देसी मुर्गियाँ कैसे बेचें: उम्र, कीमत और सुरक्षित पेमेंट

देसी मुर्गियाँ कब और किस वज़न पर बेचें, किसान कहाँ बेचते हैं, अच्छा मुफ़्त विज्ञापन, सही कीमत, सुरक्षित पेमेंट, ढुलाई के कागज़ और बर्ड फ्लू की पाबंदियाँ।

अपडेट: 25 अक्टूबर 2026जाँचा गया: 25 अक्टूबर 2026कट्टुतरै टीम ने लिखा

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  1. आप क्या बेच सकते हैं
  2. बेचने की उम्र और वज़न
  3. खरीदार कब ढूँढते हैं
  4. कहाँ बेचें
  5. अच्छा विज्ञापन लिखें
  6. सही कीमत पाएं
  7. पैसे सुरक्षित तरीके से लें
  8. ढुलाई, कागज़ और बर्ड फ्लू
  9. आम गलतियाँ
  10. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
  11. आगे क्या करें

बिक्री की योजना बनाएं: पक्षियों को सही उम्र और वज़न पर बेचें, उनके बारे में ईमानदारी से बताएं, एक से ज़्यादा खरीदारों से कीमत पूछें, और पैसे सुरक्षित तरीके से, आमने-सामने लें। आप अपने फ़ार्म पर, साप्ताहिक हाट में, दुकानों और व्यापारियों को, या कट्टुतरै पर मुफ़्त विज्ञापन डालकर सीधे खरीदारों को बेच सकते हैं।

आप क्या बेच सकते हैं

  • मांस के लिए बड़े पक्षी: मुर्गे और मुर्गियाँ।
  • चूजे और कम उम्र के पक्षी: अगर आप अंडों से चूजे निकालते हैं तो एक दिन के चूजे, या नया झुंड शुरू करने वालों के लिए 4–6 हफ़्ते के ब्रूडिंग हो चुके चूजे।
  • प्रजनन वाले पक्षी: दूसरे किसानों के झुंडों के लिए अच्छी मुर्गियाँ और मुर्गे। देसी मुर्गियाँ अंडे सेने बैठती हैं और उनसे चूजे निकालती हैं, जबकि संकर और उन्नत किस्म के पक्षी आम तौर पर ऐसा नहीं करते (TANUVAS), इसलिए जो किसान चूजे निकालना चाहते हैं, वे देसी मुर्गियाँ ढूँढते हैं।
  • अंडे: खाने के लिए, या चूजे निकालने के लिए।
  • खाद: अपने खेतों के लिए, या बेचने के लिए।

तमिलनाडु की सब्सिडी योजना भी आमदनी का हिसाब इसी तरह लगाती है: एक दिन के चूजे, खाने वाले अंडे, और मांस के लिए बेची गई बड़ी मुर्गियाँ और मुर्गे (तिरुवारूर)।

बेचने की उम्र और वज़न

  • कम उम्र के मांस वाले पक्षी: TANUVAS के अनुसार शेड में पाली गई देसी मुर्गियाँ 3 महीने से 4 महीने के अंदर, 1.1–1.3 किलो की होने पर बेची जाती हैं (TANUVAS)।
  • बड़ी उम्र के, भारी पक्षी: नामक्कल के एक अध्ययन में 50 से ज़्यादा देसी पक्षियों वाले फ़ार्मों ने औसतन करीब 6 महीने पर 2 किलो के पक्षी बेचे, और घर-आँगन वालों ने करीब 8 महीने पर 1.85 किलो के। बड़े फ़ार्मों में 26% किसानों ने 1–1.5 किलो पर, 38% ने 1.5–2.25 किलो पर और 36% ने 2.25–3.25 किलो पर बेचा (TANUVAS अध्ययन, 2021)।
  • उन्नत किस्में तेज़ी से बढ़ती हैं: किसानों के घर-आँगन में वनराजा मुर्गे 12 हफ़्ते में 1.5–1.8 किलो के हो जाते हैं (ICAR-DPR), और KVASU के अनुसार ग्रामश्री कॉकरेल (जवान मुर्गे) मांस के लिए 12 हफ़्ते पर बेचना सबसे अच्छा है (KVASU)।
  • हर अतिरिक्त हफ़्ते में दाने का खर्च लगता है। तब बेचें जब बढ़े हुए वज़न से मिलने वाला पैसा अतिरिक्त दाने के खर्च से ज़्यादा हो; इसमें लागत निकलने का हिसाब मदद करता है।

खरीदार कब ढूँढते हैं

  • माँग साल भर बदलती रहती है। कृष्णगिरि जिले में NABARD के एक अध्ययन में पाया गया कि देसी मुर्गी का बाज़ार धार्मिक रीति-रिवाजों से प्रभावित होता है, और उसमें स्थानीय हाटों और बेंगलुरु की माँग को बेचने के मौके बताया गया (NABARD, 2018)।
  • खरीदार घर में पाले गए पक्षियों की कद्र करते हैं: TANUVAS लिखता है कि उनके अंडे और मांस ज़्यादा दाम पर बिकते हैं, क्योंकि खरीदार उन्हें पसंद करते हैं, कस्बों में भी (TANUVAS, 2018)।
  • अपने इलाके के बुज़ुर्ग किसानों और व्यापारियों से पूछें कि किन महीनों में खरीदार आते हैं, और किन महीनों में माँग घटती है। चूजे ऐसे समय पर लें कि पक्षी तेज़ बिक्री वाले महीनों में बिकने लायक वज़न तक पहुँच जाएं।

कहाँ बेचें

नामक्कल के अध्ययन में बड़े देसी फ़ार्मों ने ज़्यादातर फ़ार्म पर आए खरीदारों को बेचा (57%), फिर खुदरा दुकानदारों को (33%) और गाँव के बाज़ारों में (23%)। घर-आँगन वालों ने ज़्यादातर गाँव के बाज़ारों में बेचा (53%), फिर खुदरा दुकानदारों को (26%) और फ़ार्म पर (21%); किसान एक से ज़्यादा तरीके बता सकते थे (TANUVAS अध्ययन, 2021)।

कहाँ किस बात के लिए अच्छा किस बात का ध्यान रखें
अपने फ़ार्म पर खरीदार आपके पास आते हैं; ढुलाई नहीं जब तक लोग आपको जानने न लगें, खरीदार कम
साप्ताहिक हाट या गाँव का बाज़ार बहुत खरीदार; उसी दिन कई कीमतों की तुलना कर सकते हैं ढुलाई और पक्षियों पर तनाव; पास में बर्ड फ्लू होने पर बाज़ार बंद हो जाते हैं
दुकानें और व्यापारी नियमित खरीदार जो जल्दी पैसे देते हैं कम कीमत; NABARD व्यापारियों के चंगुल में फँसने की चेतावनी देता है
विज्ञापन के ज़रिए सीधे खरीदारों को पास के गाँवों और कस्बों के खरीदार आपसे संपर्क करते हैं पक्षी जाने से पहले पेमेंट जाँच लें

तमिलनाडु का पशुपालन विभाग खुद कहता है कि बाज़ार तक पहुँच कम होने से घर-आँगन की ज़्यादातर मुर्गियाँ घर के इस्तेमाल में ही रह जाती हैं (पॉलिसी नोट 2026-27)। कट्टुतरै पर आप फ़ोटो और वीडियो के साथ मुफ़्त विज्ञापन डाल सकते हैं; खरीदार आपको सीधे कॉल या चैट करते हैं, और कोई कमीशन नहीं लगता। मुर्गे, मुर्गियाँ और चूजे “मुर्गा-मुर्गी” श्रेणी में डालें।

अपनी मुर्गियाँ कट्टुतरै पर बेचें

फ़ोटो और छोटे वीडियो के साथ मुफ़्त विज्ञापन डालें। पास के खरीदार आपको सीधे कॉल या चैट करेंगे। कोई कमीशन नहीं।

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अच्छा विज्ञापन लिखें

  • दिन की रोशनी में फ़ोटो: हर पक्षी की बगल से फ़ोटो, और कलगी, पैरों और पंखों की पास से फ़ोटो; पूरे बैच के लिए झुंड की एक फ़ोटो।
  • पक्षियों के चलने और खाने का एक छोटा वीडियो।
  • पक्षी असल में क्या हैं, ईमानदारी से: देसी मुर्गी, असील (पेरुविडै), वनराजा जैसी उन्नत किस्म, या संकर। NABARD ने पाया था कि हाइब्रिड पक्षी देसी मुर्गी बताकर बेचे जा रहे थे; देखें: देसी मुर्गी की नस्लें: अंडे या मांस के लिए पक्षी कैसे चुनें।
  • उम्र हफ़्तों या महीनों में, और नर या मादा: मुर्गे, मुर्गियाँ या दोनों।
  • वज़न किलो में, तराज़ू पर तौलकर, अंदाज़े से नहीं।
  • आप कितने पक्षी बेच रहे हैं।
  • टीके: किन बीमारियों के और कब, जैसा आपके पशु चिकित्सक ने लिखा हो।
  • चूजों के लिए: अंडे से निकलने की तारीख, और उनकी ब्रूडिंग हुई है या नहीं।
  • आपका गाँव और जिला।
  • कीमत प्रति पक्षी या प्रति किलो, और मोल-भाव होगा या नहीं।

सही कीमत पाएं

  • पक्षियों को तौलें, ताकि आपको ठीक-ठीक पता हो कि आप क्या बेच रहे हैं।
  • कीमत पक्की करने से पहले 3–4 खरीदारों या व्यापारियों से पूछें।
  • हाट वाले दिन हाट की कीमतों से, और विज्ञापनों में माँगी गई कीमतों से तुलना करें। नीचे के बॉक्स में कट्टुतरै पर किसानों के मुर्गी के विज्ञापनों में माँगी गई कीमतें हैं।
  • जब पक्षी उस वज़न तक पहुँच जाएं जो खरीदार चाहते हैं, तब बेचें; बड़ी उम्र के पक्षी खाते ही रहते हैं।

1 नवंबर 2026 को कट्टुतरै पर

किसानों के विज्ञापनों में माँगी गई कीमत — बाज़ार भाव नहीं।

पैसे सुरक्षित तरीके से लें

  • आमने-सामने मिलें, अपने फ़ार्म पर या किसी सार्वजनिक जगह पर, दिन के उजाले में। पैसे देने से पहले खरीदार को पक्षी देखने दें, और पक्षी जाने से पहले आप पैसे देख लें।
  • UPI से पैसे लें, तो अपने बैंक ऐप या बैंक के SMS में देखें कि पैसे सच में आपके अपने बैंक खाते में आ गए हैं। स्क्रीनशॉट कोई सबूत नहीं है।
  • पैसे पाने के लिए आपको कभी QR कोड स्कैन करने या अपना PIN डालने की ज़रूरत नहीं होती, और अपना OTP या PIN कभी किसी को न बताएं (RBI, 2022)।
  • किसी “खरीदार” को कभी कुछ न दें: न एडवांस, न ट्रांसपोर्ट चार्ज, न रजिस्ट्रेशन फ़ीस, न डिपॉज़िट। अगर आप खुद पक्षी खरीद रहे हैं, तो पढ़ें धोखे से कैसे बचें।

ढुलाई, कागज़ और बर्ड फ्लू

  • पशु चिकित्सक का सर्टिफ़िकेट: पशुओं का परिवहन (संशोधन) नियम, 2001 के तहत, एक दिन के चूजों को छोड़कर बाकी सभी मुर्गियों की जाँच करके पशु चिकित्सक को प्रमाणित करना होता है कि वे किसी संक्रामक रोग से मुक्त हैं और सफ़र के लायक हैं (नियम 79(a)) (AWBI)।
  • रास्ते में: 25°C से ज़्यादा गर्मी या 15°C से कम ठंड में मुर्गियों को न ले जाएं, इसलिए दिन के ठंडे समय में सफ़र करें। साफ़ डिब्बे इस्तेमाल करें, एक के ऊपर एक न रखें, मुर्गों को मुर्गियों से अलग रखें, और गर्म मौसम में हर 6 घंटे पर पानी दें। ज़्यादा जानकारी: पक्षियों को ले जाना।
  • बीमार पक्षी कभी न बेचें, न ही ऐसे झुंड के पक्षी जिसमें अचानक मौतें हुई हों। अचानक मौत की सूचना 24 घंटे के अंदर नज़दीकी पशु चिकित्सा संस्थान को दें (बर्ड फ्लू कार्य योजना), या 1962 पर कॉल करें (PIB)।
  • बर्ड फ्लू की पाबंदियाँ: बीमारी फैलने के बाद उसके चारों ओर 10 किमी तक के इलाके में न मुर्गियाँ अंदर लाई जा सकती हैं, न बाहर ले जाई जा सकती हैं, और वहाँ की मुर्गी और अंडे की दुकानें कलिंग और सफ़ाई पूरी होने तक बंद रहती हैं। जिस ज़िंदा पक्षियों के बाज़ार में बीमारी पक्की हो जाए, वह सफ़ाई के बाद 21 दिन तक बंद रहता है। पक्षी गाड़ी में लादने से पहले अपने जिले की सूचनाएं देखें।
  • रसीद: खरीदार को एक सादी रसीद दें और उसकी एक कॉपी अपने पास रखें: तारीख, दोनों के नाम और फ़ोन नंबर, पक्षियों की संख्या, कीमत, और टीकाकरण का रिकॉर्ड।

आम गलतियाँ

  • जल्दबाज़ी में, पहली ही कीमत पर बेच देना।
  • तौलने के बजाय वज़न का अंदाज़ा लगाना।
  • संकर या उन्नत किस्म के पक्षी को शुद्ध देसी बताना।
  • पैसे आपके खाते में आने से पहले पक्षी जाने देना।
  • पशु चिकित्सक के सर्टिफ़िकेट के बिना पक्षी ले जाना, या बर्ड फ्लू वाले इलाके में ले जाना या वहाँ से निकालना।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

देसी मुर्गियाँ किस उम्र में बेचें?

TANUVAS के अनुसार मांस के लिए पाले गए पक्षी 3–4 महीने पर, 1.1–1.3 किलो के होने पर बिकते हैं; कई फ़ार्म करीब 6 महीने पर करीब 2 किलो के बड़े पक्षी बेचते हैं। फ़ैसला करने से पहले अतिरिक्त दाने और अतिरिक्त वज़न की तुलना करें।

देसी मुर्गी पालक कहाँ बेचते हैं?

नामक्कल के एक अध्ययन में बड़े फ़ार्मों ने ज़्यादातर फ़ार्म पर आए खरीदारों को बेचा, और घर-आँगन वालों ने ज़्यादातर गाँव के बाज़ारों में। मुफ़्त विज्ञापन से पास के गाँवों और कस्बों के खरीदार भी आते हैं।

क्या मुर्गियों को ले जाने के लिए सर्टिफ़िकेट चाहिए?

हाँ, एक दिन के चूजों को छोड़कर बाकी पक्षियों के लिए: पशु चिकित्सक को प्रमाणित करना होता है कि वे किसी संक्रामक रोग से मुक्त हैं और सफ़र के लायक हैं। सफ़र से पहले अपने पशु औषधालय से पूछें।

बेचते समय धोखे से कैसे बचें?

आमने-सामने मिलें, पैसे आपके अपने बैंक खाते में आए हैं, यह खुद जाँचें, पैसे पाने के लिए कभी QR कोड स्कैन न करें या PIN न डालें, और किसी खरीदार को कभी कुछ न दें। धोखा हो जाए, तो तुरंत 1930 पर कॉल करें।

आगे क्या करें

जब आपके पक्षी तैयार हों, तो मुफ़्त विज्ञापन डालें, या तुलना के लिए अपने पास की बिकाऊ मुर्गियाँ देखें। आपकी बिक्री से लागत निकल रही है या नहीं, यह जाँचने के लिए पढ़ें: देसी मुर्गी पालन की लागत और आमदनी: हिसाब का एक उदाहरण।

स्रोत

  1. District Administration, Tiruvarur (Tamil Nadu) — press release No. 62, 22 September 2026 — Animal Husbandry Department news: 50% subsidy for small-scale country chicken farm units (250 birds per unit), 2026-27 · पढ़ा गया 25 अक्टूबर 2026
  2. TANUVAS — P. Vasanthakumar, Veterinary University Training and Research Centre, Karur; in Nattukoli Valarppu Vanoli Velan Palli (TANUVAS, 2018), pp. 1–4 (copy on KrishiKosh) — கிராமபுற பொருளாதார முன்னேற்றத்தில் நாட்டுக்கோழி வளர்ப்பின் பங்கு (Country chicken in rural development), in Tamil · पढ़ा गया 25 अक्टूबर 2026
  3. TANUVAS — V. Thanaseelan, M. Chellapandian and S. Vasanthakumar, Veterinary University Training and Research Centre, Ramaiyanpatti, Tirunelveli; Kalnadai Kathir, February–March 2011, pp. 45–48 (copy on KrishiKosh) — இலாபம் தரும் நாட்டுக்கோழி வளர்ப்பு (Profitable country chicken rearing), in Tamil · पढ़ा गया 25 अक्टूबर 2026
  4. R. Babyusha, K. M. Sakthivel, N. Narmatha, V. Uma (TANUVAS) — Indian Journal of Animal Sciences 91 (11): 979–982, November 2021 — Comparative analysis of production system and marketing pattern of commercial desi chicken farming venture and backyard poultry farming in Tamil Nadu · पढ़ा गया 25 अक्टूबर 2026
  5. Kerala Veterinary and Animal Sciences University (KVASU) — University Poultry and Duck Farm, Mannuthy — University Poultry and Duck Farm, Mannuthy · पढ़ा गया 25 अक्टूबर 2026
  6. NABARD, Tamil Nadu Regional Office (June 2018) — Area Development Scheme: Backyard Poultry Farming in Krishnagiri District · पढ़ा गया 25 अक्टूबर 2026
  7. Tamil Nadu Veterinary and Animal Sciences University (TANUVAS) — TANUVAS Technical Reporter, Vol. 2 Issue 5, January–February 2018 — TANUVAS Aseel Chicken · पढ़ा गया 25 अक्टूबर 2026
  8. Animal Husbandry, Dairying, Fisheries and Fishermen Welfare Department, Government of Tamil Nadu — Animal Husbandry Policy Note 2026-2027, Demand No. 6 (English) · पढ़ा गया 25 अक्टूबर 2026
  9. Reserve Bank of India — Consumer Awareness – Cyber Threats and Frauds (press release, 28 January 2022) · पढ़ा गया 25 अक्टूबर 2026
  10. Indian Cybercrime Coordination Centre (I4C), Ministry of Home Affairs — I4C FAQ: reporting cybercrime and financial cyber fraud (page updated 11 March 2026) · पढ़ा गया 25 अक्टूबर 2026
  11. Animal Welfare Board of India (AWBI) — Transport of Animals (Amendment) Rules, 2001, S.O. 269(E), 26 March 2001 — Transport of Animals (Amendment) Rules, 2001: Chapter VII, transport of poultry by rail, road and air (rules 76–84) · पढ़ा गया 25 अक्टूबर 2026
  12. Department of Animal Husbandry and Dairying, Government of India — copy hosted by ICAR-National Institute of Veterinary Epidemiology and Disease Informatics (NIVEDI), Bengaluru — Action Plan for Prevention, Control and Containment of Avian Influenza (Revised – 2021) · पढ़ा गया 25 अक्टूबर 2026
  13. Press Information Bureau, Ministry of Fisheries, Animal Husbandry and Dairying, 9 January 2026 — Digitalizing India's Dairy Sector (PIB backgrounder) · पढ़ा गया 25 अक्टूबर 2026
  14. ICAR-Directorate of Poultry Research (DPR), Hyderabad — Technology Developed (rural chicken varieties) · पढ़ा गया 25 अक्टूबर 2026

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