मालनाद गिद्दा गाय: छोटी पहाड़ी नस्ल, दूध और कहाँ मिलती है

ಮಲೆನಾಡು ಗಿಡ್ಡ

मालनाद गिद्दा: कर्नाटक के बारिश वाले पहाड़ी जिलों के छोटे, ज़्यादातर काले गाय-बैल — दूध, हल्के काम और खाद के लिए; पहचान, मूल जिले, खरीदने के सुझाव।

अपडेट: 24 अक्टूबर 2026जाँचा गया: 24 अक्टूबर 2026कट्टुतरै टीम ने लिखा

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रस्सी से बँधा खड़ा छोटा भूरा मालनाद गिद्दा बैल
Pavanaja · CC BY-SA 3.0
मूल इलाका
कर्नाटकShivamogga, Chikkamagaluru, Hassan, Kodagu +3
हर ब्यांत में बछड़े
आम तौर पर एक
दूध
2.3 लीटर रोज़
किस लिए पालते हैं
दूध · जुताई, गाड़ी
रंग
ज़्यादातर काला, हल्की बादामी झलक
नस्ल पंजीकरण
पंजीकृत नस्ल (ICAR-NBAGR)
इस पेज पर
  1. पहचान कैसे करें
  2. किस काम आती है
  3. मुख्य रूप से कहाँ मिलती है
  4. पालने के सुझाव
  5. खरीदने के सुझाव
  6. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
  7. आगे पढ़ें

मालनाद गिद्दा कर्नाटक में पश्चिमी घाट के बारिश वाले पहाड़ी इलाके, मालनाद, की छोटी नस्ल है, जिसके गाय-बैल ज़्यादातर काले होते हैं। गिद्दा का मतलब है नाटा, और बड़े पशुओं का वज़न सिर्फ़ करीब 80–120 किलो होता है (NBAGR डेटाबेस)। किसान इसे बहुत कम चारे पर दूध, खेती के हल्के काम और खाद के लिए पालते हैं (NBAGR डेटाबेस)। NBAGR ने इसे कर्नाटक की नस्ल के रूप में पंजीकृत किया है (ICAR-NBAGR)।

पहचान कैसे करें

  • रंग: ज़्यादातर काला, जाँघों और कंधों पर हल्की बादामी झलक के साथ (NBAGR डेटाबेस)। भूरे, लाल, बादामी, सफ़ेद या मिले-जुले रंग के पशु भी मिलते हैं (NBAGR अध्ययन)।
  • कद: बहुत छोटा और गठा हुआ। बैल और गाय, दोनों कंधे तक सिर्फ़ करीब 90 सेमी ऊँचे होते हैं (NBAGR डेटाबेस), और 2008 के NBAGR के एक अध्ययन में इसे भारत की जानी-मानी गाय-बैल नस्लों में सबसे छोटी नस्लों में से एक बताया गया (2008 का अध्ययन)।
  • सींग: छोटे, बाहर, ऊपर और अंदर की ओर मुड़े हुए (NBAGR डेटाबेस), नुकीले सिरों वाले (NBAGR अध्ययन)।
  • शरीर: गायों में छोटा कूबड़ और बैलों में उभरा हुआ, छोटे से मध्यम आकार का गलकंबल, आड़े (समतल) कान, और चेहरा गायों में सीधा और बैलों में बीच से थोड़ा धँसा हुआ (NBAGR अध्ययन)। पूँछ का गुच्छा काला होता है, और गायों का अयन छोटा, कटोरे जैसा होता है (NBAGR डेटाबेस)।
  • फुर्तीले पैर: ये पशु तेज़ भागते हैं और अच्छी छलाँग लगाते हैं, जिससे पहाड़ों में जंगली जानवरों से बच निकलने में मदद मिलती है (NBAGR अध्ययन)।

किस काम आती है

  • दूध, थोड़ा-सा। NBAGR के रिकॉर्ड में एक ब्यांत में करीब 218 किलो दूध दर्ज है, हालाँकि सबसे ज़्यादा दूध देने वाली गायें रोज़ 3–5 किलो देती हैं (NBAGR डेटाबेस)। शिवमोग्गा जिले में 2017–18 के एक ICAR सर्वे में गायों ने रोज़ करीब 2.3 लीटर दूध दिया, जो कर्नाटक की छह देसी नस्लों में सबसे कम था, और करीब 7 महीने तक दूध दिया (ICAR सर्वे)।
  • खाद और हल्का काम। NBAGR इस नस्ल के उपयोग भारवाही काम, दूध और खाद बताता है, और ये सब बहुत कम चारे पर (NBAGR डेटाबेस)। पर ICAR सर्वे में ये पशु खेती का काम कम ही करते थे (ICAR सर्वे)।
  • बछड़े। एक बार में एक। इसके एक स्थानीय नाम वर्षगंधी का मतलब है हर साल ब्याने वाली गाय (NBAGR डेटाबेस)। दर्ज आँकड़ों के अनुसार पहला बछड़ा करीब 45 महीने की उम्र में होता है, और फिर करीब हर 17 महीने में एक (2008 का अध्ययन)।

मुख्य रूप से कहाँ मिलती है

NBAGR के नस्ल रिकॉर्ड में पहाड़ों और तट के सात जिले दर्ज हैं: शिवमोग्गा, चिक्कमगलूरु, हासन, कोडगु, उत्तर कन्नड़, दक्षिण कन्नड़ और उडुपी (NBAGR डेटाबेस)। NBAGR के वैज्ञानिक इसे बेलगावी जिले में भी पाते हैं, और कुछ कम संख्या में तट के किनारे भी (NBAGR अध्ययन)। नाम ही बताता है कि यह कहाँ रहती है: मालनाद, भारी बारिश वाला पहाड़ी इलाका, जहाँ यह नस्ल पश्चिमी घाट के हालात में अच्छी तरह ढली हुई है (NBAGR डेटाबेस)।

मालनाद गिद्दा का विस्तार से वर्णन हाल ही में हुआ है। 2008 में NBAGR और कर्नाटक के वैज्ञानिकों ने लिखा था कि इसके बारे में इतनी कम जानकारी है कि यह अभी मान्यता प्राप्त नस्ल नहीं है (2008 का अध्ययन); तब से NBAGR इसे पंजीकृत कर चुका है। कर्नाटक का पशुपालन विभाग दक्षिण कन्नड़ जिले के कोइला में अपने पशुधन प्रजनन और प्रशिक्षण केंद्र पर करीब 670 पशुओं का बड़ा झुंड रखता है (कर्नाटक पशुपालन विभाग)। इनकी संख्या घट रही है: कर्नाटक की 2007 की पशुगणना में करीब 12.8 लाख, और 2013 के नस्ल सर्वे में करीब 9 लाख (NBAGR डेटाबेस)।

मूल जिले: Shivamogga, Chikkamagaluru, Hassan, Kodagu, Uttara Kannada, Dakshina Kannada, UdupiMap data © OpenStreetMap contributors

मालनाद गिद्दा गाय-बैल चाहिए?

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पालने के सुझाव

  • चराई, और ऊपर से थोड़ा चारा। NBAGR के अनुसार ये पशु सुबह से शाम तक चरते हैं और घर पर इन्हें सिर्फ़ थोड़ा धान का पुआल, स्पियर घास और हरी घास मिलती है; कुछ इलाकों में ये सिर्फ़ चराई पर ही पलते हैं (NBAGR डेटाबेस)। इन छोटे पशुओं को खिलाने में ज़्यादा देखभाल नहीं चाहिए, और ये गर्म, नम, ज़्यादा बारिश वाले इलाकों के लिए ठीक हैं (NDRI अध्ययन)। कितना चारा दें, इसके लिए देखें गाय-बैल कैसे पाले जाते हैं।
  • पत्तियों की बिछावन वाला बाड़ा। रात में पशु एक बाड़े में रहते हैं, जिसके फ़र्श पर हर दिन ताज़ी हरी पत्तियाँ बिछाई जाती हैं। यह बिछावन जमा होती जाती है और हर 1–2 महीने में खेतों के लिए कम्पोस्ट खाद के रूप में निकाल ली जाती है (NBAGR डेटाबेस)।
  • साँड़ों से प्रजनन। 2024 के एक अध्ययन में मालनाद गिद्दा के पालक अपनी गायों का प्रजनन सिर्फ़ साँड़ों से करवाते थे, क्योंकि हाल में मान्यता पाई इस नस्ल के लिए कृत्रिम गर्भाधान मिलना मुश्किल था (2024 का अध्ययन)।
  • सेहत। मज़बूत होने के बावजूद इन्हें सरकारी टीकाकरण तालिका के हिसाब से टीके चाहिए, और पेट के कीड़ों और किलनी (चिचड़ी) से बचाव की योजना भी: देखें गाय-बैल को स्वस्थ कैसे रखें।

खरीदने के सुझाव

  • पहचान के निशान देखें: करीब 90 सेमी ऊँचा छोटा, गठा हुआ पशु; ज़्यादातर काला, बादामी झलक के साथ; छोटे सींग; गाय में छोटा कूबड़; छोटा, कटोरे जैसा अयन; पूँछ का काला गुच्छा। ऊँचा पशु, बड़ा अयन या बड़ा लटकता गलकंबल इस नस्ल के विवरण से मेल नहीं खाता और संकर होने का इशारा करता है।
  • संकर भी मिलते हैं। शुद्ध पशुओं के अलावा, 2013 के सर्वे में करीब 1.5 लाख ग्रेडेड, यानी आंशिक रूप से मालनाद गिद्दा, गाय-बैल गिने गए (NBAGR अध्ययन)। विज्ञापन में नस्ल का नाम विक्रेता का बताया हुआ होता है, और कट्टुतरै उसकी जाँच नहीं करता। पशु की माँ और झुंड को देखें, और पहचान के निशान खुद जाँचें।
  • कम दूध की उम्मीद रखें। मालनाद गिद्दा को मज़बूत, कम खर्च वाली गाय के लिए खरीदें, बेचने के लिए दूध के लिए नहीं: देखें देसी गाय या संकर।
  • उम्र, सेहत और कागज़: दाँत गिनें, पशु चिकित्सक से गर्भ जाँच करवाएं, और कान के टैग का नंबर अपनी रसीद पर लिखवाएं: देखें गाय या बैल खरीदना।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

मालनाद गिद्दा कितनी छोटी होती है?

कंधे तक करीब 90 सेमी, और वज़न करीब 80–120 किलो (NBAGR डेटाबेस) — भारत के सबसे छोटे गाय-बैल में से एक।

क्या इसका वेचूर और पुंगनूर से कोई रिश्ता है?

तीनों छोटी, बौनी नस्लें हैं — कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और केरल की — और NDRI के एक अध्ययन से संकेत मिलता है कि बहुत पहले इनकी शुरुआत एक ही रही होगी (NDRI अध्ययन)।

इसके नामों का मतलब क्या है?

मालनाद का मतलब है भारी बारिश वाला पहाड़ी इलाका, और गिद्दा का मतलब है नाटा। इसके दूसरे नाम हैं ऊरदन, यानी गाँव की गाय, और वर्षगंधी, यानी हर साल ब्याने वाली गाय (NBAGR डेटाबेस)।

आगे पढ़ें

मालनाद गिद्दा की तुलना दक्षिण की दूसरी छोटी नस्लों — केरल की वेचूर और आंध्र प्रदेश की पुंगनूर — से करें। खरीदने और देखभाल के लिए गाय-बैल पालन: देसी नस्लें, संकर, खरीद और देखभाल पढ़ें, और बिकाऊ गायें और बिकाऊ बैल देखें।

स्रोत

  1. ICAR-National Bureau of Animal Genetic Resources (NBAGR), Karnal — Cattle Breeds of India (registered breeds and accession numbers) · पढ़ा गया 24 अक्टूबर 2026
  2. ICAR-National Bureau of Animal Genetic Resources (NBAGR), Karnal — Information System of Animal Genetic Resources of India (AnGR database): Breed Descriptor of Malnad Gidda (Cattle) · पढ़ा गया 24 अक्टूबर 2026
  3. Indian Journal of Animal Sciences 93 (2): 123–132, 2023 — Behl R, Behl J D, Jain A (ICAR-NBAGR, Karnal) and Kulkarni V S (UAS Dharwad) — Ruminant genetic resources of Karnataka state: Status, distribution and characteristics · पढ़ा गया 24 अक्टूबर 2026
  4. Indian Journal of Animal Sciences 78 (10): 1123–1126, 2008 — Singh P K, Pundir R K (ICAR-NBAGR, Karnal), Manjunath V K, Rudresh B H, Govindaiah M G (Karnataka veterinary scientists) — Features and status of miniature indigenous germplasm of cattle — Malnad Gidda · पढ़ा गया 24 अक्टूबर 2026
  5. Indian Journal of Animal Sciences 94 (11): 1000–1005, 2024 — Chethan Patil N D, Kadian K S, Jarial S, Bellagi R D, Patil D, Jha S K, Mukherjee S (ICAR-NDRI, Karnal and others) — Farmers' preferences and breeding practices for indigenous cattle breeds in breeding tract of Karnataka · पढ़ा गया 24 अक्टूबर 2026
  6. Indian Journal of Animal Sciences 82 (10): 1238–1241, 2012 — Das D N, Rao M K, Obi Reddy A, Murthy L K (ICAR-National Dairy Research Institute, Southern Campus, Bengaluru) — Genetic identity of Malnad gidda, Puganur and Vechur – Indian breeds of dwarf cattle · पढ़ा गया 24 अक्टूबर 2026
  7. Department of Animal Husbandry and Veterinary Services, Government of Karnataka — Livestock Farm: details of government farms · पढ़ा गया 24 अक्टूबर 2026
  8. Indian Journal of Animal Sciences 93 (3): 279–286, 2023 — Kolekar D V, Chandre Gowda M J (ICAR-Agricultural Technology Application Research Institute, Bengaluru), Sairam C V, Dixit S, Singh R — Productivity attributes of six desi cow breeds in Karnataka · पढ़ा गया 24 अक्टूबर 2026

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