छोटी डेयरी के ज़्यादातर नुकसान रोके जा सकते हैं: हर पशु को हर दिन देखें, समय पर टीके लगवाएं, पेट के कीड़ों और किलनी से बचाव की योजना अपने पशु चिकित्सक के साथ बनाएं, नए और बीमार पशुओं को अलग रखें, और पशु चिकित्सक को जल्दी बुलाएं। इस पेज पर सिर्फ़ बचाव और खतरे के लक्षणों की जानकारी है। बीमार पशु के लिए अपने पशु चिकित्सक को या टोल-फ़्री पशु हेल्पलाइन 1962 पर कॉल करें।
हर पशु को हर दिन जाँचें
NDDB हर पशु के लिए हर दिन ये सात सवाल पूछने का सुझाव देता है (NDDB):
- क्या वह झुंड के साथ सामान्य बर्ताव कर रही है?
- क्या वह सिर, कान और पूँछ हमेशा की तरह रखती है, और ठीक से चलती है?
- क्या उसकी हालत अच्छी है, न बहुत दुबली, न बहुत मोटी?
- क्या वह खाती-पीती और जुगाली करती है?
- क्या उसका गोबर और पेशाब सामान्य है?
- अगर वह दूध दे रही है, तो क्या दूध अचानक घट गया है?
- क्या कोई और बात अलग या अजीब है?
स्वस्थ बड़ा पशु एक मिनट में 10–30 बार साँस लेता है (बछड़ा 30–50 बार) और दिन में 7–10 घंटे जुगाली करता है। उसकी खाल चमकती है, आँखें साफ़ होती हैं और थूथन नम रहता है (NDDB)। शरीर का सामान्य तापमान करीब 38.5 °C (101.5 °F) होता है (TNAU)। कुछ भी बदले, तो अपने पशु चिकित्सक को बुलाएं।
खतरे के लक्षण: तुरंत पशु चिकित्सक को बुलाएं
| रोग | खतरे के लक्षण | किसे और कब |
|---|---|---|
| खुरपका-मुंहपका (FMD) | बुखार, बहुत ज़्यादा लार, जीभ, मसूड़ों और थनों पर और खुरों के बीच छाले, लंगड़ाना, दूध में तेज़ गिरावट | सभी गाय-बैल और भैंसें; छोटे बछड़ों की अक्सर जान ले लेता है |
| गलघोंटू (HS) | तेज़ बुखार, लार, गले और छाती के निचले हिस्से में बड़ी सूजन, घरघराहट वाली साँस; 1–2 दिन में जान ले सकता है | बारिश का मौसम; भैंसों पर ज़्यादा असर |
| लंगड़ी बुखार (BQ) | अचानक तेज़ बुखार, लंगड़ाना, कूल्हे, पीठ या कंधे पर गरम, दर्द भरी सूजन, जिसे दबाने पर चरचराहट होती है | 6 महीने से 2 साल तक के कम उम्र के पशु, बारिश की शुरुआत में |
| लम्पी त्वचा रोग | बुखार, दूध में बड़ी गिरावट, पूरे शरीर की खाल पर सख्त, गोल गाँठें, आँखों और नाक से पानी बहना | काटने वाली मक्खियों, मच्छरों और किलनी से फैलता है |
| चिचड़ी बुखार (थेलेरियोसिस, किलनी से होने वाला बुखार) | तेज़ बुखार, सूजी हुई गिल्टियाँ, फीके मसूड़े, तेज़ साँस, तेज़ी से कमज़ोर होना | संकर और विदेशी नस्ल के कम उम्र के पशु; मई से अक्टूबर |
| थनैला | अयन का कोई हिस्सा सख्त, गरम और सूजा हुआ; दूध में थक्के, खून या पानी जैसा दूध | दूध देने वाले पशु, खासकर ज़्यादा दूध देने वाले |
| दुग्ध ज्वर (मिल्क फीवर) | ब्याने के बाद पहले 3 दिनों में: काँपना, लड़खड़ाना, फिर वह खड़ी नहीं हो पाती और गर्दन एक तरफ़ मोड़कर बैठी रहती है | ज़्यादा दूध देने वाली गायें, आम तौर पर 3रे से 5वें ब्यांत में |
| अफारा | पेट का बायाँ हिस्सा फूल जाता है, वह पेट पर लात मारती है और उसे साँस लेने में तकलीफ़ होती है | हरी-भरी, गीली घास या दलहनी चारा, बहुत भूखे पशु |
| गर्भपात | बच्चा गिर जाना, अक्सर 5वें महीने के बाद; जेर अंदर रुक सकती है | आम तौर पर ब्रुसेलोसिस पर शक होता है, और यह इंसानों में भी फैल सकता है |
| गर्मी का तनाव (हीट स्ट्रेस) | तेज़ हाँफना, लार गिरना, कम खाना, कम दूध | गरम दिनों में संकर पशु और भैंसें |
लक्षण NDDB की हैंडबुक से लिए गए हैं (NDDB); किलनी का मौसम और दुग्ध ज्वर का खतरा TNAU से (TNAU, TNAU)। दुहते समय थनैला की जाँच के लिए गाय-भैंस का दूध दुहना: साफ़ दूध और थनैला की जाँच देखें।
- अफारा और दुग्ध ज्वर कुछ ही घंटों में जान ले सकते हैं। तुरंत पशु चिकित्सक को बुलाएं, इंतज़ार न करें।
- बीमार पशु को तुरंत बाकी पशुओं से दूर, छाया में, पानी के पास ले जाएं।
- गरम दिन पर जो भैंस तेज़ साँस ले या खाना छोड़ दे, उसे तुरंत छाया और पानी चाहिए (ICAR-CIRB)। शेड को ठंडा रखने के तरीके गाय-भैंस का शेड: जगह, फ़र्श, छत और ठंडक में हैं।
टीकाकरण का कैलेंडर
| रोग | पहला टीका | उसके बाद |
|---|---|---|
| खुरपका-मुंहपका (FMD) | बछड़ों को 4–5 महीने पर; 4 हफ़्ते बाद बूस्टर | हर 6 महीने |
| गलघोंटू (HS) | 6 महीने से | हर साल, बारिश से पहले |
| लंगड़ी बुखार (BQ) | 6 महीने से | हर साल, बारिश से पहले |
| ब्रुसेलोसिस | बछियों को 4–8 महीने पर | ज़िंदगी में एक बार |
| चिचड़ी बुखार (सिर्फ़ संकर और विदेशी नस्ल के पशु) | 3 महीने से | पशु चिकित्सक से पूछें कि आपके इलाके में हर साल बूस्टर टीका ज़रूरी है या नहीं |
| लम्पी त्वचा रोग | 4 महीने से | हर साल |
खुरपका-मुंहपका और ब्रुसेलोसिस का समय राष्ट्रीय कार्यक्रम के अनुसार है (DAHD), और गाय और भैंस के पेजों से मेल खाता है (NDDB)। गलघोंटू और लंगड़ी बुखार का समय ICAR-CIRB के अनुसार है (ICAR-CIRB); लम्पी त्वचा रोग का NDDB के अनुसार (NDDB)। हर टीका अपने पशु चिकित्सक की सलाह से लगवाएं।
- खुरपका-मुंहपका और ब्रुसेलोसिस के टीके राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम (NADCP) के तहत लगते हैं: खुरपका-मुंहपका का टीका सभी गाय-बैलों और भैंसों को हर 6 महीने पर, और ब्रुसेलोसिस का 4–8 महीने की बछियों को एक बार (PIB)। इन टीकों का खर्च, टीका लगाने वाले की फ़ीस समेत, भारत सरकार देती है (PIB)। अपने पशु चिकित्सक से पूछें कि अगला दौर आपके गाँव कब पहुँचेगा।
- दूसरे टीके: अपने पशु चिकित्सालय से पूछें कि आपके इलाके में कौन-से टीके लगते हैं, और क्या उनकी कोई फ़ीस है।
- टीका लगे पशुओं के कान में टैग लगाया जाता है, और मालिक को टीकाकरण कार्ड मिलता है (DAHD)। उसे सँभालकर रखें।
- सिर्फ़ स्वस्थ पशुओं को टीका लगवाएं, रोग के मौसम से कम से कम एक महीना पहले, और उससे 2–3 हफ़्ते पहले कृमिनाशन कराएं। गर्भ के आखिरी दिनों वाली गाय को टीका लगवाने से पहले पशु चिकित्सक से पूछें (NDDB)।
पेट के कीड़े और किलनी: पशु चिकित्सक के साथ योजना बनाएं
- बछड़े: पहला कृमिनाशन जन्म के पहले दो हफ़्तों में (भैंस के बच्चों का सबसे पहले), फिर 6 महीने की उम्र तक हर महीने, जैसा आपके पशु चिकित्सक बताएं (NDDB, NDDB)।
- बड़े पशु: साल में 2–4 बार, जैसा आपके पशु चिकित्सक बताएं, कम से कम बारिश से पहले और बाद में। अगर पशु ठीक न हो, तो पशु चिकित्सक से उसके गोबर की जाँच कराएं, और एक ही दवा बार-बार न देते रहें (NDDB)।
- किलनी (चिचड़ी) चिचड़ी बुखार और किलनी से होने वाले दूसरे बुखार फैलाती है। पशुओं को अक्सर ध्यान से देखें, और हर नए पशु को झुंड में मिलाने से पहले उसकी किलनी हटवाएं। किलनी शेड की दीवारों और फ़र्श की दरारों में अंडे देती है, इसलिए दरारें भरें और शेड साफ़ रखें (NDDB)।
- पशु चिकित्सक से पूछें कि पशुओं पर और शेड में क्या इस्तेमाल करें: खेती के कीटनाशक पशुओं के लिए ज़हरीले हो सकते हैं। 3 महीने से छोटे बछड़ों पर किलनी की कोई दवा न लगाएं, और छिड़काव वाला चारा खिलाने से पहले धोएं (NDDB)।
- मक्खियाँ: गोबर और पेशाब नियमित रूप से हटाएं, और नालियों में पानी रुकने न दें (NDDB)।
नए पशुओं को अलग रखें
- हर नए पशु को, अपने पशु चिकित्सक की सलाह से, 30 दिन तक अपने झुंड से अलग रखें (NDDB, TNAU)।
- उसकी देखभाल अपने पशुओं के बाद करें, उसे छूने के बाद हाथ-पैर धोएं और कपड़े बदलें, और उसे सबसे आखिर में दुहें (NDDB)।
- इस दौरान पशु चिकित्सक से उसकी ब्रुसेलोसिस और छिपे थनैला रोग की जाँच कराएं, और ज़रूरत के हिसाब से उसकी किलनी हटवाएं, कृमिनाशन और टीकाकरण कराएं (NDDB)।
- पैसे देने से पहले की जाँचें, और पशुओं को ले जाने के नियम, दुधारू गाय-भैंस कैसे खरीदें: जाँच और ज़रूरी कागज़ और पशुओं को ले जाना में हैं।
बीमार पशु, गर्भपात और मौतें
- बीमार पशु को बाकी पशुओं से जितना हो सके उतना दूर रखें। उसकी देखभाल सबसे आखिर में करें, हो सके तो उसकी अपनी अलग बाल्टियों से, फिर हाथ-पैर धोएं और कपड़े बदलें। उसे तभी वापस लाएं जब वह पूरी तरह ठीक हो जाए (TNAU)।
- 24 घंटे के अंदर बताएं: अचानक मौत, गर्भपात, या झुंड में फैलती बीमारी। तुरंत नज़दीकी पशु चिकित्सक को बताएं या 1962 पर कॉल करें, और ज़्यादा से ज़्यादा 24 घंटे के अंदर (NDDB)।
- अगर कई पशु बीमार पड़ें, तो पशुओं, गाड़ियों और मेहमानों का आना-जाना रोकें, अपने पशुओं को साझा चरागाह में न भेजें, और पशु चिकित्सक को बुलाएं (TNAU)।
- गर्भपात के बाद: गाय को अलग रखें और पशु चिकित्सक को बुलाएं। गिरे हुए बच्चे या जेर को कभी नंगे हाथों से न छुएं, क्योंकि ब्रुसेलोसिस इंसानों में भी फैल सकता है; उन्हें चूने के साथ गहरा गाड़ दें (NDDB)।
- मरा हुआ पशु: उसे चीरें नहीं, उसे शेड में या बहते पानी के पास कभी न छोड़ें, और पशु चिकित्सक को बुलाएं। TNAU की सलाह है कि उसे चूने के साथ इस तरह गाड़ें कि शरीर का सबसे ऊपरी हिस्सा ज़मीन से कम से कम 1.5 मीटर नीचे रहे (TNAU)।
मदद: 1962 और मुफ़्त शिविर
- अपने इलाके की मोबाइल पशु चिकित्सा इकाई तक पहुँचने के लिए टोल-फ़्री नंबर 1962 डायल करें (PIB)। तमिलनाडु में हर इकाई तय कार्यक्रम के अनुसार रोज़ तीन गाँवों में भी जाती है (तमिलनाडु)।
- तमिलनाडु दूर-दराज़ के गाँवों में मुफ़्त पशु स्वास्थ्य शिविर लगाता है (तमिलनाडु)।
- आपका नज़दीकी पशु औषधालय या पशु चिकित्सालय पशुओं को टीके लगाता है और सलाह देता है।
सेहत का रिकॉर्ड रखें
हर पशु के लिए लिखें:
- उसके कान के टैग का 12 अंकों वाला नंबर;
- हर टीका, तारीख और रोग के साथ;
- कृमिनाशन की हर तारीख;
- बीमारियाँ और पशु चिकित्सक के दौरे;
- गर्भाधान और ब्याने की तारीखें, और दूध में कोई भी कमी।
कान के टैग से हर पशु के टीके सरकार के भारत पशुधन पोर्टल पर उसके नंबर से जुड़े रहते हैं (PIB)। एक कॉपी काफ़ी है, और बेचते समय खरीदार ये रिकॉर्ड माँगेगा: पशु बेचना देखें।
आम गलतियाँ
- टीका लगवाने के लिए रोग फैलने का इंतज़ार करना।
- नए पशु को आने वाले दिन ही झुंड में मिला देना।
- जल्दी पशु चिकित्सक को बुलाने के बजाय इंतज़ार करना और अंदाज़े लगाना।
- पशु चिकित्सक की सलाह के बिना पशुओं पर खेती के कीटनाशक इस्तेमाल करना।
- टीकाकरण और कृमिनाशन की तारीखों का कोई रिकॉर्ड न रखना।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
बछड़ों को किस उम्र में टीके लगवाने चाहिए?
करीब 3 महीने से: चिचड़ी बुखार का टीका 3 महीने पर (सिर्फ़ संकर और विदेशी नस्ल के बछड़ों को), खुरपका-मुंहपका 4–5 महीने पर और 4 हफ़्ते बाद उसका बूस्टर, लम्पी त्वचा रोग 4 महीने से, ब्रुसेलोसिस बछियों को 4–8 महीने पर, और गलघोंटू (HS) और लंगड़ी बुखार (BQ) 6 महीने से।
पशुओं के टीकों का खर्च कौन देता है?
राष्ट्रीय कार्यक्रम के तहत लगने वाले खुरपका-मुंहपका और ब्रुसेलोसिस के टीकों का खर्च, टीका लगाने वाले की फ़ीस समेत, भारत सरकार देती है। दूसरे टीकों के बारे में अपने पशु चिकित्सक से पूछें।
नई गाय को कितने दिन अलग रखें?
30 दिन तक, अपने झुंड से दूर, और उसे सबसे आखिर में दुहें।
गर्भपात के बाद क्या करें?
गाय को अलग रखें, 24 घंटे के अंदर पशु चिकित्सक को बुलाएं, और बच्चे या जेर को कभी नंगे हाथों से न छुएं।
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