असील मुर्गी: नस्ल, वज़न और कहाँ मिलती है

అసీల్

असील, तमिलनाडु की पेरुविडै: मांस के लिए पाली जाने वाली लंबी, भारी देसी मुर्गी। पहचान, वज़न, अंडे, मूल जिले और खरीदने के सुझाव।

अपडेट: 24 अक्टूबर 2026जाँचा गया: 24 अक्टूबर 2026कट्टुतरै टीम ने लिखा

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आँगन में खड़ा काला-लाल असील मुर्गा
சு.பத்மா (Su. Padma) · CC BY-SA 4.0
मूल इलाका
तेलंगानाKhammam, Bhadradri Kothagudem
बड़े होने पर वज़न
मुर्गा 4 किलोमुर्गी 2.6 किलो
अंडे
साल में 65–70
अंडे का वज़न
41 ग्राम
किस लिए पालते हैं
मांस
रंग
ज़्यादातर लाल या भूरा, और काला
नस्ल पंजीकरण
पंजीकृत नस्ल (ICAR-NBAGR)
इस पेज पर
  1. कैसे पहचानें
  2. इसे किस लिए पालते हैं
  3. यह नस्ल ज़्यादातर कहाँ मिलती है
  4. पालने के सुझाव
  5. खरीदने के सुझाव
  6. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
  7. आगे पढ़ें

असील एक लंबी, भारी देसी मुर्गी है, जिसे मांस के लिए पाला जाता है। TANUVAS ने पुष्टि की है कि यही तमिलनाडु की पेरुविडै है (TANUVAS)। NBAGR ने असील को छत्तीसगढ़, ओडिशा और आंध्र प्रदेश की मुर्गी नस्ल के रूप में दर्ज किया है (ICAR-NBAGR); इसके मूल इलाके में खम्मम भी आता है, जो अब तेलंगाना में है।

कैसे पहचानें

  • बनावट: बड़ा, सीधा खड़ा पक्षी — चौड़ा सीना, लंबी गर्दन, छोटा सिर और लंबी, मज़बूत टाँगें (TANUVAS)।
  • वज़न: NBAGR के नस्ल रिकॉर्ड में बड़े होने पर मुर्गों का वज़न करीब 4 किलो और मुर्गियों का करीब 2.6 किलो है (ICAR-NBAGR)।
  • कलगी और चेहरा: सिर से सटी छोटी मटर कलगी (कुछ पक्षियों में इकहरी या गुलाब कलगी), चमकीले लाल गलकंबल और कान की लौ, और लंबा, पतला चेहरा, जिस पर लगभग पंख नहीं होते (ICAR-NBAGR)। चोंच छोटी, मज़बूत और पीली होती है (TANUVAS)।
  • पंख: कसे हुए और सख्त, रोएँदार पंख लगभग नहीं, और सीने पर बहुत कम पंख। ज़्यादातर पक्षी लाल या भूरे और काले रंग के होते हैं, पर NBAGR के रिकॉर्ड में कई रंग किस्में दर्ज हैं, जैसे पीला (सुनहरा लाल), नूरी (सफ़ेद), कागर (काला) और जावा (काली किनारी वाले पंख) (ICAR-NBAGR)।
  • चमड़ी और टाँगें: सफ़ेद या पीली (ICAR-NBAGR)।
  • तमिलनाडु की किस्में: सबसे लोकप्रिय किलि मूक्कु – विसिरि वाल किस्म है, जिसका नाम उसकी तोते जैसी चोंच और पंखे की तरह फैली पूँछ से पड़ा है। विक्रेता रंग की किस्मों के नाम भी बताते हैं: मयिल करुप्पु (मोर जैसा काला), सेंगरुप्पु, सेवलै, साम्बल (स्लेटी), करुंगीरि, सेंगीरि, वेल्लै (सफ़ेद) और पोन्निरम (सुनहरा) (TANUVAS)। ये सिर्फ़ रूप-रंग हैं, अलग नस्लें नहीं।

इसे किस लिए पालते हैं

  • मांस। असील का शरीर मज़बूत और भारी होता है, और NBAGR के रिकॉर्ड में लिखा है कि इसका मांस खूब पसंद किया जाता है (ICAR-NBAGR)। इसके मुर्गे कॉर्निश की नर लाइन (पिता पक्ष) थे — कॉर्निश इंग्लैंड की मांस वाली नस्ल है, जिससे आज के ब्रॉयलर बने हैं (TANUVAS)।
  • देसी मुर्गी फ़ार्मों के लिए मुर्गे। तमिलनाडु में फ़ार्म पर देसी मुर्गी पालने वाले ज़्यादातर किसान असील और असील संकर पसंद करते हैं, और ज़्यादातर पेरेंट फ़ार्म (जहाँ चूजों के लिए अंडे देने वाले पक्षी रखे जाते हैं) असील मुर्गे ही रखते हैं (TANUVAS)।
  • अंडे कम, पर अच्छी माँ। मुर्गियाँ कम अंडे देती हैं: घर-आँगन में साल में करीब 40 (TANUVAS) और NBAGR के नस्ल रिकॉर्ड में 65–70; अंडे का वज़न करीब 41 ग्राम होता है और पहला अंडा करीब 6.7 महीने की उम्र में आता है (ICAR-NBAGR); हैदराबाद में ICAR-DPR के फ़ार्म पर चुनी हुई मुर्गियाँ भी 60–70 अंडे देती हैं (ICAR-DPR)। मुर्गियाँ आसानी से अंडे सेती हैं और चूजों को अच्छी तरह पालती हैं, और मूल इलाके में अंडे ज़्यादातर चूजे निकालने के लिए रखे जाते हैं (TANUVAS, ICAR-NBAGR)।
  • बढ़वार। ICAR-DPR के फ़ार्म पर असील 5 महीने में 1.8–2.0 किलो के हो जाते हैं (ICAR-DPR)। रामनाथपुरम जिले के पाँच फ़ार्मों पर TANUVAS के एक परीक्षण में असील चूजों का वज़न 20 हफ़्तों में करीब 1.44 किलो बढ़ा, जो उसी दाने पर पले कड़कनाथ या सिरुविडै चूजों से ज़्यादा था (TANUVAS अध्ययन)।
  • उन्नत लाइनें। TANUVAS ने TANUVAS असील नाम की एक लाइन निकाली है, जो अच्छी देखभाल में करीब 160 अंडे देती है — असील से लगभग दोगुने (TANUVAS समीक्षा); और ICAR-DPR ने अपनी वनश्री किस्म असील से तैयार की है (ICAR-DPR)।

यह नस्ल ज़्यादातर कहाँ मिलती है

NBAGR के नस्ल रिकॉर्ड में खम्मम जिले का नाम है, जो तब आंध्र प्रदेश में था; अब यह तेलंगाना में है और खम्मम और भद्राद्रि कोठागुडेम में बँट चुका है। बाकी मूल इलाका दक्षिण भारत से बाहर है: ओडिशा के कोरापुट और मलकानगिरि जिले, और छत्तीसगढ़ के बस्तर और दन्तेवाड़ा। NBAGR के अनुसार इस नस्ल को बस्तर और आंध्र प्रदेश के आदिवासी समुदायों ने विकसित किया (ICAR-NBAGR)।

असील इससे कहीं ज़्यादा इलाकों में पाली जाती है: TANUVAS के अनुसार शुद्ध असील आठ राज्यों में मिलती है, जिनमें केरल को छोड़कर दक्षिण के सभी राज्य हैं, और आंध्र प्रदेश का गोदावरी इलाका अच्छे पक्षियों के लिए जाना जाता है। तमिलनाडु में डिंडीगुल, मदुरै, कोयंबटूर, सलेम और तिरुप्पुर जिलों में इसे पालने वाले किसानों के समूह तोते जैसी चोंच वाली किस्म रखते हैं (TANUVAS)। मार्च 2022 तक TANUVAS के होसूर कॉलेज ने तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के किसानों को 71,665 असील पक्षी दिए थे (TANUVAS)।

मूल जिले: Khammam, Bhadradri KothagudemMap data © OpenStreetMap contributors

असील मुर्गियाँ चाहिए?

अपने पास बिकाऊ असील मुर्गियाँ ढूँढने के लिए कट्टुतरै ऐप में “असील” खोजें, या सभी बिकाऊ मुर्गियाँ देखें। नस्ल विक्रेता बताता है और कट्टुतरै उसकी जाँच नहीं करता, इसलिए पैसे देने से पहले पक्षियों को खुद देखें।

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पालने के सुझाव

  • दिन में चुगना, रात में मुर्गी घर। असील घर-आँगन या अर्ध-सघन झुंड के लिए ठीक है, जो दिन में घूमकर दाना चुगता है और रात को सुरक्षित मुर्गी घर में सोता है: देखें देसी मुर्गियाँ कैसे पाली जाती हैं।
  • बड़े मुर्गों को अलग रखें। TANUVAS के अनुसार असील थोड़े गुस्सैल पक्षी हो सकते हैं, हालाँकि पालने वाले के साथ वे शांत रहते हैं (TANUVAS)। बड़े मुर्गे एक-दूसरे को चोंच मारकर घायल कर देते हैं, इसलिए हर मुर्गे को अलग बाड़ा दें या उन्हें अलग-अलग रखें।
  • सेहत। पशु चिकित्सक की सलाह के अनुसार टीके लगवाएं, मुर्गी घर साफ़ रखें, और नए खरीदे पक्षियों को एक महीने तक अपने झुंड से दूर रखें: देखें मुर्गियों को स्वस्थ रखें।

खरीदने के सुझाव

  • पहचान देखें: लंबा, सीधा खड़ा पक्षी, चौड़ा सीना, कसे हुए सख्त पंख जो सीने पर कम हों, सिर से सटी छोटी कलगी, छोटी मज़बूत चोंच और लंबी, मज़बूत टाँगें। मुलायम, रोएँदार पंख NBAGR के नस्ल विवरण से मेल नहीं खाते (ICAR-NBAGR)।
  • संकर आम हैं। किसान असील और असील संकर, दोनों पालते हैं (TANUVAS)। विज्ञापन में नस्ल का नाम विक्रेता का बताया हुआ होता है, और कट्टुतरै उसकी जाँच नहीं करता। हो सके तो माता-पिता पक्षी देखें, और पहचान खुद जाँचें।
  • जानी-मानी हैचरी से चूजे। TANUVAS का होसूर कॉलेज और हैदराबाद में ICAR-DPR असील देते हैं (TANUVAS, ICAR-DPR)। जहाँ हो सके, चूजे सरकारी या पंजीकृत हैचरी से खरीदें।
  • सेहत और कागज़: पूछें कि पक्षियों को कौन-कौन से टीके लगे हैं, और पैसे देने से पहले बीमारी के लक्षण देखें: देखें देसी मुर्गियाँ खरीदना।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या पेरुविडै और असील एक ही हैं?

हाँ। TANUVAS लिखता है कि असील नस्ल ही पेरुविडै है (TANUVAS)। छोटी सिरुविडै एक अलग देसी मुर्गी है: देखें तमिलनाडु की देसी मुर्गियों की किस्में।

असील मुर्गी कितने अंडे देती है?

कम: घर-आँगन में साल में करीब 40, और NBAGR के रिकॉर्ड में 65–70 (TANUVAS, ICAR-NBAGR)। अंडों के लिए ग्रामप्रिया जैसी उन्नत किस्म कहीं ज़्यादा अंडे देती है: घर-आँगन में साल में 160–180 (ICAR-DPR)।

क्या असील नए पालक के लिए ठीक है?

मांस और चूजों के लिए पाले जाने वाले छोटे घर-आँगन झुंड के लिए, हाँ: यह खुद चुगकर पेट भरती है, अपने चूजे खुद निकालती है और पालने वाले के साथ शांत रहती है। लेकिन यह कम अंडे देती है, और बड़े मुर्गों को अलग रखना पड़ता है।

आगे पढ़ें

असील की तुलना दक्षिण भारत की दो और देसी नस्लों, कालस्थी और घागस, से करें। खरीदने, देखभाल और बर्ड फ्लू के बारे में देसी मुर्गी पालन: दक्षिण भारत में नस्लें, खरीद और देखभाल पढ़ें, और बिकाऊ मुर्गियाँ देखें।

स्रोत

  1. ICAR-National Bureau of Animal Genetic Resources (NBAGR), Karnal — Registered chicken breeds (breed, home tract, accession number) · पढ़ा गया 24 अक्टूबर 2026
  2. ICAR-National Bureau of Animal Genetic Resources (NBAGR), Karnal — Indian Journal of Animal Sciences 81 (3): 310–23, March 2011 — Breed Descriptor of Chicken (special feature), including the descriptor of Aseel · पढ़ा गया 24 अक्टूबर 2026
  3. TANUVAS — M. Murugan, D. Kanthimathi and S. Edwin, Livestock Farm Complex, Veterinary College and Research Institute, Tirunelveli; Kozhi Nanban, January 2020, pp. 18–19 (copy on KrishiKosh) — அசில் இனக் கோழிகள் – இந்தியாவின் பெருமை (Aseel chickens – India's pride), in Tamil · पढ़ा गया 24 अक्टूबर 2026
  4. ICAR-Directorate of Poultry Research (DPR), Hyderabad — compiled by Vijay Kumar (pamphlet uploaded October 2024) — Improved Rural Chicken Varieties (pamphlet, with farm performance of native chicken and germplasm price list) · पढ़ा गया 24 अक्टूबर 2026
  5. ICAR-Directorate of Poultry Research (DPR), Hyderabad — Technology Developed (rural chicken varieties) · पढ़ा गया 24 अक्टूबर 2026
  6. M. Babu, Director of Research (Retd.), TANUVAS — Indian Journal of Veterinary and Animal Sciences Research 46 (2): 921–927, 2017 — Poultry science research and extension — a review · पढ़ा गया 24 अक्टूबर 2026
  7. TANUVAS — College of Poultry Production and Management (CPPM), Hosur — Outreach: poultry seed production centre and germplasm supplied (until March 2022) · पढ़ा गया 24 अक्टूबर 2026
  8. N. V. Rajesh, T. A. Vijayalingam, S. Ilavarasan, M. Boopathy Raja (TANUVAS) — Indian Journal of Veterinary and Animal Sciences Research 52 (5), published 25 Aug 2025 — Study on the growth performance of three indigenous chicken breeds in Ramanathapuram district · पढ़ा गया 24 अक्टूबर 2026

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