अमृतमहल मध्य कर्नाटक की स्लेटी रंग की भारवाही (खेती और गाड़ी के काम की) नस्ल है। इसे सबसे पहले मैसूर रियासत के झुंडों में तैयार किया गया था, और यह अपनी ताकत, सहनशक्ति और सड़क पर तेज़ चाल के लिए जानी जाती है। यह कर्नाटक की पंजीकृत गाय-बैल नस्लों में से एक है (ICAR-NBAGR)। किसान इसे खेती के काम के लिए पसंद करते हैं; इसकी गायें कम दूध देती हैं।
पहचान कैसे करें
- रंग: स्लेटी, लगभग सफ़ेद से लेकर लगभग काले तक। बैलों की गर्दन, कंधे, कूबड़ और पिछला हिस्सा ज़्यादा गहरे रंग का होता है, और कुछ पशुओं के चेहरे और गलकंबल पर सफ़ेद या स्लेटी निशान होते हैं (NBAGR डेटाबेस)। थूथन और पूँछ का गुच्छा काला होता है, और चमड़ी पतली, कसी हुई और काली होती है (NBAGR अध्ययन)।
- सिर और सींग: लंबा सिर, जो थूथन की ओर पतला होता जाता है, और माथे के बीच में ऊपर से नीचे तक एक खाँच। सींग लंबे होते हैं। वे सिर के ऊपर से पास-पास निकलते हैं, ऊपर और पीछे की ओर जाते हैं, फिर अंदर की ओर मुड़ते हैं और नुकीले काले सिरों पर खत्म होते हैं, जो कभी-कभी लगभग आपस में छू जाते हैं (NBAGR डेटाबेस, NBAGR अध्ययन)।
- शरीर: छोटे कान, जो आड़े (समतल) रहते हैं; अच्छी तरह उभरा कूबड़, जो थोड़ा आगे की ओर रहता है; और पतला गलकंबल, जो ज़्यादा नीचे नहीं लटकता (NBAGR अध्ययन)।
- कद और वज़न: नर कंधे तक करीब 133 सेमी ऊँचे होते हैं और मादा करीब 126 सेमी। NBAGR के रिकॉर्ड के अनुसार औसत वज़न नर का करीब 500 किलो और मादा का करीब 320 किलो है (NBAGR डेटाबेस)।
- स्वभाव: तेज़ मिज़ाज और फुर्तीला (NBAGR डेटाबेस)। खुले चरागाह में आज़ाद रहने वाले झुंड बेसब्र और जंगली हो सकते हैं (KVAFSU)।
किस काम आती है
- खेती का काम और गाड़ी खींचना। अमृतमहल एक भारवाही नस्ल है, जो अपनी ताकत और सहनशक्ति के लिए जानी जाती है, और इसके बैल दुलकी चाल और तेज़ ढुलाई के लिए ठीक हैं (NBAGR डेटाबेस)। आज़ादी से पहले मैसूर के शासक इन पशुओं को ढुलाई, सेना और खेती के काम के लिए रखते थे (KVAFSU)।
- दूध। कम। NBAGR के रिकॉर्ड में एक ब्यांत में करीब 572 किलो दूध दर्ज है (NBAGR डेटाबेस)। हासन जिले में 2017–18 के एक ICAR सर्वे में किसानों ने हर गाय से रोज़ करीब 3 लीटर दूध बताया (ICAR सर्वे)।
- बछड़े। एक बार में एक। गायें आम तौर पर करीब 4 साल की उम्र में पहली बार ब्याती हैं, और फिर करीब हर 14–18 महीने में एक बछड़ा देती हैं (NBAGR डेटाबेस, ICAR सर्वे)।
मुख्य रूप से कहाँ मिलती है
NBAGR के नस्ल रिकॉर्ड के अनुसार इसका मूल इलाका मध्य कर्नाटक है: चिक्कमगलूरु, चित्रदुर्ग, हासन, शिवमोग्गा, दावणगेरे और तुमकूरु जिले (NBAGR डेटाबेस)। यह नस्ल मैसूर राजघराने के शाही पशु-फ़ार्म से निकली है। इसकी शुरुआत उन हल्लिकर गायों से हुई, जिन्हें विजयनगर का एक सूबेदार श्रीरंगपट्टण लाया था। मैसूर के शासकों ने इसमें और पशु जोड़े, कावल कहलाने वाली चरागाहें अलग रखीं और इस फ़ार्म का नाम बेन्ने चावडी रखा; टीपू सुल्तान ने इसका नाम बदलकर अमृत महल रखा और झुंड के प्रजनन के नियम बनाए (कर्नाटक पशुपालन विभाग, KVAFSU)।
आज कर्नाटक का पशुपालन विभाग अमृतमहल के झुंड कावल घास के मैदानों पर रखता है — चिक्कमगलूरु जिले के अज्जमपुरा में अपने प्रजनन केंद्र पर, और चिक्कमगलूरु, चित्रदुर्ग और हासन जिलों के उप-केंद्रों पर (कर्नाटक पशुपालन विभाग)। KVAFSU तुमकूरु जिले में तिपटूर के पास कोनेहल्ली में अपने अनुसंधान केंद्र पर एक झुंड रखता है (KVAFSU)। 2013 के नस्ल सर्वे में कर्नाटक के करीब 1,05,000 गाय-बैल शुद्ध अमृतमहल थे, और करीब 1,24,000 और पशु ग्रेडेड थे, यानी आंशिक रूप से अमृतमहल (NBAGR अध्ययन)।
अमृतमहल गाय-बैल चाहिए?
अपने पास बिकाऊ अमृतमहल गायें और बैल ढूँढने के लिए कट्टुतरै ऐप में “अमृतमहल” खोजें, या सभी बिकाऊ गायें देखें। नस्ल विक्रेता बताता है और कट्टुतरै उसकी जाँच नहीं करता, इसलिए पैसे देने से पहले पशु को खुद देखें।
पालने के सुझाव
- पहले चराई। NBAGR के अनुसार इस नस्ल को छोटे झुंडों में, खुले में चराकर पाला जाता है, जहाँ धूप और बारिश से बचने के लिए सिर्फ़ पेड़ होते हैं (NBAGR डेटाबेस)। विभाग के केंद्र चारा उगाते हैं और अपनी कावल ज़मीन पर घास और चारे वाले पेड़ों को बचाकर रखते हैं (कर्नाटक पशुपालन विभाग)। छोटे फ़ार्म पर चराई के साथ सूखे और हरे चारे की योजना बनाएं: देखें गाय-बैल कैसे पाले जाते हैं।
- नरमी से संभालें। खुले चरागाह में आज़ाद पले पशु को लोगों, रस्सी और बाड़े की आदत पड़ने में समय लगता है। नए खरीदे गाय-बैल से बच्चों को दूर रखें।
- बुनियादी बातें न छोड़ें। कर्नाटक की छह देसी नस्लों पर हुए ICAR सर्वे में लगभग सभी किसान दिन में अपने पशु चराते थे और घर पर सूखी घास और हरा चारा देते थे, पर सिर्फ़ करीब एक-चौथाई किसान खनिज मिश्रण देते थे, करीब आधे टीके लगवाते थे और करीब एक-तिहाई पेट के कीड़ों की दवा देते थे (ICAR सर्वे)।
- सेहत। सरकारी टीकाकरण तालिका के हिसाब से टीके लगवाएं, और पेट के कीड़ों और किलनी (चिचड़ी) के बारे में अपने पशु चिकित्सक से पूछें: देखें गाय-बैल को स्वस्थ कैसे रखें।
खरीदने के सुझाव
- पहचान के निशान देखें: स्लेटी रंग, बैल में ज़्यादा गहरा; काला थूथन और पूँछ का काला गुच्छा; लंबा, पतला चेहरा और माथे पर खाँच; और लंबे सींग, जो पास-पास से उठते हैं और जिनके सिरे नुकीले और काले होते हैं। छोटे या दूर-दूर लगे सींग, बड़ा लटकता गलकंबल या लंबे लटकते कान इस नस्ल के विवरण से मेल नहीं खाते और संकर होने का इशारा करते हैं।
- संकर पशु आम हैं। नस्ल सर्वे में ग्रेडेड पशु शुद्ध पशुओं से ज़्यादा थे (NBAGR अध्ययन)। विज्ञापन में नस्ल का नाम विक्रेता का बताया हुआ होता है, और कट्टुतरै उसकी जाँच नहीं करता। पशु की माँ और झुंड को देखें, और पहचान के निशान खुद जाँचें।
- नीलामी में शुद्ध नर बछड़े। विभाग के अमृतमहल केंद्र किसानों को शुद्ध नस्ल के नर बछड़े नीलामी से बेचते हैं (कर्नाटक पशुपालन विभाग)। अगली नीलामी कब है, यह अपने नज़दीकी पशु चिकित्सालय से पूछें।
- संभालते हुए देखें। पैसे देने से पहले देखें कि पशु को रस्सी से ले जाते, बाँधते और गाड़ी में चढ़ाते समय वह कैसा रहता है; तेज़ मिज़ाज पशु को शुरू में संभालना मुश्किल हो सकता है।
- उम्र, सेहत और कागज़: दाँत गिनें, सेहत जाँचें और कान के टैग का नंबर अपनी रसीद पर लिखवाएं: देखें गाय या बैल खरीदना।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या अमृतमहल दूध की नस्ल है?
नहीं, यह भारवाही नस्ल है। किसानों के अंदाज़े से गायें रोज़ करीब 3 लीटर दूध देती हैं, और NBAGR के रिकॉर्ड के अनुसार एक ब्यांत में करीब 572 किलो। अगर आपको बेचने के लिए दूध चाहिए, तो देखें देसी गाय या संकर।
अमृतमहल बैल का वज़न कितना होता है?
NBAGR के रिकॉर्ड के अनुसार बड़े नर का औसत वज़न करीब 500 किलो और मादा का करीब 320 किलो होता है (NBAGR डेटाबेस)।
इस नाम का मतलब क्या है?
KVAFSU के अनुसार “अमृत” का मतलब दूध है और “महल” का मतलब घर। मैसूर के शासकों के पशु-फ़ार्म का पहले का नाम बेन्ने चावडी था, यानी मक्खन का स्रोत (KVAFSU, कर्नाटक पशुपालन विभाग)।
आगे पढ़ें
अमृतमहल की तुलना हल्लिकर से करें, जिस नस्ल से इसके शाही झुंड की शुरुआत हुई थी, और उत्तर कर्नाटक की खिल्लारी से भी। खरीदने और देखभाल के लिए गाय-बैल पालन: देसी नस्लें, संकर, खरीद और देखभाल पढ़ें, और बिकाऊ गायें और बिकाऊ बैल देखें।

