अम्बलाचेरी तटीय डेल्टा की छोटी, स्लेटी रंग की भारवाही (खेती और गाड़ी के काम की) नस्ल है, जिसे तिरुवारूर और नागपट्टिनम जिलों के गीले, दलदली धान के खेतों की जुताई के लिए तैयार किया गया। इसका नाम नागपट्टिनम जिले के अम्बलाचेरी गाँव पर पड़ा है, और यह तमिलनाडु की चार पंजीकृत गाय-बैल नस्लों में से एक है (ICAR-NBAGR)। चेहरे, टाँगों और पूँछ पर सफ़ेद निशानों से इसे आसानी से अलग पहचाना जा सकता है (NBAGR डेटाबेस)।
पहचान कैसे करें
- रंग: बछड़े लाल या भूरे पैदा होते हैं, 3–4 महीने की उम्र में स्लेटी होने लगते हैं और 6–8 महीने तक पूरी तरह स्लेटी हो जाते हैं। गायें स्लेटी होती हैं, और चेहरे, गर्दन और कूल्हों पर ज़्यादा गहरी; साँड़ गहरे स्लेटी होते हैं, और उनके कूबड़, टाँगों और पुट्ठों पर काला रंग होता है; बैल स्लेटी होते हैं (ICAR-NBAGR, TANUVAS अध्ययन)।
- सफ़ेद निशान, इस नस्ल की पहचान: माथे पर सफ़ेद तारा, चारों टाँगों पर जोड़ों (हॉक) से नीचे सफ़ेद मोज़े जैसे निशान, पूँछ का गुच्छा सफ़ेद या कुछ सफ़ेद, और अक्सर खुर भी कुछ सफ़ेद (ICAR-NBAGR, TANUVAS अध्ययन)।
- सींग और कान: सींग बहुत छोटे होते हैं — साँड़ों में मोटे, गायों में पतले — और बाहर और फिर अंदर की ओर मुड़ते हैं; कान छोटे होते हैं और आड़े (समतल) रहते हैं (ICAR-NBAGR, TANUVAS अध्ययन)। कई बैलों के सींग कम उम्र में ही निकाल दिए जाते हैं; यह एक स्थानीय रिवाज है (TNAU)।
- कद और वज़न: हल्की बनावट वाला पशु। नर कंधे तक करीब 117 सेमी ऊँचे होते हैं और मादा करीब 105 सेमी; बड़े नर का औसत वज़न करीब 297 किलो और मादा का करीब 219 किलो होता है (ICAR-NBAGR)।
किस काम आती है
- गीले खेतों में काम। हल्की बनावट डेल्टा की नरम मिट्टी के लिए ठीक है। बैल दलदली धान के खेतों में जुताई, ढुलाई, दँवाई और खेत समतल करने का काम करते हैं, और तेज़ धूप में 6–7 घंटे काम कर सकते हैं; TANUVAS के एक अध्ययन में एक जोड़ी ने गाड़ी समेत करीब 2,000 किलो 7 घंटे में 20 किमी तक खींचा (ICAR-NBAGR, TANUVAS अध्ययन)।
- घर के लिए दूध। बछड़े के दूध पी लेने के बाद रोज़ करीब 2 लीटर, करीब 8 महीने के ब्यांत में — कुल करीब 494 किलो — जो ज़्यादातर घर में इस्तेमाल होता है (TANUVAS दूध अध्ययन, ICAR-NBAGR)।
- खाद। फ़सल कटने के बाद चरवाहे गाँव के पशुओं को 250–400 के झुंडों में इकट्ठा करते हैं, जून या जुलाई तक चराते हैं, और खाद के लिए रात में उन्हें खेतों में बिठाते हैं (TANUVAS अध्ययन)।
- बछड़े। एक बार में एक। NBAGR के रिकॉर्ड के अनुसार पहला ब्यांत करीब 52 महीने की उम्र में होता है, फिर करीब हर 15 महीने में एक बछड़ा (ICAR-NBAGR)।
मुख्य रूप से कहाँ मिलती है
NBAGR के रिकॉर्ड में पूरा तिरुवारूर जिला और नागपट्टिनम जिले के छह ब्लॉक आते हैं: कीलैयूर, किलवेलूर, नागपट्टिनम, तलैनायर, तिरुमरुगल और वेदारण्यम (ICAR-NBAGR)। TANUVAS के शोधकर्ताओं को नस्ल के सबसे ठेठ पशु तिरुत्तुरैपूंडी और तलैनायर के आसपास मिले (TANUVAS अध्ययन)। TNAU थंजावुर जिले को भी जोड़ता है और इस नस्ल के दूसरे नाम बताता है: जाति माडु, मोट्टै माडु, मोलै माडु और तेरकत्ति माडु (TNAU)।
साल 2000 के आसपास इस इलाके में करीब 2.8 लाख अम्बलाचेरी गाय-बैल थे; 2013 के नस्ल सर्वे में करीब 39,050 गिने गए (ICAR-NBAGR)। इस गिरावट की मुख्य वजहें खेती की मशीनें और दूध के लिए संकरण हैं (TANUVAS अध्ययन)।
अम्बलाचेरी गाय-बैल चाहिए?
अम्बलाचेरी गाय-बैल जिन जिलों से आते हैं, वहाँ के गाय के विज्ञापन देखें, या अपने पास ढूँढने के लिए कट्टुतरै ऐप में “अम्बलाचेरी” खोजें। नस्ल विक्रेता बताता है और कट्टुतरै उसकी जाँच नहीं करता, इसलिए पैसे देने से पहले पशु को खुद देखें।
1 नवंबर 2026 को इसके मूल जिलों में गाय के विज्ञापन:
पालने के सुझाव
- धान का पुआल और पास में चराई। गाँव के झुंडों में धान का पुआल मुख्य चारा है। पशु 3–4 किमी के अंदर ही चरते हैं, दिन में खूँटों या पेड़ों से बाँधे जाते हैं और रात में शेड में रखे जाते हैं (TANUVAS अध्ययन)।
- काम करने वाले बैलों और दूध देने वाली गायों को ऊपर से दाना। चावल का चोकर, भीगा बिनौला और खली काम करने वाले बैलों को और ब्यांत की शुरुआत वाली गायों को दी जाती है (TANUVAS अध्ययन)। कितना चारा दें, इसके लिए देखें गाय-बैल कैसे पाले जाते हैं।
- दूध दुहना। गायों को दिन में दो बार हाथ से दुहा जाता है, सुबह करीब 5 बजे और दोपहर बाद 4 बजे, और हर बार दुहने से पहले और बाद में बछड़ा दूध पीता है (TANUVAS दूध अध्ययन)।
- सेहत। TANUVAS अध्ययन के किसानों ने लंगड़ी बुखार, गलघोंटू और खुरपका-मुंहपका के टीके लगवाए थे (TANUVAS अध्ययन)। गाय-बैल को स्वस्थ कैसे रखें में दी गई टीकाकरण तालिका का पालन करें।
खरीदने के सुझाव
- सफ़ेद निशान देखें: स्लेटी शरीर, माथे पर सफ़ेद तारा, जोड़ों (हॉक) के नीचे सफ़ेद मोज़े जैसे निशान और पूँछ का सफ़ेद सिरा। इन निशानों के बिना किसी स्लेटी पशु के अम्बलाचेरी होने की संभावना कम है।
- सींग देखकर फ़ैसला न करें। सींग वैसे भी छोटे होते हैं, और कई बैलों के सींग निकाल दिए गए होते हैं।
- यह कांगेयम नहीं है। कांगेयम गाय-बैल देखने में मिलते-जुलते हैं, पर बड़े होते हैं, और उनके लंबे सींग एक-दूसरे की ओर मुड़ते हैं: देखें कांगेयम गाय-बैल: नस्ल, वज़न और कहाँ मिलते हैं।
- संकर पशु आम हैं। इलाके के किसान दूध के लिए संकर गायों की ओर चले गए हैं (TANUVAS अध्ययन)। विज्ञापन में नस्ल का नाम विक्रेता का बताया हुआ होता है, और कट्टुतरै उसकी जाँच नहीं करता। पशु की माँ और झुंड को देखें, और पहचान के निशान खुद जाँचें।
- कोरुक्कै के बारे में पूछें। अम्बलाचेरी गाँव के पास कोरुक्कै में एक सरकारी फ़ार्म इस नस्ल को बचाने और किसानों को पशु बेचने के लिए बनाया गया था (TANUVAS अध्ययन)। अपने पशु चिकित्सालय से पूछें कि वहाँ पशु मिल सकते हैं या नहीं।
- उम्र, सेहत और कागज़: देखें गाय या बैल खरीदना।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या अम्बलाचेरी गीले धान के खेतों के लिए ठीक है?
हाँ। इसे दलदली धान के खेतों में काम के लिए तैयार किया गया था, और इसकी हल्की बनावट डेल्टा की नरम मिट्टी के लिए ठीक है (ICAR-NBAGR)।
कई अम्बलाचेरी बैलों के सींग क्यों नहीं होते?
इस नस्ल के सींग बहुत छोटे होते हैं, और इस इलाके में जवान नरों के सींग अक्सर निकाल दिए जाते हैं — यह एक स्थानीय रिवाज है, यह नस्ल बिना सींग के पैदा नहीं होती (TNAU)।
अम्बलाचेरी गाय कितना दूध देती है?
बछड़े के दूध पी लेने के बाद रोज़ करीब 2 लीटर, जो ज़्यादातर घर में इस्तेमाल होता है (TANUVAS दूध अध्ययन)। बेचने के लिए दूध चाहिए, तो देखें देसी गाय या संकर।
आगे पढ़ें
अम्बलाचेरी की तुलना तमिलनाडु की दूसरी देसी नस्लों — कांगेयम, पुलिकुलम और बारगुर — से करें। खरीदने और देखभाल के लिए गाय-बैल पालन: देसी नस्लें, संकर, खरीद और देखभाल पढ़ें, और बिकाऊ गायें और बिकाऊ बैल देखें।

