिन कराया जा सकता है?

जब उसका वज़न उसकी नस्ल की बड़ी बकरी के वज़न का करीब 70% हो जाए — आम तौर पर 8–12 महीने में, करीब 15–18 किलो पर।

एक बकरा कितनी बकरियों को गाभिन कर सकता है?

एक बड़े बकरे पर करीब 20 बकरियाँ रखें। मज़बूत बकरा 25–35 बकरियों को गाभिन कर सकता है, लेकिन एक अतिरिक्त बकरा भी रखें।

बकरी कितने दिन गाभिन रहती है?

करीब 5 महीने: मेल से 145–156 दिन।

बकरी कितनी बार ब्या सकती है?

TNAU दो साल में तीन ब्यांत को आदर्श मानता है; NABARD के मॉडल फ़ार्म में दो ब्यांत के बीच करीब 8 महीने का अंतर माना गया है (NABARD)।

बकरा कितने समय बाद बदलना चाहिए?

हर 2 साल में, और ज़्यादा से ज़्यादा 2–3 साल बाद, ताकि वह अपनी ही बेटियों से मेल न करे।

आगे क्या करें

नवजात मेमनों की तैयारी के लिए पढ़ें: बकरी के मेमनों की देखभाल: खीस, क्रीप फ़ीड और दूध छुड़ाना; गाभिन और दूध देने वाली बकरियों के चारे-दाने की योजना के लिए: बकरी का चारा-दाना: हरा-सूखा चारा, दाना मिश्रण और पानी। टीके समय पर लगवाते रहें — पढ़ें: बकरी की सेहत: टीकाकरण कैलेंडर और कृमिनाशन। नया बकरा चाहिए, जो आपकी बकरियों का रिश्तेदार न हो? अपने पास की बिकाऊ बकरियाँ देखें, और पैसे देने से पहले उसकी सेहत जाँच लें (बकरी सुरक्षित कैसे खरीदें: सेहत, उम्र और ठगी से बचाव)।

स्रोत

  1. TNAU Agritech portal (Tamil Nadu Agricultural University) — Livestock: Goat: Reproduction · पढ़ा गया 23 अक्टूबर 2026
  2. TNAU Agritech portal (Tamil Nadu Agricultural University) — Livestock: Goat: Management practices · पढ़ा गया 23 अक्टूबर 2026
  3. TNAU Agritech portal (Tamil Nadu Agricultural University) — Livestock: Goat: Care and management of goat · पढ़ा गया 23 अक्टूबर 2026
  4. TNAU Agritech portal (Tamil Nadu Agricultural University) — Livestock: Goat: Disease management and vaccination schedule · पढ़ा गया 23 अक्टूबर 2026
  5. TNAU Agritech — Expert System for Sheep and Goat (TNAU with TANUVAS Directorate of Extension Education) — Breeding management of sheep and goat · पढ़ा गया 23 अक्टूबर 2026
  6. TNAU Agritech — Expert System for Sheep and Goat (TNAU with TANUVAS Directorate of Extension Education) — Housing of sheep and goats · पढ़ा गया 23 अक्टूबर 2026
  7. TNAU Agritech — Expert System for Sheep and Goat (TNAU with TANUVAS Directorate of Extension Education) — Feeding management of sheep and goats · पढ़ा गया 23 अक्टूबर 2026
  8. ICAR-Central Institute for Research on Goats (ICAR-CIRG), Makhdoom — Tips for commercial goat farming (December 2019) · पढ़ा गया 23 अक्टूबर 2026
  9. ICAR-Central Institute for Research on Goats (ICAR-CIRG), Makhdoom — Good management practices for profitable goat farming (extension leaflet) · पढ़ा गया 23 अक्टूबर 2026
  10. ICAR-Central Institute for Research on Goats (ICAR-CIRG), Makhdoom — Housing design and requirements for commercial goat farm (100+5 goat unit), 2017 · पढ़ा गया 23 अक्टूबर 2026
  11. NABARD (National Bank for Agriculture and Rural Development) — Model bankable scheme on goat (2017) · पढ़ा गया 23 अक्टूबर 2026
  12. ICAR-National Institute of Veterinary Epidemiology and Disease Informatics (ICAR-NIVEDI) — PPR Eradication Programme (PPR-EP) under LHDCP · पढ़ा गया 23 अक्टूबर 2026

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