धारवाड़ी उत्तर कर्नाटक की काली, दुधारू भैंस है, और इसका दूध मशहूर धारवाड़ पेड़े में लगता है (NDDB, ICAR-CIRB)। यह कम बारिश वाले इलाकों के लिए ठीक है, और NBAGR ने इसे कर्नाटक की भैंस नस्ल के रूप में पंजीकृत किया है (नस्ल रजिस्टर)। इस पेज पर जानें कि इसे कैसे पहचानें, यह क्या देती है और खरीदने से पहले क्या जाँचें।
इसे कैसे पहचानें
- रंग: काला (NDDB), और शरीर पर लंबे बाल, जो छाती, पेट और पैरों पर सबसे घने होते हैं (ICAR-CIRB)।
- सिर और कान: सीधा सिर और खड़े कान (NDDB)।
- सींग: अर्धगोलाकार, जो पीछे की ओर घूमकर लगभग कंधे के उभार को छू लेते हैं (NDDB)। पुराने विवरणों में इन्हें लंबे और चपटे बताया गया है, जो गर्दन के साथ-साथ पीछे जाते हैं और आखिर में ऊपर की ओर नुकीली नोक बनाते हैं (ICAR-CIRB)।
- अयन: मध्यम आकार का, बेलनाकार थनों वाला (NDDB)।
- आकार: मध्यम। KVAFSU के एक अध्ययन में बड़ी भैंसों का औसत वज़न करीब 337 किलो और कंधे तक ऊँचाई करीब 125 सेमी थी, और पहले महीने में बछड़ों का वज़न करीब 25 किलो था (KVAFSU)।
यह किस काम आती है
- दूध। NBAGR की नस्ल प्रोफ़ाइल के अनुसार एक ब्यांत में औसतन करीब 972 लीटर दूध मिलता है, रोज़ 1.5 से 8.7 लीटर तक, और उसमें करीब 6.9% फ़ैट होता है (NDDB)। KVAFSU के एक अध्ययन में 305 दिन में करीब 1,040 लीटर दूध का अनुमान लगाया गया; ब्याने के करीब 19 दिन बाद दूध सबसे ज़्यादा हुआ, रोज़ करीब 6.2 लीटर, और पहले 4 महीने तक दूध लगभग एक-सा बना रहा (KVAFSU)।
- धारवाड़ पेड़ा। इसके दूध से मशहूर धारवाड़ पेड़ा बनता है, जो GI टैग वाली मिठाई है (NDDB, ICAR-CIRB)।
- सूखे इलाके की भैंस। यह कम बारिश वाले, अर्ध-शुष्क इलाकों के लिए अच्छी तरह ढली हुई है (NDDB, ICAR-CIRB)।
- ब्याना। पहला बछड़ा करीब 46 महीने (41–54) की उम्र में होता है, फिर करीब हर 15–16 महीने में एक (ICAR-CIRB)।
यह मुख्य रूप से कहाँ मिलती है
NBAGR की नस्ल प्रोफ़ाइल के अनुसार धारवाड़ी पूरे उत्तर कर्नाटक में मिलती है: बागलकोट, बेलगावी, धारवाड़, गदग, बल्लारी, बीदर, विजयपुरा, चित्रदुर्ग, कलबुर्गी, हावेरी, कोप्पल, रायचूर और यादगीर जिलों में (NDDB)। NBAGR ने इसे कर्नाटक की नस्ल के रूप में पंजीकृत किया है (नस्ल रजिस्टर)। KVAFSU का अध्ययन धारवाड़ और उसके पास के बेलगावी, गदग और बागलकोट जिलों के किसानों के साथ किया गया था (KVAFSU)। इन भैंसों के पुराने नामों में धारवारी, होलेसाल और मुंडरगी शामिल हैं (ICAR-CIRB)।
धारवाड़ी भैंस चाहिए?
अपने पास बिकाऊ धारवाड़ी भैंसें ढूँढने के लिए कट्टुतरै ऐप में “धारवाड़ी” खोजें, या सभी बिकाऊ भैंसें देखें। नस्ल विक्रेता बताता है और कट्टुतरै उसकी जाँच नहीं करता, इसलिए पैसे देने से पहले भैंस को खुद देखें।
पालने के सुझाव
- गवली किसानों के झुंड। बेलगावी और धारवाड़ के आसपास गवली (गौली) समुदाय लंबे समय से इन भैंसों को दूध के लिए पालता आया है; ICAR-CIRB का बफ़ेलोपीडिया इन्हें शांत स्वभाव की बताता है, जिनमें झुंड में साथ रहने की आदत बहुत मज़बूत होती है (ICAR-CIRB)।
- चारा और ठंडक। हर भैंस की तरह इसे भी हरा और सूखा चारा, दिन भर साफ़ पानी और गर्मी के महीनों में ठंडक चाहिए; देखें भैंसें कैसे पाली जाती हैं।
- सेहत। भैंस की सेहत में दी गई तालिका के हिसाब से टीके लगवाएं और कृमिनाशन (पेट के कीड़ों की दवा) कराएं।
खरीदने के सुझाव
- पहचान के निशान देखें। मध्यम आकार की काली भैंस, जिसका सिर सीधा हो, कान खड़े हों और अर्धगोलाकार सींग पीछे कंधे के उभार की ओर घूमे हों, इस नस्ल से मेल खाती है (NDDB)।
- धारवाड़ी या पंढरपुरी? दोनों एक जैसी दिखती हैं, और पुरानी रिपोर्टों में उत्तर कर्नाटक की पंढरपुरी जैसी भैंसों को “धारवारी” कहा गया था (ICAR-CIRB)। NBAGR ने इन्हें अलग-अलग नस्लों के रूप में पंजीकृत किया है, कर्नाटक के लिए धारवाड़ी और महाराष्ट्र के लिए पंढरपुरी (नस्ल रजिस्टर); देखें पंढरपुरी।
- विज्ञापन में नस्ल का नाम विक्रेता का बताया हुआ होता है, और कट्टुतरै उसकी जाँच नहीं करता। संकर पशु आम हैं, इसलिए भैंस को खुद देखें, अपने सामने उसका दूध निकलवाकर देखें, और भैंस कैसे खरीदें में बताई गई बातें अपनाएं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या धारवाड़ी पंजीकृत नस्ल है?
हाँ। NBAGR ने धारवाड़ी को कर्नाटक की भैंस नस्ल के रूप में पंजीकृत किया है (नस्ल रजिस्टर)।
धारवाड़ी भैंस कितना दूध देती है?
एक ब्यांत में औसतन करीब 972 लीटर, रोज़ 1.5–8.7 लीटर, और करीब 6.9% फ़ैट (NDDB)।
क्या धारवाड़ पेड़ा धारवाड़ी भैंस के दूध से बनता है?
हाँ। NBAGR की नस्ल प्रोफ़ाइल और ICAR-CIRB, दोनों के अनुसार इस नस्ल का दूध मशहूर धारवाड़ पेड़ा बनाने में लगता है, जिसे GI टैग मिला है (NDDB, ICAR-CIRB)।
आगे पढ़ें
धारवाड़ी की तुलना उससे मिलती-जुलती पंढरपुरी से, या मुर्रा से करें, और सभी नस्लें यहाँ देखें: भैंस पालन: दक्षिण भारत में नस्लें, खरीद और देखभाल। अपने पास भैंसें ढूँढने के लिए बिकाऊ भैंसें देखें।
