जापानी बटेर छोटे फ़ार्म पक्षी हैं, जिन्हें मांस और अंडों के लिए घर के अंदर, पिंजरों में या बिछावन पर पाला जाता है। मांस वाली बटेरें करीब 5–6 हफ़्ते में बिकने लायक हो जाती हैं, और मादाएं करीब 6 हफ़्ते की उम्र में अंडे देना शुरू कर देती हैं (TNAU, KVK नामक्कल)। सिर्फ़ फ़ार्म में पली जापानी बटेर ही रखी और बेची जा सकती है: जंगली बटेर और तीतर कानून से संरक्षित हैं।
बटेर किस लिए पाली जाती हैं
- मांस। मांस वाली बटेरें करीब 5–6 हफ़्ते पर बेची जाती हैं, और 5 हफ़्ते की उम्र तक हर पक्षी सिर्फ़ करीब 500 ग्राम दाना खाता है (TNAU)। मादाएं नरों से थोड़ी ज़्यादा भारी होती हैं (KVK नामक्कल)।
- अंडे। मादाएं करीब 6 हफ़्ते पर अंडे देना शुरू करती हैं, और ज़्यादातर अंडे शाम को देती हैं। एक अंडे का वज़न करीब 10 ग्राम होता है, और उसका पतला छिलका भूरे, नीले, सफ़ेद या हल्के पीले-भूरे धब्बों वाला होता है। दूसरे साल में मादा पहले साल से बहुत कम अंडे देती है (KVK नामक्कल)। अंडे वाली किस्में साल में करीब 257–300 अंडे देती हैं: देखें किस्में।
- दूसरे फ़ार्मों के लिए चूजे। बटेर के अंडों से 18 दिन में चूजे निकलते हैं (KVK नामक्कल)। TANUVAS की 2017 की एक समीक्षा के अनुमान के अनुसार तमिलनाडु में हर हफ़्ते 4 लाख से ज़्यादा बटेर के चूजे निकलते हैं, और बहुत से बटेर पालक अपने चूजों के लिए फ़ार्म पर ही छोटी हैचरी चलाते हैं (TANUVAS समीक्षा)।
- कम जगह। करीब 4 × 2.5 फुट के एक पिंजरे में 3 से 6 हफ़्ते की उम्र की 50 तक बढ़ती बटेरें रह सकती हैं (TNAU)।
बटेर कैसे पाली जाती हैं
बटेरें शेड में, या तो पिंजरों में या बिछावन वाले फ़र्श पर रखी जाती हैं (TNAU)।
- शुरुआती हफ़्तों के बाद पिंजरे। 3 हफ़्ते की उम्र तक चूजों की ब्रूडिंग पिंजरों में करने से शुरुआती मौतें कम होती हैं (KVK नामक्कल)। जो किसान चूजों को बिछावन पर शुरू करते हैं, वे उन्हें 2 हफ़्ते बाद पिंजरों में ले जाते हैं: ज़्यादा समय बिछावन पर रहने वाली बटेरें इधर-उधर भागती हैं, दाने से मिली ऊर्जा बर्बाद करती हैं और कम बढ़ती हैं (TNAU)।
- ट्रे वाले मंज़िलदार पिंजरे। पिंजरे 4 या 5 मंज़िल ऊँचे बनाए जा सकते हैं, और हर जाली वाले फ़र्श के नीचे एक ट्रे हो, ताकि बीट नीचे के पक्षियों पर न गिरे और रोज़ साफ़ की जा सके (TNAU)।
- हर पक्षी के लिए जगह। हर चूजे को ब्रूडर के नीचे करीब 75 वर्ग सेमी और घूमने के लिए 75 वर्ग सेमी जगह चाहिए (KVK नामक्कल); 2 हफ़्ते से बिक्री तक बढ़ते पक्षियों को करीब 125–150 वर्ग सेमी (TNAU); और अंडे देने वाली हर मादा को अंडे वाले पिंजरे में करीब 150–180 वर्ग सेमी (KVK नामक्कल)।
- चूजों के लिए गर्मी। ब्रूडर का तापमान करीब 37°C से शुरू करें और हर हफ़्ते करीब 2.7°C कम करते जाएं, जब तक चूजे 4 हफ़्ते के न हो जाएं और उनके पूरे पंख न आ जाएं। पहले 2 हफ़्तों में सबसे ज़्यादा देखभाल चाहिए (KVK नामक्कल)।
- डूबने के खतरे के बिना पानी। पानी उथले बर्तनों में दें, जिनमें कंकड़ या कंचे भरे हों, ताकि चूजे डूब न सकें; करीब 2 हफ़्ते पर कंकड़ निकाल दें (KVK नामक्कल)।
- दाना। बटेरों को प्रोटीन से भरपूर पिसा दाना (मैश) चाहिए: 3 हफ़्ते तक के चूजों के लिए करीब 27% प्रोटीन, 4वें हफ़्ते से 24%, और अंडे देने वाली मादाओं के लिए करीब 22% (KVK नामक्कल)। कुछ कंपनियाँ बटेर का तैयार दाना बनाती हैं (TNAU); खुद दाना मिलाने से पहले अपने दाना विक्रेता या पशु चिकित्सक से पूछें।
- अंडे देने वाली बटेरों के लिए रोशनी। दिन में करीब 16 घंटे रोशनी मिलने पर अंडे देने वाला झुंड सबसे ज़्यादा अंडे देता है (KVK नामक्कल)।
- नर और मादा। 4–5 हफ़्ते पर इन्हें अलग पहचाना जा सकता है: नर की छाती के पंख एक जैसे, जंग जैसे भूरे रंग के होते हैं, जबकि मादा की छाती के पंख स्लेटी होते हैं, जिन पर काली चित्तियाँ होती हैं (KVK नामक्कल)।
- प्रजनन। एक नर पर दो मादाएं रखने से अंडे अच्छी तरह निषेचित होते हैं, और नरों को साथ रखने के 4वें दिन से निषेचित अंडे जमा किए जा सकते हैं। जब तक प्रजनन वाले पक्षी 8 महीने या उससे कम उम्र के हों, तब तक निषेचन सबसे ज़्यादा होता है (KVK नामक्कल)।
बटेर की किस्में
ICAR का केंद्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान (CARI) 1974 में जापानी बटेर भारत लाया, और मांस और अंडे वाली शुद्ध किस्में (लाइनें) रखता है, जिन्हें वह फ़ार्मों को देता है (ICAR-CARI)। TANUVAS के पोल्ट्री अनुसंधान केंद्र ने 1980 के दशक की शुरुआत में CARI की बटेरों को सुधारना शुरू किया (TANUVAS समीक्षा), और उसके नामक्कल कॉलेज ने कई स्ट्रेन के मेल से नामक्कल किस्में तैयार कीं (TANUVAS नामक्कल)। ये सब एक ही फ़ार्म प्रजाति की किस्में हैं, अलग नस्लें नहीं:
| किस्म | किसने तैयार की | मुख्य आँकड़े | स्रोत |
|---|---|---|---|
| कैरी-उत्तम (मांस) | ICAR-CARI, इज़्ज़तनगर | 4 हफ़्ते पर 150–155 ग्राम, 5 हफ़्ते पर 250 ग्राम; अंडे 12–13 ग्राम | ICAR-CARI |
| कैरी-उज्ज्वल (सफ़ेद छाती) | ICAR-CARI, इज़्ज़तनगर | 4 हफ़्ते पर 140 ग्राम, 5 हफ़्ते पर 175 ग्राम; अंडे 11 ग्राम | ICAR-CARI |
| कैरी-श्वेता (पूरी सफ़ेद) | ICAR-CARI, इज़्ज़तनगर | 4 हफ़्ते पर 150 ग्राम, 5 हफ़्ते पर 160–170 ग्राम; अंडे 10–11 ग्राम | ICAR-CARI |
| कैरी-ब्राउन (पूरी भूरी) | ICAR-CARI, इज़्ज़तनगर | 4 हफ़्ते पर 160 ग्राम, 5 हफ़्ते पर 180–185 ग्राम; 40 दिन से अंडे; अंडे 11 ग्राम | ICAR-CARI |
| कैरी-पर्ल (अंडे वाली) | ICAR-CARI, इज़्ज़तनगर | 5 हफ़्ते पर 140 ग्राम; 8 हफ़्ते पर आधी मादाएं अंडे देने लगती हैं; हर मादा साल में 285–300 अंडे; अंडे 9 ग्राम | ICAR-CARI |
| TANUVAS नामक्कल क्वेल-1 (मांस) | TANUVAS, नामक्कल | 30 दिन पर: नर 228 ग्राम, मादा 247 ग्राम | TANUVAS समीक्षा |
| TANUVAS नामक्कल गोल्ड (अंडे वाली) | TANUVAS, नामक्कल | 40 दिन से अंडे; साल में 257 अंडे; अंडे 13.2 ग्राम | TANUVAS समीक्षा |
| नंदनम क्वेल-III (मांस) | TANUVAS, माधवरम (2004) | 6 हफ़्ते पर: नर 200 ग्राम, मादा 247 ग्राम | TANUVAS |
ये आँकड़े संस्थानों के अपने झुंडों के हैं; आपके फ़ार्म पर नतीजे पक्षियों, दाने और देखभाल पर निर्भर करते हैं। TANUVAS की पुरानी नंदनम क्वेल II को आम तौर पर “देसी बटेर” कहा जाता है (TANUVAS)। वह भी फ़ार्म में पली जापानी बटेर ही है: विज्ञापन में “देसी” या “गाँव की” बटेर ऐसी ही फ़ार्म किस्म होनी चाहिए, जंगल से पकड़ा गया पक्षी कभी नहीं।
बटेर खरीदना
- जानी-मानी हैचरी से। सरकारी फ़ार्म बटेरें देते हैं: होसुर के TANUVAS पोल्ट्री कॉलेज ने मार्च 2022 तक किसानों को 6,89,087 जापानी बटेरें दी थीं (TANUVAS), और मन्नुथी का KVASU पोल्ट्री फ़ार्म जापानी बटेरें देता है (KVASU)। विक्रेता से पूछें कि पक्षी किस किस्म के हैं।
- उम्र। मांस वाली बटेरें करीब 5–6 हफ़्ते पर बिकती हैं। अंडों के लिए ऐसी जवान मादाएं खरीदें जो अंडे देना शुरू करने वाली हों, क्योंकि दूसरे साल में मादा बहुत कम अंडे देती है; प्रजनन के लिए करीब 8 महीने से ज़्यादा उम्र के पक्षी न लें (KVK नामक्कल)।
- सिर्फ़ स्वस्थ पक्षी। ऐसे पक्षी न खरीदें जो कमज़ोर हों या लटके पंखों के साथ चुपचाप बैठे रहें, या जिनकी आँखों या सिर के आस-पास सूजन हो या नाक बहती हो; अंडों में अचानक कमी या अचानक मौतें भी खतरे के लक्षण हैं (बर्ड फ्लू कार्य योजना)। अंडे से निकलने की तारीख पूछें, और यह भी कि पक्षियों को कौन-से टीके लगे हैं, अगर लगे हैं।
- बर्ड फ्लू वाले इलाके से नहीं। बर्ड फ्लू की पुष्टि होने पर 1 किमी के अंदर की सारी पोल्ट्री मार दी जाती है (कलिंग), और आस-पास के 10 किमी के दायरे में पोल्ट्री का आना-जाना रोक दिया जाता है (बर्ड फ्लू कार्य योजना)। अधिसूचित इलाके से पक्षी न खरीदें, न ले जाएं: पहले अपने जिले की सूचनाएं देखें।
- बटेरों को ले जाना। परिवहन नियम बटेरों को पोल्ट्री में गिनते हैं। जब तापमान 25°C से ज़्यादा या 15°C से कम हो, तब उन्हें न ले जाएं। डिब्बों को पहले साफ़ करके कीटाणुरहित करें। एक दिन के चूजों से बड़े पक्षियों के लिए पशु चिकित्सक का प्रमाणपत्र चाहिए कि उन्हें कोई छूत की बीमारी नहीं है और वे यात्रा के लायक हैं। हर डिब्बे में एक ही प्रजाति और एक ही उम्र के पक्षी रखें, नर और मादा अलग, और गर्म मौसम में हर 6 घंटे में पानी दें। डिब्बों को एक के ऊपर एक न रखें; उन्हें धूप और बारिश से ढकें, और उन पर भेजने वाले और लेने वाले के नाम, पते और फ़ोन नंबर लिखें (AWBI)।
- एक दिन के चूजे। चूजों को अंडे से निकलते ही, बिना दाना-पानी के, समतल रखे डिब्बों में भेजें। चूजों का एक बार में 6 घंटे से ज़्यादा सफ़र नहीं होना चाहिए, और बीच का ठहराव 30 मिनट से ज़्यादा का न हो, वह भी छाया में (AWBI)।
- सुरक्षित तरीके से पैसे दें। जो पक्षी आपने देखे नहीं हैं, उनके लिए कभी एडवांस न दें: देखें सुरक्षित तरीके से पैसे कैसे दें।
बटेरों को स्वस्थ रखें
- मज़बूत, पर बीमारी से मुक्त नहीं। जापानी बटेरों को बीमारियाँ कम ही होती हैं, और मुर्गियों के उलट इन्हें आम तौर पर नियमित टीके नहीं लगाए जाते; इनकी मुख्य बीमारी बटेर की आंतों की सूजन (क्वेल एंटेराइटिस) है (KVK नामक्कल)। अपने पशु चिकित्सक से पूछें कि आपके झुंड को कोई टीका चाहिए या नहीं।
- फ़ार्म बंद रखें। पक्षियों के पास सिर्फ़ उनकी देखभाल करने वाले लोग ही जाएं। बाहर के लोगों को दूर रखें, पक्षियों को छूने से पहले और बाद में जूते, कपड़े और हाथ धोकर कीटाणुरहित करें, और उधार लिया हर उपकरण साफ़ करें (बर्ड फ्लू कार्य योजना)।
- रोज़ सफ़ाई। पिंजरे साफ़ करें और दाना-पानी रोज़ बदलें। नए खरीदे पक्षियों को कम से कम 30 दिन तक अपने झुंड से अलग रखें, और हो सके तो एक समय में एक ही उम्र के पक्षी रखें (“सब एक साथ अंदर, सब एक साथ बाहर”) (बर्ड फ्लू कार्य योजना)।
- जंगली पक्षी बाहर। जंगली पक्षियों या पड़ोसियों के पक्षियों को अपने पक्षियों से न मिलने दें, जंगली पक्षियों को कभी न पकड़ें, न रखें, और मरे हुए पक्षियों को ठीक से गाड़ें; उन्हें कभी नालियों में या खुली ज़मीन पर न फेंकें (बर्ड फ्लू कार्य योजना)।
- अचानक मौतें: 24 घंटे के अंदर सूचना दें। अपने पक्षियों में, या जंगली पक्षियों में, असामान्य बीमारी या मौतों की सूचना तुरंत नज़दीकी पशु चिकित्सालय को दें, और हर हाल में 24 घंटे के अंदर (बर्ड फ्लू कार्य योजना)। मोबाइल पशु चिकित्सा इकाई के लिए आप टोल-फ़्री नंबर 1962 भी डायल कर सकते हैं (PIB)।
- अगर बर्ड फ्लू की पुष्टि हो जाए। अधिकारी संक्रमित इलाके की पोल्ट्री को मार देते हैं (कलिंग), और कलिंग से छिपाए गए और बाद में मिले पक्षी बिना मुआवज़े के मार दिए जाते हैं (बर्ड फ्लू कार्य योजना)। मारे गए पक्षियों, नष्ट किए गए अंडों और दाने के लिए सरकार किसानों को मुआवज़ा देती है, जिसका खर्च केंद्र और राज्य बराबर बाँटते हैं (PIB)। मौजूदा दरों के बारे में अपने पशु चिकित्सालय से पूछें।
बटेर फ़ार्मों के लिए नियम
- फ़ार्म में पली जापानी बटेर के लिए वन्यजीव लाइसेंस नहीं। वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम की अनुसूची II में जापानी बटेर “फ़ार्म में पाली गई किस्म के पक्षियों को छोड़कर” दर्ज है (प्रविष्टि 704), इसलिए फ़ार्म में पली जापानी बटेर के लिए किसी वन्यजीव लाइसेंस की ज़रूरत नहीं (India Code)। यह छूट 2013 की एक सरकारी अधिसूचना से चली आ रही है (MoEF अधिसूचना)।
- जंगली बटेर और तीतर संरक्षित हैं। जंगली बटेरें, जैसे कॉमन क्वेल, रेन क्वेल और बुश क्वेल, और तीतर, जैसे धूसर तीतर (ग्रे फ्रैंकोलिन) और पेंटेड फ्रैंकोलिन, इस अधिनियम में बिना किसी छूट के दर्ज हैं। जंगली बटेर या तीतर पकड़ना, रखना या बेचना अपराध है: इनमें से ज़्यादातर पक्षियों के लिए 3 साल तक की जेल, ₹1 लाख तक का जुर्माना, या दोनों, और अनुसूची I की दुर्लभ प्रजातियों के लिए इससे ज़्यादा सज़ा (India Code)।
- पुरानी सलाह। 2013 से पहले लिखी कुछ गाइडों में अब भी लिखा है कि लाइसेंस चाहिए। अगर कोई आपसे लाइसेंस माँगे, तो अपने नज़दीकी पशु चिकित्सालय या वन विभाग के दफ़्तर से पता करें।
- अपना फ़ार्म पंजीकृत कराएं। अप्रैल 2025 में भारत सरकार ने सभी पोल्ट्री फ़ार्मों से अपने राज्य के पशुपालन विभाग में पंजीकरण कराने को कहा (PIB)। पंजीकरण का तरीका अपने नज़दीकी पशु चिकित्सालय से पूछें।
- प्रदूषण बोर्ड। पोल्ट्री फ़ार्म प्रदूषण बोर्डों की “हरी” (ग्रीन) श्रेणी में आते हैं, और बड़े फ़ार्मों को लगाने और चलाने के लिए राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सहमति चाहिए। खाद, मरे पक्षियों, गंदे पानी और मक्खियों के बारे में CPCB के दिशानिर्देश हर फ़ार्म पर लागू होते हैं, चाहे वह कितना भी बड़ा या छोटा हो (CPCB)। अपने बोर्ड के जिला कार्यालय से पूछें कि आपके फ़ार्म को सहमति चाहिए या नहीं।
नियम बदलते रहते हैं — अपने नज़दीकी पशु चिकित्सालय या पशुपालन विभाग के कार्यालय से पुष्टि कर लें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या जापानी बटेर पालने के लिए लाइसेंस चाहिए?
फ़ार्म में पली जापानी बटेर के लिए कोई वन्यजीव लाइसेंस नहीं चाहिए: वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम उन्हें अनुसूची II (प्रविष्टि 704) से बाहर रखता है (India Code)। फ़ार्म का पंजीकरण अपने राज्य के पशुपालन विभाग में कराएं (PIB)।
बटेरें कितने दिन में बिकने लायक हो जाती हैं?
मांस वाली बटेरें करीब 5–6 हफ़्ते में तैयार हो जाती हैं (TNAU)। अंडे देने वाली मादाएं करीब 6 हफ़्ते पर अंडे देना शुरू करती हैं (KVK नामक्कल)।
बटेर कितने अंडे देती है?
अंडे वाली किस्में साल में करीब 257 अंडे (TANUVAS नामक्कल गोल्ड) से 285–300 अंडे (कैरी-पर्ल) तक देती हैं, और हर अंडे का वज़न करीब 9–13 ग्राम होता है (TANUVAS समीक्षा, ICAR-CARI)।
क्या बटेरों को देसी मुर्गियों की तरह बाहर चुगने देना चाहिए?
नहीं। बटेरें शेड में, पिंजरों में या बिछावन पर पाली जाती हैं, और 2 हफ़्ते बाद उन्हें पिंजरों में ले जाने से बढ़वार बेहतर होती है (TNAU)। बर्ड फ्लू कार्य योजना भी पोल्ट्री को अंदर, जंगली पक्षियों से दूर रखने की सलाह देती है (बर्ड फ्लू कार्य योजना)।
क्या खेतों में पकड़ी गई बटेर या तीतर बेच सकते हैं?
नहीं। जंगली बटेर और तीतर वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम के तहत संरक्षित हैं; सिर्फ़ फ़ार्म में पली जापानी बटेर ही बेची जा सकती है (India Code)।
आगे पढ़ें
इनके बारे में भी पढ़ें: देसी मुर्गी पालन: दक्षिण भारत में नस्लें, खरीद और देखभाल, बत्तख पालन: दक्षिण भारत में नस्लें, खरीद और सेहत और टर्की पालन: किस्में, पालने का तरीका, खरीद और सेहत। आपके पास के किसान क्या बेच रहे हैं, यह देखने के लिए बिकाऊ बटेरें देखें, या फ़ार्म में पली अपनी बटेरों के लिए मुफ़्त विज्ञापन डालें।
कट्टुतरै पर अपने पास बटेर खोजें
अपने गाँव के पास के किसानों की फ़ार्म में पली बिकाऊ बटेरें और उनके चूजे सीधे देखें — फ़ोटो, गाँव के नाम और दूरी के साथ। कोई दलाल नहीं। किसान को कॉल या चैट करें, फिर पैसे देने से पहले पक्षियों को खुद देखकर जाँचें।
सिर्फ़ फ़ार्म में पली जापानी बटेर ही बेची जा सकती है। जंगली बटेर या तीतर कभी न खरीदें, न बेचें।

