गिरिराजा मुर्गी की एक उन्नत किस्म है, नस्ल नहीं: यह रंगीन पंखों वाली घर-आँगन की मुर्गी है, जिसे मांस और अंडों के लिए पाला जाता है। इसे पशु चिकित्सा कॉलेज, बेंगलुरु के पोल्ट्री विज्ञान विभाग ने 1989 में निकाला था; यह कॉलेज अब KVAFSU का हिस्सा है (KVAFSU)। KVAFSU के शोधकर्ताओं के 2017 के एक अध्ययन के अनुसार यह घर-आँगन में पालने के लिए बनी पहली उन्नत रंगीन मुर्गी है (KVAFSU अध्ययन)।
कैसे पहचानें
- रंग: स्थानीय गाँव की नस्ल जैसे रंगीन पंख (UAS Bangalore)। कई देसी मुर्गियाँ ऐसी ही दिखती हैं, इसलिए सिर्फ़ रंग से यह साबित नहीं होता कि पक्षी गिरिराजा है।
- आकार: घर-आँगन की मुर्गी के हिसाब से भारी पक्षी। UAS Bangalore के खेती पोर्टल के कन्नड़ पेज के अनुसार बड़े होने पर मुर्गों का वज़न करीब 4–5 किलो और मुर्गियों का करीब 3.5–3.75 किलो होता है (उसके अंग्रेज़ी पेज पर बड़े पक्षियों का वज़न 3.5–4.5 किलो दिया है), और 8 हफ़्ते में 1.6–1.9 किलो (UAS Bangalore)।
- अंडे: करीब 55–60 ग्राम के (UAS Bangalore)।
यह किस काम की है
- मांस और अंडे। KVAFSU के अनुसार गिरिराजा दोहरे उपयोग वाली, रंगीन किस्म है (KVAFSU)।
- अंडे। UAS Bangalore के पोर्टल के अनुसार साल में करीब 140–150 अंडे, और पहला अंडा करीब 170 दिन की उम्र में। उसी तालिका में गाँव की स्थानीय मुर्गियाँ 35–40 ग्राम के 60–70 अंडे देती हैं और बड़े होने पर उनका वज़न 2–2.5 किलो होता है (UAS Bangalore)।
- गाँव में कम खर्च में पालन। गिरिराजा गाँव की मुर्गी की तरह घूमकर चुगती है और स्थानीय दाना और खाद में पलने वाले कीड़ों के लार्वा खाती है। गाँव में इसे सँभालना आसान है, यह कम खर्च वाले दाने पर पल जाती है और इसे खास मुर्गी घर नहीं चाहिए (UAS Bangalore)।
- आँकड़े अलग-अलग हैं। दूसरे छपे अध्ययनों में वज़न और अंडों की संख्या काफ़ी अलग दी गई है, और KVAFSU के अपने विभाग के पेज पर कोई आँकड़ा नहीं है, इसलिए इन संख्याओं को अंदाज़ा मानें, वादा नहीं।
यह किस्म ज़्यादातर कहाँ मिलती है
गिरिराजा का कोई मूल जिला नहीं है: इसे बेंगलुरु के हेब्बाल में पशु चिकित्सा कॉलेज में तैयार किया गया था (KVAFSU अध्ययन)। KVAFSU के अनुसार गिरिराजा और इसके बाद की किस्म स्वर्णधारा (2005) पूरे देश के किसानों में लोकप्रिय हो चुकी हैं (KVAFSU), और KVAFSU के शोधकर्ताओं के 2017 के एक अध्ययन में लिखा है कि पूरे कर्नाटक के मुर्गी पालकों ने गाँवों में मुर्गी पालन के लिए गिरिराजा को अपनाया है (KVAFSU अध्ययन)। यह विभाग किसानों, स्वयं सहायता समूहों और कर्नाटक के पशुपालन एवं पशु चिकित्सा सेवा विभाग को एक दिन के गिरिराजा चूजे, और राज्य सरकार के फ़ार्मों को पेरेंट पक्षी देता है (KVAFSU)।
गिरिराजा मुर्गियाँ चाहिए?
गिरिराजा एक अनुसंधान संस्थान की बनाई उन्नत मुर्गी है, जिसे कई राज्यों के किसान पालते हैं। अपने पास ढूँढने के लिए कट्टुतरै ऐप में “गिरिराजा” खोजें, या सभी बिकाऊ मुर्गियाँ देखें। नस्ल विक्रेता बताता है और कट्टुतरै उसकी जाँच नहीं करता, इसलिए पैसे देने से पहले पक्षियों को खुद देखें।
पालने के सुझाव
- इन्हें चुगने दें। गिरिराजा को इस तरह तैयार किया गया कि इसमें गाँव की मुर्गियों की घूमकर चुगने की आदत बनी रहे, और मांस और अंडे ज़्यादा मिलें (UAS Bangalore)। ऐसा आँगन, जहाँ पक्षियों को स्थानीय दाना और कीड़े मिल सकें, इसके लिए ठीक है।
- सादा मुर्गी घर। इसे खास मुर्गी घर नहीं चाहिए (UAS Bangalore), पर रात में पक्षियों को मुर्गी घर में रखें, और उन्हें जंगली पक्षियों और पड़ोसियों के पक्षियों से दूर रखें (बर्ड फ्लू कार्य योजना)।
- रानीखेत का टीका। गिरिराजा मज़बूत होती है, फिर भी इसे रानीखेत रोग का टीका लगवाना ज़रूरी है (UAS Bangalore)। टीकों का समय और आपके इलाके में और क्या ज़रूरी है, यह पशु चिकित्सक से पूछें।
- अचानक मौतें। असामान्य बीमारी या मौतों की खबर 24 घंटे के अंदर नज़दीकी पशु चिकित्सालय को दें (बर्ड फ्लू कार्य योजना)। मुर्गियों को स्वस्थ रखने के बारे में और जानने के लिए देसी मुर्गी पालन: दक्षिण भारत में नस्लें, खरीद और देखभाल देखें।
खरीदने के सुझाव
- जाने-माने स्रोत से खरीदें। बेंगलुरु में KVAFSU का पोल्ट्री विज्ञान विभाग किसानों और कर्नाटक के पशुपालन विभाग को गिरिराजा चूजे, और राज्य सरकार के फ़ार्मों को पेरेंट पक्षी देता है (KVAFSU)। वहाँ पूछें, या अपने नज़दीकी पशु चिकित्सालय में।
- कोई पक्की पहचान नहीं। गिरिराजा गाँव की रंगीन मुर्गी जैसी दिखती है, और संकर आम हैं। विज्ञापन में नस्ल का नाम विक्रेता का बताया हुआ होता है, और कट्टुतरै उसकी जाँच नहीं करता। पूछें कि चूजे कहाँ निकाले गए थे।
- सिर्फ़ स्वस्थ पक्षी। ऐसे पक्षी न खरीदें जो कमज़ोर हों, पंख लटकाकर सुस्त बैठे रहें, या जिनका सिर सूजा हो, नाक बहती हो, या कलगी और गलकंबल का रंग बदल गया हो (बर्ड फ्लू कार्य योजना)। पूछें कि पक्षियों को कौन-कौन से टीके लगे हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या गिरिराजा एक नस्ल है?
नहीं। यह एक उन्नत किस्म है, जिसे पशु चिकित्सा कॉलेज, बेंगलुरु ने 1989 में निकाला था; यह कॉलेज अब KVAFSU का हिस्सा है (KVAFSU)। यह NBAGR की सूची की पंजीकृत मुर्गी नस्लों में नहीं है (ICAR-NBAGR)।
गिरिराजा मुर्गी कितने अंडे देती है?
UAS Bangalore के पोर्टल के अनुसार साल में करीब 140–150 अंडे, हर अंडा करीब 55–60 ग्राम का; अंडे देना करीब 170 दिन की उम्र में शुरू होता है (UAS Bangalore)। दूसरे अध्ययनों में आँकड़े अलग हैं।
गिरिराजा कितनी भारी होती है?
बड़े होने पर मुर्गों का वज़न करीब 4–5 किलो और मुर्गियों का करीब 3.5–3.75 किलो होता है, और 8 हफ़्ते के युवा पक्षियों का करीब 1.6–1.9 किलो (UAS Bangalore)। दूसरे अध्ययनों में आँकड़े अलग हैं।
गिरिराजा के चूजे कहाँ मिलेंगे?
पशु चिकित्सा कॉलेज, बेंगलुरु में KVAFSU के पोल्ट्री विज्ञान विभाग से, जो किसानों और स्वयं सहायता समूहों को एक दिन के चूजे देता है (KVAFSU)। कर्नाटक में आपका नज़दीकी पशु चिकित्सालय भी बता सकता है कि चूजे कहाँ मिलेंगे।
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