पक्षी इस हिसाब से चुनें कि आप क्या बेचना चाहते हैं (अंडे, मांस या चूजे) और उन्हें कैसे रखेंगे। ज़्यादातर देसी किस्में और देसी नस्लें खुद अपने चूजे निकालती हैं, पर अंडे कम देती हैं; अनुसंधान संस्थानों की उन्नत किस्में ज़्यादा अंडे देती हैं, लेकिन वे नस्लें नहीं हैं और उनकी मुर्गियाँ शायद ही अंडे सेती हैं। यह अध्याय बताता है कि फ़ैसला कैसे करें, और उन पक्षियों की तुलना करता है जिनके अपने नस्ल पेज हैं।
पहले तय करें कि आप क्या बेचेंगे
- मांस। शेड में पूरा दाना देकर पाली गई देसी मुर्गियाँ 3.5–4 किलो दाना खाकर 1.1–1.3 किलो की हो जाती हैं और 3–4 महीने की उम्र में बिकती हैं (TANUVAS)। असील जैसे भारी देसी पक्षी, जिनके बड़े मुर्गों का वज़न करीब 4 किलो होता है, मुख्य रूप से मांस के लिए पाले जाते हैं (ICAR-NBAGR)।
- अंडे। देसी मुर्गियाँ साल में सिर्फ़ 60–70 अंडे देती हैं (TANUVAS), कुछ हद तक इसलिए कि वे अंडे सेने और चूजे पालने के लिए अंडे देना बंद कर देती हैं (TANUVAS)। ज़्यादा अंडों के लिए ग्रामप्रिया जैसी अंडे वाली उन्नत किस्म देखें।
- मांस और अंडे। वनराजा और श्रीनिधि जैसी दोहरे काम की उन्नत किस्मों में मुर्गियों से अंडे मिलते हैं, और कम उम्र के मुर्गे करीब 12 हफ़्ते में बिकने लायक हो जाते हैं (ICAR-DPR)।
- चूजे। चूजे निकालकर बेचने के लिए आपको ऐसी मुर्गियाँ चाहिए जो अपने अंडे सेती हों। संकर और उन्नत किस्म की मुर्गियाँ आम तौर पर अंडे नहीं सेतीं, इसलिए किसान उनके अंडे देसी मुर्गियों के नीचे रखते हैं (TANUVAS)। देखें: देसी मुर्गी के अंडों से चूजे: सेने वाली मुर्गी, इनक्यूबेटर।
देसी किस्में और देसी नस्लें
TANUVAS के अनुसार तमिलनाडु के गाँवों की ज़्यादातर मुर्गियाँ स्थानीय किस्में हैं, अलग नस्लें नहीं, और तमिलनाडु की कोई भी मुर्गी NBAGR के नस्ल रजिस्टर में दर्ज नहीं है (TANUVAS, ICAR-NBAGR)। किसान जिन किस्मों के नाम लेते हैं, उनमें पेरुविडै है, जिसके असील होने की पुष्टि TANUVAS करता है (TANUVAS), फिर उससे छोटी सिरुविडै, नंगी गर्दन वाली (नेकेड नेक), घुंघराले पंखों वाली (फ़्रिज़ल) और करुंगोझी (कड़कनाथ): देखें तमिलनाडु की देसी मुर्गियों की किस्में।
दक्षिण भारत में छह पंजीकृत नस्लें पाली जाती हैं। असील, घागस, कालस्थी और टेलीचेरी का मूल इलाका वहीं है; कड़कनाथ मध्य प्रदेश से और निकोबारी निकोबार द्वीप समूह से आती है, और TANUVAS का होसूर कॉलेज दक्षिण के किसानों को ये दोनों देता है (ICAR-NBAGR, TANUVAS)। ज़्यादातर देसी मुर्गियाँ अपने अंडे सेती हैं: NBAGR के नस्ल रिकॉर्ड में असील, घागस, कालस्थी और टेलीचेरी के लिए यह दर्ज है, लेकिन निकोबारी के लिए सिर्फ़ “कभी-कभी” (ICAR-NBAGR)।
उन्नत किस्में नस्लें नहीं हैं
अनुसंधान संस्थानों ने घर-आँगन के लिए ऐसे पक्षी तैयार किए हैं जो देसी मुर्गियों से तेज़ बढ़ते हैं और ज़्यादा अंडे देते हैं: हैदराबाद के ICAR-DPR की वनराजा, ग्रामप्रिया और श्रीनिधि, और बेंगलुरु के KVAFSU की गिरिराजा (ICAR-DPR, KVAFSU)। ये उन्नत किस्में हैं, नस्लें नहीं: इनमें से कोई भी NBAGR के रजिस्टर में नहीं है (ICAR-NBAGR)।
- खुले घर-आँगन के लिए बनी हैं। ब्रूडिंग के बाद, 6 हफ़्ते पर, हर घर में 10–20 पक्षी दिन में चुग सकते हैं और रात में मुर्गी घर (दड़बे) में सो सकते हैं (ICAR-DPR)। जहाँ खरीदार मांस चाहते हैं, वहाँ वनराजा को शेड में संतुलित दाना देकर बिकने लायक वज़न तक भी पाला जा सकता है (TANUVAS समीक्षा)।
- मुर्गियाँ शायद ही अंडे सेती हैं। संकर और उन्नत किस्म की मुर्गियाँ आम तौर पर अंडे सेने नहीं बैठतीं (TANUVAS), इसलिए आपको फिर से चूजे खरीदने होंगे, या अंडे सेने के लिए कुछ देसी मुर्गियाँ रखनी होंगी।
- सीधे स्रोत से खरीदें। उन्नत किस्मों का कोई पक्का रूप-रंग नहीं होता, इसलिए चूजे ऐसी हैचरी से खरीदें जो इन्हें तैयार करती या बाँटती हो: देखें कहाँ से खरीदें।
ब्रॉयलर अलग कारोबार है
ब्रॉयलर — व्यावसायिक पोल्ट्री फ़ार्मों की तेज़ी से बढ़ने वाली मांस वाली मुर्गियाँ — करीब 3.5 किलो दाना खाकर 5–6 हफ़्ते में 1.8–2 किलो के बिकने लायक वज़न तक पहुँच जाती हैं (UAS Bangalore)। इन्हें बैच में, शेड के अंदर, पूरा दाना देकर पाला जाता है। कई किसान इन्हें कॉन्ट्रैक्ट पर पालते हैं: कंपनी एक दिन के चूजे, दाना और सलाह देती है और बड़े पक्षी तय कीमत पर वापस खरीद लेती है, जबकि शेड, उपकरण, पानी, बिजली और मज़दूरी किसान की होती है (UAS Bangalore)।
यह बड़े पैमाने का गहन कारोबार है, जिसकी अपनी लागत और अपने जोखिम हैं, और यह गाइड उसके बारे में नहीं है। देसी मुर्गियाँ बहुत धीरे बढ़ती हैं, लेकिन TANUVAS के अनुसार उन्हें ब्रॉयलर से कम बीमारियाँ होती हैं (TANUVAS)।
देखें कि आपके आसपास के खरीदार क्या चाहते हैं
हर जगह के खरीदार अलग होते हैं। चुनने से पहले:
- अपने साप्ताहिक हाट जाएं और देखें कि कौन-से पक्षी सबसे जल्दी बिकते हैं: भारी मुर्गे, अंडे देने वाली मुर्गियाँ, चूजे या अंडे।
- व्यापारियों, दुकानों और दूसरे मुर्गी पालकों से पूछें कि वे कौन-से पक्षी खरीदते हैं, और किन त्योहारों के लिए।
- अपने जिले में बिकाऊ मुर्गियों के किसानों के विज्ञापनों में माँगी गई कीमतें देखें।
कब और कहाँ बेचें, इसके लिए देखें: देसी मुर्गियाँ कैसे बेचें: उम्र, कीमत और सुरक्षित पेमेंट।
नस्लों और किस्मों की तुलना
ये आंकड़े नस्ल रिकॉर्ड और अनुसंधान फ़ार्मों के हैं; आपके आँगन के पक्षी दाने और देखभाल के हिसाब से अलग होंगे। हर नाम पर दबाने से उसका अपना पेज खुलता है।
| पक्षी | किस तरह का, कहाँ का | किस लिए पालते हैं | जानने लायक बातें |
|---|---|---|---|
| असील (पेरुविडै) | पंजीकृत नस्ल; मूल इलाके में खम्मम (तेलंगाना) भी | मांस | ऊँचा और भारी: मुर्गे करीब 4 किलो, मुर्गियाँ करीब 2.6 किलो; घर-आँगन में मुर्गियाँ साल में करीब 40 अंडे देती हैं और अच्छी माँ होती हैं |
| घागस | पंजीकृत नस्ल; कोलार और बेंगलुरु (कर्नाटक), चित्तूर और अनंतपुर (आंध्र प्रदेश) | मांस और अंडे | हल्की: मुर्गे करीब 2.2 किलो, मुर्गियाँ करीब 1.4 किलो; गाँवों में साल में करीब 52 अंडे |
| कालस्थी | पंजीकृत नस्ल; पुराने चित्तूर, कडपा और नेल्लोर जिले (आंध्र प्रदेश) | मांस | नीलापन लिए काला या भूरा; मुर्गे करीब 2.5 किलो, मुर्गियाँ करीब 1.9 किलो; साल में करीब 34 अंडे |
| टेलीचेरी | पंजीकृत नस्ल; कोझिकोड, कन्नूर और मलप्पुरम (केरल), और माहे | मांस | नीली चमक वाला काला; औसतन मुर्गे 1.62 किलो और मुर्गियाँ 1.24 किलो; साल में करीब 72 अंडे |
| कड़कनाथ (करुंगोझी) | पंजीकृत नस्ल; झाबुआ और धार (मध्य प्रदेश) | मांस | त्वचा, पैर और मांस गहरे रंग के; छोटा: मुर्गे करीब 1.6 किलो, मुर्गियाँ करीब 1.1 किलो; NBAGR के रिकॉर्ड में साल में 85–90 अंडे |
| निकोबारी | पंजीकृत नस्ल; निकोबार द्वीप समूह | अंडे और मांस | बहुत छोटे पैर; मुर्गे करीब 1.8 किलो, मुर्गियाँ करीब 1.3 किलो; औसतन साल में करीब 149 अंडे |
| वनराजा | उन्नत किस्म; ICAR-DPR, हैदराबाद | मांस और अंडे | कई रंगों वाली; घर-आँगन में साल में 100–110 अंडे; बड़े मुर्गे 2.2–2.5 किलो, मुर्गियाँ 1.8–2.0 किलो |
| ग्रामप्रिया | उन्नत किस्म; ICAR-DPR, हैदराबाद | अंडे; कम उम्र के मुर्गे मांस के लिए | ज़्यादातर भूरी; घर-आँगन में साल में लगभग 150–180 अंडे; कम उम्र के मुर्गे 15 हफ़्ते पर 1.5–1.8 किलो |
| श्रीनिधि | उन्नत किस्म; ICAR-DPR, हैदराबाद | मांस और अंडे | कई रंग; घर-आँगन में साल में 140–150 अंडे; बड़े मुर्गे 2.2–2.8 किलो, मुर्गियाँ 2.0–2.4 किलो |
| गिरिराजा | उन्नत किस्म; KVAFSU, बेंगलुरु, 1989 | मांस और अंडे | रंगीन; साल में करीब 140–150 अंडे; बड़े मुर्गे करीब 4–5 किलो, मुर्गियाँ करीब 3.5–3.75 किलो; अलग-अलग अध्ययनों में आंकड़े अलग हैं |
स्रोत: देसी नस्लें — ICAR-NBAGR, असील के अंडे — TANUVAS; ICAR-DPR की किस्में — ICAR-DPR, ICAR-DPR; गिरिराजा — UAS Bangalore, KVAFSU।
कट्टुतरै पर अपने पास देसी मुर्गियाँ खोजें
अपने गाँव के पास के किसानों की बिकाऊ देसी मुर्गियाँ, मुर्गे और चूजे सीधे देखें — फ़ोटो, गाँव के नाम और दूरी के साथ। कोई दलाल नहीं। किसान को कॉल या चैट करें, फिर पैसे देने से पहले पक्षियों को खुद देखकर जाँचें।
कोई खास नस्ल चाहिए? कट्टुतरै ऐप में उसका नाम खोजें, जैसे असील, कड़कनाथ या वनराजा।
विक्रेताओं के बताए नाम और असली नस्लें
- नस्ल का नाम विक्रेता का बताया हुआ होता है। विज्ञापन में “पेरुविडै”, “कड़कनाथ” या “वनराजा” लिखा होना एक दावा है, और कट्टुतरै उसकी जाँच नहीं करता। 2018 में NABARD ने पाया कि कृष्णगिरि, होसूर और बेंगलुरु के आसपास हाइब्रिड मुर्गियाँ देसी मुर्गी बताकर बेची जा रही थीं (NABARD)।
- संकर पक्षी आम हैं। तमिलनाडु में सबसे ज़्यादा असील जैसे पक्षी और संकर पक्षी पाले जाते हैं (TANUVAS), और किसान असील और असील के संकर, दोनों रखते हैं (TANUVAS)। संकर पक्षी भी घर-आँगन के लिए अच्छा हो सकता है; बस उसके लिए नस्ल वाली कीमत न दें।
- “देसी” शब्द बहुत ढीले ढंग से इस्तेमाल होता है। अपने मूल इलाकों में किसान घागस, कालस्थी और टेलीचेरी को बस “देसी” कहते हैं (ICAR-NBAGR)।
- पहचान के निशान जाँचें। हर नस्ल के पेज पर ये दिए गए हैं: असील के कसे हुए, सख्त पंख, कड़कनाथ की काली त्वचा और बैंगनी कलगी, निकोबारी के बहुत छोटे पैर। उन्नत किस्मों का कोई पक्का रूप-रंग नहीं होता, इसलिए पूछें कि चूजे किस हैचरी से आए, और हो सके तो माँ-बाप पक्षी देखें।
आम गलतियाँ
- उन्नत किस्म के पक्षी खरीदकर यह उम्मीद करना कि उनकी मुर्गियाँ चूजे निकालेंगी।
- ऐसे पक्षी के लिए नस्ल वाली कीमत देना, जिसकी नस्ल आप पक्की न कर सकें।
- ऐसा मशहूर नाम चुनना, जिसे आपके आसपास के खरीदार माँगते ही नहीं।
- देसी मुर्गियों से बहुत अंडों की उम्मीद करना: वे साल में 60–70 अंडे देती हैं।
- देसी मुर्गियों के लिए बने घर-आँगन वाले इंतज़ाम में ब्रॉयलर से शुरुआत करना।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
तमिलनाडु के लिए कौन-सी देसी मुर्गी ठीक है?
कोई एक पक्षी हर फ़ार्म के लिए ठीक नहीं होता। मांस और चूजों के लिए कई किसान पेरुविडै (असील) और उसके संकर रखते हैं; ज़्यादा अंडों के लिए ग्रामप्रिया जैसी उन्नत किस्म; दोनों के लिए वनराजा या श्रीनिधि। यह देखकर चुनें कि आप क्या बेचेंगे, पक्षियों को कैसे रखेंगे और आपके आसपास के खरीदार क्या चाहते हैं।
क्या पेरुविडै और असील एक ही हैं?
हाँ। TANUVAS लिखता है कि असील नस्ल ही पेरुविडै है (TANUVAS)।
क्या उन्नत किस्में खुद अपने चूजे निकालती हैं?
आम तौर पर नहीं: संकर और उन्नत किस्म की मुर्गियाँ आम तौर पर अंडे सेने नहीं बैठतीं (TANUVAS)। अंडे सेने के लिए कुछ देसी मुर्गियाँ रखें, या इनक्यूबेटर इस्तेमाल करें: देखें देसी मुर्गी के अंडों से चूजे: सेने वाली मुर्गी, इनक्यूबेटर।
क्या ब्रॉयलर देसी मुर्गियाँ हैं?
नहीं। ब्रॉयलर तेज़ी से बढ़ने वाली व्यावसायिक मांस वाली मुर्गियाँ हैं, जिन्हें बैच में शेड के अंदर पूरा दाना देकर पाला जाता है। देसी मुर्गियाँ धीरे बढ़ती हैं और घर-आँगन और छोटे फ़ार्मों में पाली जाती हैं, अक्सर दिन में खुले में चुगते हुए।
आगे क्या करें
अब पढ़ें: देसी चूजे सुरक्षित तरीके से खरीदें: हैचरी, सेहत और धोखा — पैसे देने से पहले चूजों और पक्षियों की जाँच कैसे करें, और उन्हें सुरक्षित तरीके से कैसे ले जाएं। आपके आसपास के किसान कौन-से पक्षी बेच रहे हैं, यह देखने के लिए बिकाऊ मुर्गियाँ देखें।
