बारगुर इरोड जिले की बारगुर पहाड़ियों के जंगलों की भूरी-सफ़ेद पहाड़ी नस्ल है, जिसे खड़ी, ऊबड़-खाबड़ ज़मीन पर खेती के काम के लिए पाला जाता है (NBAGR डेटाबेस)। यह हल्की, फुर्तीली और मज़बूत है, पर अर्ध-जंगली है और इसे सिखाना मुश्किल है। यह तमिलनाडु की चार पंजीकृत गाय-बैल नस्लों में से एक है (ICAR-NBAGR), और इसकी संख्या इतनी घट गई है कि TANUVAS इसे संकटग्रस्त नस्ल मानता है (TANUVAS)।
पहचान कैसे करें
- रंग: लाल-भूरा, सफ़ेद धब्बों के साथ। रंग चेरी जैसे लाल से हल्के लाल तक होता है और सफ़ेद हिस्सा कम-ज़्यादा होता है; कुछ पशु सफ़ेद या गहरे भूरे होते हैं (TANUVAS अध्ययन, ICAR-NBAGR, TNAU)।
- भूरे अंग: थूथन, पलकें और खुर ज़्यादातर भूरे होते हैं, और सींग हल्के भूरे (TANUVAS अध्ययन, ICAR-NBAGR)।
- सींग: मध्यम आकार के, जड़ पर पास-पास, पीछे, बाहर और ऊपर की ओर जाते हुए, आगे की ओर मुड़े हुए, और सिरे पर नुकीले (ICAR-NBAGR)।
- शरीर: मध्यम आकार का, गठा हुआ और हल्की बनावट वाला (ICAR-NBAGR, TNAU)।
- कद और वज़न: नर कंधे तक करीब 126 सेमी ऊँचे होते हैं और मादा करीब 122 सेमी; बड़े नर का औसत वज़न करीब 340 किलो और मादा का करीब 295 किलो होता है (ICAR-NBAGR)।
किस काम आती है
- पहाड़ी ज़मीन पर काम। बारगुर गाय-बैल ऊबड़-खाबड़, पहाड़ी ज़मीन पर खेत के काम के लिए तैयार हुए थे, और इसके बैल दुलकी चाल में अपनी रफ़्तार और सहनशक्ति के लिए जाने जाते हैं (ICAR-NBAGR, NBAGR अध्ययन)।
- खाद और खेती का काम। पहाड़ों में इन पशुओं को ज़्यादातर गोबर के लिए और भारवाही (खेती और गाड़ी के) काम के लिए रखा जाता है (NBAGR अध्ययन)।
- कम दूध। बछड़े के दूध पी लेने के बाद गायें रोज़ 0.5–3 लीटर दूध देती हैं (NBAGR अध्ययन); NBAGR के रिकॉर्ड में एक ब्यांत में करीब 350 किलो दूध दर्ज है (ICAR-NBAGR)।
- बछड़े। एक बार में एक, करीब हर 17 महीने में (ICAR-NBAGR)।
मुख्य रूप से कहाँ मिलती है
इसका मूल इलाका छोटा है: समुद्र तल से करीब 1,000 मीटर ऊँची बारगुर पहाड़ियाँ (NBAGR अध्ययन), जिन्हें NBAGR का रिकॉर्ड इरोड जिले के भवानी तालुका में बताता है (ICAR-NBAGR); अब ये पहाड़ियाँ अंतियूर तालुका में आती हैं (TANUVAS)। ये पशु साल का ज़्यादातर समय जंगल में बिताते हैं, पट्टी कहलाने वाले बाड़ों में, जिनमें 50–200 पशु रहते हैं। फ़सल कटाई के काम के लिए ये गाँवों में लौटते हैं, और जनवरी के आसपास इन्हें हाँककर बारगुर से करीब 43 किमी उत्तर में नमक चाटने की जगहों पर ले जाया जाता है (ICAR-NBAGR)।
इनकी संख्या 1977 में 95,400 से घटकर 2019 में 12,106 रह गई, और प्रजनन लायक शुद्ध गायें 10,000 से भी कम बचीं (TANUVAS)।
बारगुर गाय-बैल चाहिए?
बारगुर गाय-बैल जिन जिलों से आते हैं, वहाँ के गाय के विज्ञापन देखें, या अपने पास ढूँढने के लिए कट्टुतरै ऐप में “बारगुर” खोजें। नस्ल विक्रेता बताता है और कट्टुतरै उसकी जाँच नहीं करता, इसलिए पैसे देने से पहले पशु को खुद देखें।
1 नवंबर 2026 को इसके मूल जिलों में गाय के विज्ञापन:
पालने के सुझाव
- जंगल में चराई, खरीदा चारा लगभग नहीं। पहाड़ों में बारगुर गाय-बैल जंगल की चराई पर पलते हैं, और उन्हें ऊपर से लगभग कुछ नहीं दिया जाता (NBAGR अध्ययन)। जंगल से दूर, हरे और सूखे चारे और खनिज मिश्रण की योजना बनाएं: देखें गाय-बैल कैसे पाले जाते हैं।
- शांति और धीरज से संभालें। ये पशु संवेदनशील और तेज़ मिज़ाज होते हैं, इन्हें सिखाना मुश्किल होता है और ये अजनबियों से चौकन्ने रहते हैं (ICAR-NBAGR, TNAU)। जवान बैलों को जल्दी और धीरज से सिखाना शुरू करें, और मज़बूत बाड़ लगाकर रखें।
- सेहत। समय पर टीके लगवाएं, और पेट के कीड़ों और किलनी (चिचड़ी) के बारे में अपने पशु चिकित्सक से पूछें: देखें गाय-बैल को स्वस्थ कैसे रखें।
खरीदने के सुझाव
- पहचान के निशान देखें: लाल-भूरे रंग पर सफ़ेद धब्बे, भूरा थूथन और भूरे खुर, जड़ पर पास-पास लगे हल्के भूरे सींग, और गठा हुआ, हल्का शरीर।
- पहली बार पालने वालों के लिए नहीं। अर्ध-जंगली, तेज़ मिज़ाज पशु के लिए अनुभवी पालक और अच्छी चराई चाहिए।
- शुद्ध पशु कम हैं। यह नस्ल बारगुर के आसपास के छोटे से इलाके में ही रहती है। TANUVAS का बारगुर पशु अनुसंधान केंद्र करीब 125 पशुओं का शुद्ध झुंड रखता है, और उसका लक्ष्य इलाके के किसानों को प्रजनन के लिए पशु देना है (TANUVAS)।
- संकर पशु आम हैं। विज्ञापन में नस्ल का नाम विक्रेता का बताया हुआ होता है, और कट्टुतरै उसकी जाँच नहीं करता। झुंड को देखें, और पहचान के निशान खुद जाँचें।
- उम्र, सेहत और कागज़: देखें गाय या बैल खरीदना।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या बारगुर गाय-बैल और बारगुर भैंस एक ही हैं?
नहीं। NBAGR बारगुर गाय-बैल और बारगुर भैंस को दो अलग-अलग नस्लों के रूप में पंजीकृत करता है, और दोनों इरोड जिले की बारगुर पहाड़ियों से हैं (NBAGR भैंस रजिस्टर)।
क्या बारगुर नए पालक के लिए ठीक है?
आम तौर पर नहीं। ये पशु अर्ध-जंगली और तेज़ मिज़ाज होते हैं, और जंगल की चराई के पास अनुभवी चरवाहों के हाथ में ही ठीक से पलते हैं।
बारगुर गाय कितना दूध देती है?
बछड़े के दूध पी लेने के बाद रोज़ सिर्फ़ 0.5–3 लीटर (NBAGR अध्ययन)।
कितने बारगुर गाय-बैल बचे हैं?
मूल इलाके की 2019 की गिनती में करीब 12,106, जिनमें प्रजनन लायक शुद्ध गायें 10,000 से कम थीं (TANUVAS)।
आगे पढ़ें
बारगुर की तुलना तमिलनाडु की दूसरी देसी नस्लों — कांगेयम, अम्बलाचेरी और पुलिकुलम — से करें। खरीदने और देखभाल के लिए गाय-बैल पालन: देसी नस्लें, संकर, खरीद और देखभाल पढ़ें, और बिकाऊ गायें और बिकाऊ बैल देखें।

