देवनी बीदर–लातूर के सीमावर्ती इलाके की सफ़ेद, काले निशानों वाली नस्ल है, जिसे दूध और भारी खेती के काम, दोनों के लिए पाला जाता है। इसका नाम महाराष्ट्र के लातूर जिले के देवनी तालुका से पड़ा है (NBAGR डेटाबेस), और NBAGR इसे महाराष्ट्र और कर्नाटक की नस्ल के रूप में पंजीकृत करता है (ICAR-NBAGR)। KVAFSU इसे कर्नाटक की अकेली कारगर दोहरे उपयोग वाली (दूध और काम की) गाय-बैल नस्ल बताता है (KVAFSU)।
पहचान कैसे करें
- रंग: सफ़ेद, काले रंग के साथ, तीन रंग-किस्मों में। वानेरा सफ़ेद होती है और उसके चेहरे के दोनों ओर काला रंग होता है; शेवेरा, जिसे वाघ्या भी कहते हैं, सफ़ेद होती है और उस पर बेतरतीब काले धब्बे होते हैं; बालंक्या साफ़ सफ़ेद होती है, और काले धब्बे हों भी तो सिर्फ़ शरीर के निचले हिस्से पर (NBAGR डेटाबेस, लातूर अध्ययन)।
- सिर: चौड़ा, उभरा हुआ, थोड़ा फूला हुआ माथा, जो हमेशा सफ़ेद होता है; लटकते कान; और काली पलकों वाली चमकदार आँखें। थूथन, सींग और खुर काले होते हैं (लातूर अध्ययन)।
- सींग: छोटे से मध्यम और मोटे। ये सिर के दोनों ओर से, आँखों के पीछे और ऊपर से निकलते हैं, और बाहर और थोड़ा ऊपर की ओर बढ़कर भोथरे सिरों पर खत्म होते हैं (NBAGR डेटाबेस, लातूर अध्ययन)।
- शरीर: मध्यम आकार का और मज़बूत, बनावट में गिर गाय-बैल जैसा; बैलों में बहुत बड़ा कूबड़, मोटा, लटकता और सिलवटों वाला गलकंबल, मोटी चमड़ी, और पूँछ का गुच्छा पिछली टाँग के जोड़ (हॉक) से नीचे तक। गायों का अयन कटोरे जैसा होता है और थन काले होते हैं (लातूर अध्ययन)।
- कद और वज़न: नर कंधे तक करीब 140 सेमी ऊँचे होते हैं और मादा करीब 122 सेमी। NBAGR के रिकॉर्ड के अनुसार औसत वज़न नर का करीब 590 किलो और मादा का करीब 340 किलो है (NBAGR डेटाबेस)।
किस काम आती है
- दूध। NBAGR के रिकॉर्ड में एक ब्यांत में करीब 868 किलो दूध दर्ज है, जो 638 से 1,229 किलो तक होता है, और उसमें करीब 4.3% फ़ैट होता है (NBAGR डेटाबेस)। कलबुर्गी जिले में 2017–18 के एक ICAR सर्वे में कर्नाटक की छह देसी नस्लों में देवनी गायों ने सबसे ज़्यादा दूध दिया, हर गाय ने रोज़ करीब 3 लीटर, और सबसे लंबे समय तक दूध दिया, करीब 9 महीने (ICAR सर्वे)।
- भारी खेती का काम। भारी काम के लिए इसके बैल पसंद किए जाते हैं; 5–6 साल की उम्र में उनकी ताकत पूरी होती है और करीब 12 साल की उम्र तक बनी रहती है (NBAGR डेटाबेस)। बैलों की एक जोड़ी कच्चे रास्ते पर लकड़ी की गाड़ी में 10–11 क्विंटल, या पक्की (डामर वाली) सड़क पर हल्की स्टील की गाड़ी में 28–30 क्विंटल खींच सकती है (NBAGR अध्ययन)। ICAR सर्वे में छह नस्लों में से देवनी पशुओं ने सबसे ज़्यादा खेती का काम किया, रोज़ करीब 3.5 घंटे (ICAR सर्वे)।
- बछड़े। एक बार में एक। गायें पहली बार करीब 45 महीने की उम्र में ब्याती हैं, और फिर करीब हर 13–15 महीने में (NBAGR डेटाबेस, लातूर अध्ययन)।
मुख्य रूप से कहाँ मिलती है
NBAGR के नस्ल रिकॉर्ड में कर्नाटक का बीदर जिला, और महाराष्ट्र के लातूर, उस्मानाबाद, नांदेड़ और परभणी जिले दर्ज हैं। यह नस्ल बालाघाट की पहाड़ियों में, लातूर के देवनी, उदगीर और अहमदपुर तालुकों में शुरू हुई (NBAGR डेटाबेस)। NBAGR के वैज्ञानिक बताते हैं कि पड़ोसी कलबुर्गी जिले में और तेलंगाना के संगारेड्डी जिले में भी कुछ कम संख्या में ये पशु पाले जाते हैं (NBAGR अध्ययन)।
बीदर के पास बीदर–हुमनाबाद रोड पर KVAFSU का पशुधन अनुसंधान एवं सूचना केंद्र (देवनी) 1970 से इस नस्ल को बचाने का काम कर रहा है (KVAFSU)। कर्नाटक का पशुपालन विभाग बल्लारी जिले के कुरेकुप्पे में अपने फ़ार्म पर देवनी का एक झुंड रखता है (कर्नाटक पशुपालन विभाग)। 2013 के नस्ल सर्वे में कर्नाटक में करीब 49,000 शुद्ध देवनी गाय-बैल थे, और करीब 62,000 ग्रेडेड, यानी आंशिक रूप से देवनी (NBAGR अध्ययन)।
देवनी गाय-बैल चाहिए?
अपने पास बिकाऊ देवनी गायें और बैल ढूँढने के लिए कट्टुतरै ऐप में “देवनी” खोजें, या सभी बिकाऊ गायें देखें। नस्ल विक्रेता बताता है और कट्टुतरै उसकी जाँच नहीं करता, इसलिए पैसे देने से पहले पशु को खुद देखें।
पालने के सुझाव
- चराई के साथ ऊपर से चारा-दाना। NBAGR के अनुसार देवनी को दिन में चराया जाता है, और बैलों, नर बछड़ों और दूध देने वाली गायों को फ़सल के अवशेष और दाना भी दिया जाता है (NBAGR डेटाबेस)। ICAR सर्वे में छह नस्लों में से देवनी के पालक सबसे ज़्यादा चारा-दाना देते थे: हर पशु को रोज़ करीब 12 किलो हरा चारा और 1 किलो दाना (ICAR सर्वे)। कितना चारा दें, इसके लिए देखें गाय-बैल कैसे पाले जाते हैं।
- सादा बाड़ा, नज़दीकी देखभाल। मूल इलाके में इन पशुओं को ज़्यादातर खुले शेड में रखा जाता है, और ज़्यादातर पशुओं की एक-एक करके देखभाल होती है (NBAGR डेटाबेस)।
- बुनियादी बातें न छोड़ें। कर्नाटक की छह देसी नस्लों पर हुए ICAR सर्वे में सिर्फ़ करीब आधे किसान अपने पशुओं को टीके लगवाते थे और करीब एक-तिहाई पेट के कीड़ों की दवा देते थे (ICAR सर्वे)। सरकारी टीकाकरण तालिका के हिसाब से टीके लगवाएं, और पेट के कीड़ों और किलनी (चिचड़ी) के बारे में अपने पशु चिकित्सक से पूछें: देखें गाय-बैल को स्वस्थ कैसे रखें।
खरीदने के सुझाव
- पहचान के निशान देखें: सफ़ेद शरीर, जिसके चेहरे पर काला रंग हो या काले धब्बे हों; सफ़ेद, उभरा हुआ माथा; लटकते कान; भोथरे सिरों वाले छोटे, मोटे सींग; मोटा, सिलवटों वाला गलकंबल; काला थूथन, काली पलकें और काले खुर। भूरा या लाल रंग, या पतला, कसा हुआ गलकंबल इस नस्ल के विवरण से मेल नहीं खाता और संकर होने का इशारा करता है।
- संकर पशु आम हैं। कर्नाटक में ग्रेडेड पशु शुद्ध पशुओं से ज़्यादा हैं (NBAGR अध्ययन)। विज्ञापन में नस्ल का नाम विक्रेता का बताया हुआ होता है, और कट्टुतरै उसकी जाँच नहीं करता। पशु की माँ और झुंड को देखें, और पहचान के निशान खुद जाँचें।
- जाने-माने झुंड। KVAFSU का देवनी केंद्र अपने ज़रूरत से ज़्यादा पशु किसानों को नीलामी से बेचता है (KVAFSU फ़ार्म), और विभाग का कुरेकुप्पे फ़ार्म अपनी योजनाओं के तहत किसानों को देवनी साँड़ और गायें देता है (कर्नाटक पशुपालन विभाग)। आवेदन कैसे करें, यह अपने नज़दीकी पशु चिकित्सालय से पूछें।
- उम्र, सेहत और कागज़: दाँत गिनें, गाय को हाथ से दुहते हुए देखें, पशु चिकित्सक से गर्भ जाँच करवाएं, और कान के टैग का नंबर अपनी रसीद पर लिखवाएं: देखें गाय या बैल खरीदना।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या देवनी दूध की नस्ल है या भारवाही नस्ल?
दोनों। किसानों के अंदाज़े से गायें रोज़ करीब 3 लीटर दूध देती हैं, और NBAGR के रिकॉर्ड के अनुसार एक ब्यांत में करीब 868 किलो, और बैल भारी खेती का काम करते हैं। बड़े पैमाने पर दूध बेचना हो, तो देखें देसी गाय या संकर।
वानेरा, शेवेरा और बालंक्या क्या हैं?
ये देवनी की तीन रंग-किस्में हैं: चेहरे पर काले रंग वाली सफ़ेद (वानेरा), काले धब्बों वाली सफ़ेद (शेवेरा या वाघ्या), और लगभग पूरी सफ़ेद (बालंक्या) (NBAGR डेटाबेस)।
देवनी बैल का वज़न कितना होता है?
NBAGR के रिकॉर्ड के अनुसार बड़े नर का औसत वज़न करीब 590 किलो और मादा का करीब 340 किलो होता है (NBAGR डेटाबेस)।
आगे पढ़ें
देवनी की तुलना गिर से करें — NBAGR मानता है कि यह नस्ल उसी से निकली है — और उत्तर कर्नाटक की खिल्लारी से भी। खरीदने और देखभाल के लिए गाय-बैल पालन: देसी नस्लें, संकर, खरीद और देखभाल पढ़ें, और बिकाऊ गायें और बिकाऊ बैल देखें।

