वनराजा मुर्गी की एक उन्नत किस्म है, नस्ल नहीं। हैदराबाद के भाकृअनुप-कुक्कुट अनुसंधान निदेशालय (ICAR-DPR) ने इसे गाँवों और आदिवासी इलाकों में घर-आँगन में खुला पालने के लिए तैयार किया है: एक मज़बूत, कई रंगों वाली मुर्गी, जिसे मांस और अंडों, दोनों के लिए पाला जाता है (ICAR-DPR)। किसानों को मिलने वाले चूजे ICAR-DPR की दो पेरेंट लाइनों, PD-1 और PD-2, के मेल से आते हैं (ICAR-DPR)।
कैसे पहचानें
- रंग: कई रंगों वाले पंख (ICAR-DPR)। कई देसी मुर्गियाँ भी कई रंगों की होती हैं, इसलिए सिर्फ़ रंग से यह साबित नहीं होता कि पक्षी वनराजा है।
- अंडे: भूरे छिलके वाले (ICAR-DPR)।
- बड़े होने पर वज़न: मुर्गे करीब 2.2–2.5 किलो और मुर्गियाँ करीब 1.8–2.0 किलो (ICAR-DPR)।
- बढ़ते पक्षी: 6 हफ़्ते में करीब 650–750 ग्राम (ICAR-DPR पर्चा)। किसानों के घर-आँगन में मुर्गे 12 हफ़्ते में 1.5–1.8 किलो के हो जाते हैं (ICAR-DPR)।
यह किस काम की है
- मांस और अंडे। ICAR-DPR के अनुसार यह दोहरे उपयोग वाली किस्म है (ICAR-DPR)।
- घर-आँगन में अंडे। खुले में पालने पर एक मुर्गी साल में करीब 100–110 अंडे देती है (ICAR-DPR, ICAR-DPR पर्चा)। यह आँकड़ा घर-आँगन में चुगने वाले पक्षियों का है, पिंजरे में पूरा दाना खाने वाले पक्षियों का नहीं।
- मांस। मुर्गे करीब 12 हफ़्ते में बेचने लायक हो जाते हैं (ICAR-DPR)।
- पालने के दो तरीके। जहाँ घर-आँगन में कुदरती दाना-चारा भरपूर हो, वहाँ अंडों के लिए 10–20 पक्षी खुले में पाले जा सकते हैं। जहाँ खरीदार मांस चाहते हों, वहाँ वनराजा को शेड में संतुलित दाना देकर बेचने लायक वज़न तक पाला जा सकता है (TANUVAS समीक्षा)।
- मज़बूत। यह कठोर और अलग-अलग तरह की जलवायु में ठीक रहती है, और जम्मू और कश्मीर से लेकर अंडमान और निकोबार द्वीप समूह तक, भारत के हर जलवायु क्षेत्र में अपनाई गई है (ICAR-DPR)।
यह किस्म ज़्यादातर कहाँ मिलती है
वनराजा का कोई मूल जिला नहीं है: इसे हैदराबाद के राजेंद्रनगर में ICAR-DPR में तैयार किया गया था, और यह पूरे भारत में पाली जाती है। ICAR-DPR के अनुसार करीब 38 लाख वनराजा पक्षी किसानों तक पहुँचे हैं, और उसने सरकारी एजेंसियों को 3.17 लाख वनराजा पेरेंट पक्षी दिए हैं (ICAR-DPR)। दक्षिण भारत में, मार्च 2022 तक होसूर के TANUVAS पोल्ट्री कॉलेज ने तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के किसानों को 7,12,354 वनराजा और ग्रामप्रिया चूजे दिए थे (TANUVAS)। तिरुनेलवेली के आसपास माँग होने की वजह से वहाँ का TANUVAS पशु चिकित्सा कॉलेज भी किसानों के लिए वनराजा और ग्रामप्रिया के अंडों से चूजे निकालता है (TANUVAS समीक्षा)।
वनराजा मुर्गियाँ चाहिए?
वनराजा एक अनुसंधान संस्थान की बनाई उन्नत मुर्गी है, जिसे कई राज्यों के किसान पालते हैं। अपने पास ढूँढने के लिए कट्टुतरै ऐप में “वनराजा” खोजें, या सभी बिकाऊ मुर्गियाँ देखें। नस्ल विक्रेता बताता है और कट्टुतरै उसकी जाँच नहीं करता, इसलिए पैसे देने से पहले पक्षियों को खुद देखें।
पालने के सुझाव
- पहले चूजों की ब्रूडिंग करें। चूजों को गर्मी, दाना और शिकारी जानवरों से बचाव चाहिए। फ़र्श पर 2–3 इंच धान की भूसी, लकड़ी का बुरादा या साफ़ रेत बिछाएं, उस पर पुराना अखबार बिछा दें, और ब्रूडर गार्ड के अंदर गर्मी दें (ICAR-DPR पर्चा)। बाहर छोड़ने से पहले उन्हें करीब 6 हफ़्ते ब्रूडर के नीचे रखें (TANUVAS समीक्षा)।
- फिर खुले में छोड़ें। अपनी जगह और आसपास मिलने वाले कुदरती दाने-चारे के हिसाब से हर घर में 10–20 पक्षी रखें (ICAR-DPR पर्चा)।
- रात के लिए मुर्गी घर। शिकारी जानवरों से बचाने के लिए रात में पक्षियों को बंद रखें। शाम को हर पक्षी को 20–30 ग्राम अनाज दें, और हर सुबह बाहर छोड़ने से पहले साफ़ पानी दें (ICAR-DPR पर्चा)।
- स्थानीय अनाज से चूजों का दाना। ICAR-DPR के पर्चे में करीब 50 हिस्से अनाज (मक्का, बाजरा, ज्वार, रागी या टूटा चावल), 20 हिस्से चोकर, 28 हिस्से खली और 2 हिस्से विटामिन-खनिज मिश्रण सुझाया गया है (ICAR-DPR पर्चा)।
- बीमारी से बचाव। मुर्गी घर नियमित रूप से साफ़ करें। ICAR-DPR हर 2–3 महीने में कृमिनाशन (पेट के कीड़ों की दवा देना) और मारेक रोग, रानीखेत रोग, संक्रामक बरसल रोग (गमबोरो) और फाउल पॉक्स (चेचक) के टीके की सलाह देता है; टीकों का समय पशु चिकित्सक से पूछें (ICAR-DPR पर्चा)। मुर्गियों को स्वस्थ रखने के बारे में और जानने के लिए देसी मुर्गी पालन: दक्षिण भारत में नस्लें, खरीद और देखभाल देखें।
खरीदने के सुझाव
- जानी-मानी हैचरी से खरीदें। ऐसा कोई पक्का रूप नहीं है जिससे साबित हो कि पक्षी वनराजा है, और देसी मुर्गियों के साथ इसके संकर आम हैं। विज्ञापन में नस्ल का नाम विक्रेता का बताया हुआ होता है, और कट्टुतरै उसकी जाँच नहीं करता। पूछें कि चूजे कहाँ निकाले गए थे; सरकारी हैचरियाँ, TANUVAS के केंद्र और खुद ICAR-DPR चूजे देते हैं (TANUVAS, ICAR-DPR पर्चा)।
- खुद ब्रूडिंग न कर सकें, तो ब्रूडिंग हो चुके पक्षी लें। घर-आँगन में भेजने से पहले चूजों की अक्सर करीब 6 हफ़्ते तक ब्रूडिंग की जाती है (TANUVAS समीक्षा)। पूछें कि वे किस तारीख को निकले और उन्हें कौन-कौन से टीके लगे हैं।
- सिर्फ़ स्वस्थ पक्षी। ऐसे पक्षी न खरीदें जो कमज़ोर हों, पंख लटकाकर सुस्त बैठे रहें, या जिनका सिर सूजा हो, नाक बहती हो, या कलगी और गलकंबल का रंग बदल गया हो (बर्ड फ्लू कार्य योजना)।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या वनराजा एक नस्ल है?
नहीं। यह एक उन्नत किस्म है, जो ICAR-DPR की दो पेरेंट लाइनों, PD-1 और PD-2, के मेल से बनती है (ICAR-DPR)। यह NBAGR की सूची की पंजीकृत मुर्गी नस्लों में नहीं है (ICAR-NBAGR)।
वनराजा मुर्गी कितने अंडे देती है?
खुले में पालने पर साल में करीब 100–110 भूरे अंडे (ICAR-DPR)।
वनराजा कितनी भारी होती है?
बड़े होने पर मुर्गों का वज़न करीब 2.2–2.5 किलो और मुर्गियों का करीब 1.8–2.0 किलो होता है; घर-आँगन में मुर्गे 12 हफ़्ते तक 1.5–1.8 किलो के हो जाते हैं (ICAR-DPR)।
क्या वनराजा को देसी मुर्गियों की तरह पाल सकते हैं?
हाँ, इसे घर-आँगन में खुले में पालने के लिए ही बनाया गया है। पहले करीब 6 हफ़्ते चूजों की ब्रूडिंग करें, और रात में पक्षियों को मुर्गी घर में बंद करें (ICAR-DPR पर्चा, TANUVAS समीक्षा)।
आगे पढ़ें
इसकी तुलना ICAR-DPR की दूसरी किस्मों — अंडों के लिए ग्रामप्रिया और मांस और अंडों के लिए श्रीनिधि — से, और कर्नाटक की गिरिराजा से करें। खरीदने और देखभाल के बारे में देसी मुर्गी पालन: दक्षिण भारत में नस्लें, खरीद और देखभाल पढ़ें, और बिकाऊ देसी मुर्गियाँ देखें।
