जाफराबादी गुजरात के सौराष्ट्र इलाके की, गिर के जंगल के आसपास की, भारी-भरकम काली दुधारू भैंस है, और NBAGR इसे भारत की भैंस नस्लों में सबसे भारी बताता है (NBAGR डेटाबेस)। इसका नाम जाफराबाद कस्बे के नाम पर पड़ा है, और इसके भारी सींग सिर के दोनों ओर नीचे लटककर फिर ऊपर की ओर मुड़ते हैं। इस पेज पर जानें कि इसे कैसे पहचानें और खरीदने से पहले क्या जाँचें।
इसे कैसे पहचानें
- सींग: भारी, चपटे और मोटे, और इनकी बनावट में बहुत फ़र्क होता है। आम तौर पर ये निकलते ही सिर से सटे रहते हैं, सिर के दोनों ओर नीचे की तरफ़ जाते हैं, फिर ऊपर और अंदर की ओर मुड़ते हैं, और अक्सर एक छल्ला बना लेते हैं (NBAGR डेटाबेस, ICAR-CIRB)।
- सिर: बड़ा, चौड़े, उभरे हुए, गुंबद जैसे माथे वाला। सींगों के साथ मिलकर इससे आँखें छोटी और उनींदी दिखती हैं, खासकर नर भैंसे में (ICAR-CIRB)।
- रंग: काला; कुछ पशुओं की पूँछ के सिरे का गुच्छा सफ़ेद या स्लेटी होता है, या माथे और पैरों पर सफ़ेद निशान होते हैं (NBAGR डेटाबेस, ICAR-CIRB)।
- शरीर: लंबा, गहरा और भारी-भरकम; चौड़ी और मोटी गर्दन, लंबे कान और अच्छी तरह विकसित अयन (ICAR-CIRB)।
- आकार और वज़न: कंधे तक भैंसे की ऊँचाई करीब 143 सेमी और भैंस की करीब 139 सेमी होती है। वयस्क भैंसे का औसत वज़न करीब 700 किलो और भैंस का करीब 620 किलो होता है (NBAGR डेटाबेस)।
यह किस काम आती है
- दूध। NBAGR के रिकॉर्ड में एक ब्यांत में करीब 2,240 किलो दूध (करीब 2,200 लीटर) दर्ज है, जिसमें करीब 7.7% फ़ैट होता है (NBAGR डेटाबेस); एक ब्यांत करीब 300 दिन चलता है (ICAR-CIRB)।
- भारी काम। भैंसे इतने मज़बूत होते हैं कि भारी बोझ खींच सकें, और NBAGR इस नस्ल के उपयोगों में खेती का काम और ढुलाई भी गिनाता है (NBAGR डेटाबेस, ICAR-CIRB)। TNAU के अनुसार भारी नर भैंसों से जुताई और गाड़ी खींचने का काम लिया जाता है (TNAU)।
- खूब चरने वाली। यह खूब चरती है और अपने मूल इलाके में साल भर प्राकृतिक चरागाहों पर रखी जाती है (NBAGR डेटाबेस)।
- ब्याना। पहला बछड़ा करीब 45 महीने की उम्र में होता है, फिर करीब हर 15 महीने में एक (NBAGR डेटाबेस)।
यह मुख्य रूप से कहाँ मिलती है
इसका मूल इलाका गुजरात का सौराष्ट्र है, गिर के जंगल में और उसके आसपास: जूनागढ़, अमरेली, भावनगर, राजकोट, जामनगर और पोरबंदर जिले (NBAGR डेटाबेस)। NBAGR ने इसे गुजरात की नस्ल के रूप में पंजीकृत किया है (नस्ल रजिस्टर); इसके दूसरे नाम भावनगरी, गिर और जाफरी हैं। यह मालधारी पशुपालकों की रोज़ी-रोटी का मुख्य सहारा है, और रबारी, भरवाड़, अहेर और मेर जैसे समुदाय इसे पालते हैं (NBAGR डेटाबेस)। 2013 के नस्ल सर्वेक्षण में करीब 5.7 लाख जाफराबादी भैंसें गिनी गई थीं (NBAGR डेटाबेस)।
जाफराबादी भैंस चाहिए?
कट्टुतरै पूरे भारत में चलता है। जाफराबादी भैंसों के लिए ऐप में “जाफराबादी” खोजें, या अपने पास की बिकाऊ भैंसें देखें। नस्ल विक्रेता बताता है और कट्टुतरै उसकी जाँच नहीं करता, इसलिए पैसे देने से पहले भैंस को खुद देखें।
पालने के सुझाव
- भरपूर चारा और जगह। इतनी बड़ी भैंस खाती भी बहुत है। गुजरात में यह प्राकृतिक चरागाहों में चरती है, और इसे मक्का, ज्वार और मूँगफली की बेलों जैसा हरा चारा, सूखे डंठल और भूसा मिलता है; साथ में खली या दाना भिगोकर दुहने के समय खिलाया जाता है, खासकर गाभिन होने पर या दूध के दिनों में (ICAR-CIRB)। खरीदने से पहले पक्का कर लें कि आप इसे पूरा चारा दे पाएंगे।
- ठंडक। गुजरात में भैंसों के झुंड पानी में बैठते-लोटते हैं, ज़्यादातर दोपहर में (ICAR-CIRB)। गर्मी में दिन में कम से कम दो बार भैंस को पानी में बैठने दें या उस पर पानी छिड़कें (ICAR-CIRB)।
- सींगों के लिए जगह। बाड़े में, नाँद पर और गाड़ी में पूरी जगह रखें।
- सेहत। भैंस की सेहत में दी गई तालिका के हिसाब से टीके लगवाएं और कृमिनाशन (पेट के कीड़ों की दवा) कराएं।
खरीदने के सुझाव
- सींग, सिर और आकार देखें। सिर के दोनों ओर लटककर ऊपर मुड़ने वाले भारी सींग, उभरा हुआ माथा और भारी-भरकम काला शरीर इस नस्ल की पहचान हैं (NBAGR डेटाबेस)। छोटे, कसकर मुड़े सींग इसके बजाय मुर्रा की ओर इशारा करते हैं।
- संकर पशु आम हैं, और विज्ञापन में नस्ल का नाम विक्रेता का बताया हुआ होता है; कट्टुतरै उसकी जाँच नहीं करता। भैंस को खुद देखें, और पूछें कि उसकी माँ कहाँ से आई थी।
- ले जाने की तैयारी करें। गुजरात से भारी भैंस ले जाने के लिए पशु चिकित्सक का यह प्रमाणपत्र चाहिए कि वह सफ़र के लायक है, और ऐसी गाड़ी चाहिए जिसका फ़र्श फिसलने वाला न हो; एक मालवाहक गाड़ी में छह से ज़्यादा पशु न हों (AWBI)। बाकी जाँचों के लिए भैंस कैसे खरीदें देखें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या जाफराबादी सबसे भारी भैंस नस्ल है?
NBAGR इसे भारत की भैंस नस्लों में सबसे भारी बताता है: वयस्क भैंसे का औसत वज़न करीब 700 किलो और भैंस का करीब 620 किलो होता है (NBAGR डेटाबेस)।
जाफराबादी भैंस कितना दूध देती है?
करीब 300 दिन के एक ब्यांत में औसतन करीब 2,240 किलो, जिसमें करीब 7.7% फ़ैट होता है (NBAGR डेटाबेस, ICAR-CIRB)।
क्या जाफराबादी छोटे फ़ार्म के लिए ठीक है?
तभी, जब आपके पास भरपूर चारा और जगह हो, क्योंकि यह बड़ी, भारी और खूब चरने वाली भैंस है (NBAGR डेटाबेस)। चारा कम हो, तो सुरती जैसी हल्की नस्ल, जो कम खाती है, आपके लिए ज़्यादा ठीक रह सकती है (NBAGR डेटाबेस)।
आगे पढ़ें
जाफराबादी की तुलना गुजरात की दूसरी नस्लों, सुरती और मेहसाना, से करें, या सभी नस्लें यहाँ देखें: भैंस पालन: दक्षिण भारत में नस्लें, खरीद और देखभाल। अपने पास भैंसें ढूँढने के लिए बिकाऊ भैंसें देखें।
