कुट्टनाड बत्तख: चारा और चेमबाली किस्में, अंडे और मूल जिले

കുട്ടനാടൻ

कुट्टनाड, केरल की पंजीकृत देसी बत्तख (चारा और चेमबाली किस्में): कैसे पहचानें, साल के अंडे, वज़न, मूल जिले और खरीदने के सुझाव।

अपडेट: 24 अक्टूबर 2026जाँचा गया: 24 अक्टूबर 2026कट्टुतरै टीम ने लिखा

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केरल के एक फ़ार्म पर बारिश में खड़ी भूरी, काली और क्रीम रंग की बत्तखें
केरल के एक फ़ार्म की बत्तखें, जिन्हें फ़ोटो खींचने वाले ने कुट्टनाड बत्तखें बताया है।Midhunnileshwar · CC0
मूल इलाका
केरलAlappuzha, Kottayam, Pathanamthitta
अंडे
साल में 200–210
अंडे का वज़न
69 ग्राम
किस लिए पालते हैं
मांस · अंडे
रंग
कालापन लिए भूरा (चारा) या हल्का (चेमबाली)
नस्ल पंजीकरण
पंजीकृत नस्ल (ICAR-NBAGR)
इस पेज पर
  1. कैसे पहचानें
  2. यह किस काम की है
  3. यह नस्ल ज़्यादातर कहाँ मिलती है
  4. पालने के सुझाव
  5. खरीदने के सुझाव
  6. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
  7. आगे पढ़ें

कुट्टनाड बत्तख केरल की देसी बत्तख है, जिसे कुट्टनाड के धान के खेतों और बैकवॉटर (झीलों और नहरों) में अंडों और मांस के लिए पाला जाता है। किसान इसकी दो रंग किस्मों को चारा और चेमबाली नाम से जानते हैं। ICAR की नस्ल पंजीकरण समिति ने इसे 12 नवंबर 2025 को मंज़ूरी दी (ICAR), और 10 फ़रवरी 2026 की गज़ट अधिसूचना S.O. 722(E) से यह आधिकारिक हुई (भारत का राजपत्र)। NBAGR में इसका पंजीकरण नंबर INDIA_DUCK_0900_KUTTANAD_11007 है, और यह दक्षिणी राज्यों की अकेली पंजीकृत बत्तख नस्ल है (ICAR-NBAGR)।

कैसे पहचानें

  • दो रंग किस्में। चारा बत्तखों के पंख कालापन लिए भूरे और चोंच फीकी नारंगी होती है। चेमबाली बत्तखों के पंख हल्के और कई तरह के रंगों वाले, और चोंच पीली होती है। कई पक्षियों की चोंच पर काले धब्बे होते हैं (ICAR)।
  • कई स्थानीय नाम। स्लेटी, भूरे, काँसे जैसे, सफ़ेद, काले और चित्तीदार, सभी तरह के पक्षी दिखते हैं, और किसान रंग और धब्बों के हिसाब से तूवेल्ला, पुल्ली और पांडी जैसे नाम भी रखते हैं (केरल जैव विविधता बोर्ड)।
  • आकार। मध्यम आकार की बत्तख: बड़े होने पर वज़न करीब 1.6–2 किलो। ICAR ने नर और मादा दोनों के लिए यही एक दायरा दिया है (ICAR)।

यह किस काम की है

  • अंडे। अर्ध-सघन पालन में साल में करीब 200–210 अंडे, हर अंडा करीब 69 ग्राम का (ICAR)। युवा बत्तखें करीब 4–5 महीने की उम्र में अंडे देना शुरू करती हैं: केरल के एक अध्ययन में करीब 129 दिन पर (ICAR-DPR), और असम में घर-आँगन में पाली गई चारा और चेमबाली बत्तखों में करीब 155 दिन पर (ICAR-DPR समीक्षा)।
  • मांस भी। ICAR के अनुसार यह दोहरे उपयोग वाली बत्तख है, अंडों और मांस दोनों के लिए (ICAR)। KVASU ने अपने मन्नुथी फ़ार्म पर कुट्टनाड बत्तखों की तेज़ी से बढ़ने वाली मांस लाइन तैयार की है: 2012 से 5 पीढ़ियों के चुनाव के बाद 8 हफ़्ते पर इनका वज़न करीब 1.1 किलो से बढ़कर 1.6 किलो हो गया (KVASU)। ICAR-DPR के वैज्ञानिक सावधान करते हैं कि अच्छे अंडे देने वाले पक्षियों को वज़न के लिए चुनने से लंबे समय में उनके अंडे घट सकते हैं (ICAR-DPR)।
  • खुद चुगकर पेट भरती हैं। ये बत्तखें अपना काफ़ी खाना खुद ढूँढ लेती हैं और धान के साथ बत्तख पालन के लिए ठीक हैं (ICAR)। इन्हें कम देखभाल चाहिए, और केरल में होने वाले घुमंतू बत्तख पालन में ये ठीक बैठती हैं (केरल जैव विविधता बोर्ड)।

यह नस्ल ज़्यादातर कहाँ मिलती है

इस नस्ल का घर कुट्टनाड है — आलप्पुझा, कोट्टयम और पत्तनमतिट्टा जिलों का नीचा इलाका, जहाँ धान के खेत और बैकवॉटर हैं। ICAR के अनुसार इनकी संख्या करीब 17.8 लाख है (ICAR)। वहाँ बत्तख और धान का साथ पुराना है: कटाई के बाद झुंडों को खेतों में छोड़ दिया जाता है, ताकि वे गिरा हुआ दाना खाएं, और उनकी बीट से मिट्टी को खाद मिलती है (केरल जैव विविधता बोर्ड)।

कुट्टनाड के बत्तख वाले इलाके में बार-बार बर्ड फ्लू फैला है, जिसके बाद पक्षियों को मारा गया और नए पक्षी लाने पर रोक लगी (Down To Earth)। वहाँ से बत्तखें खरीदने से पहले अपने नज़दीकी पशु चिकित्सालय से बर्ड फ्लू की मौजूदा सूचनाओं के बारे में पूछें।

मूल जिले: Alappuzha, Kottayam, PathanamthittaMap data © OpenStreetMap contributors

कुट्टनाड बत्तखें चाहिए?

अपने पास बिकाऊ कुट्टनाड बत्तखें ढूँढने के लिए कट्टुतरै ऐप में “कुट्टनाड” खोजें, या सभी बिकाऊ बत्तखें देखें। नस्ल विक्रेता बताता है और कट्टुतरै उसकी जाँच नहीं करता, इसलिए पैसे देने से पहले पक्षियों को खुद देखें।

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पालने के सुझाव

  • रात में बाड़ा, दिन में चुगना। ज़्यादातर बत्तख पालक रात में अपने पक्षियों को बंद रखते हैं, घर पर बना थोड़ा दाना देते हैं और दिन में चुगने छोड़ देते हैं (ICAR-DPR समीक्षा)। कुट्टनाड के झुंड कटे हुए धान के खेतों, तालाबों और नहरों में चुगते हैं।
  • दाना ध्यान से दें। फफूंद लगा दाना कभी न दें। ठीक से न सुखाए गए मक्के और मूँगफली पर पनपने वाले फफूंद के ज़हर (एफ़्लाटॉक्सिन) का बत्तखों पर बहुत असर होता है, इसलिए इन्हें अक्सर बत्तखों के दाने में नहीं मिलाया जाता (ICAR-DPR समीक्षा)।
  • टीकाकरण। डक प्लेग और बत्तख हैजा के टीके के बारे में पशु चिकित्सक से पूछें। केरल में पालोड स्थित पशुपालन विभाग का संस्थान ये दोनों टीके बनाता है और सरकारी पशु चिकित्सा संस्थानों के ज़रिए मुफ़्त देता है (केरल पशुपालन विभाग)।
  • बर्ड फ्लू। नई बत्तखों को कम से कम 30 दिन तक अपने झुंड से दूर रखें, और किसी भी असामान्य बीमारी या मौत की खबर 24 घंटे के अंदर दें (DAHD योजना)। देखें बत्तखों को स्वस्थ रखें।

खरीदने के सुझाव

  • किस्म देखें। कुट्टनाड बत्तख मध्यम आकार की होती है, चारा रंग (कालापन लिए भूरी, फीकी नारंगी चोंच) या चेमबाली रंग (हल्की, पीली चोंच) वाली, और अक्सर उसकी चोंच पर काले धब्बे होते हैं।
  • “कुट्टनाड” विक्रेता का कहा हुआ नाम है। तमिलनाडु में मदुरै, तिरुनेलवेली और नागरकोइल के आसपास पाली गई बत्तखें केरल में कुट्टनाड बत्तख कहकर बेची गई हैं (Deccan Chronicle)। विज्ञापन में नस्ल का नाम विक्रेता का बताया हुआ होता है, और कट्टुतरै उसकी जाँच नहीं करता। पक्षियों को खुद देखें और पूछें कि उनके माता-पिता का झुंड कहाँ रखा जाता है।
  • संकर आम हैं। चराए जाने वाले झुंड तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के बीच घूमते रहते हैं, इसलिए बत्तखों की किस्में आपस में मिल जाती हैं (TANUVAS अध्ययन)।
  • जाने-माने फ़ार्म। मन्नुथी में KVASU का विश्वविद्यालय मुर्गी और बत्तख फ़ार्म कुट्टनाड बत्तखें रखता है, और सीधे भी और केरल पशुपालन विभाग के क्षेत्रीय मुर्गी फ़ार्मों के ज़रिए भी पक्षी देता है (KVASU)।
  • सेहत और कागज़। हर पक्षी को जाँचें, टीकाकरण का रिकॉर्ड माँगें और पक्षियों को नियमों के अनुसार ले जाएं: देखें बत्तखें खरीदना।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या चारा और चेमबाली अलग-अलग नस्लें हैं?

नहीं। ये एक ही पंजीकृत नस्ल, कुट्टनाड बत्तख, की दो रंग किस्में हैं। चारा कालापन लिए भूरी होती है और उसकी चोंच फीकी नारंगी; चेमबाली हल्के रंग की होती है और उसकी चोंच पीली (ICAR)।

कुट्टनाड बत्तख कितने अंडे देती है?

अर्ध-सघन पालन में साल में करीब 200–210, हर अंडा करीब 69 ग्राम का (ICAR)।

क्या तमिलनाडु में कुट्टनाड बत्तखें पाली जा सकती हैं?

हाँ। बत्तखें पहले से ही दोनों राज्यों के बीच आती-जाती हैं: दक्षिणी तमिलनाडु के किसान लंबे समय से पुरानी बत्तखों की जगह नई बत्तखें केरल के कोल्लम इलाके से खरीदते रहे हैं (TANUVAS अध्ययन)। उन्हें वही दें जो उन्हें अपने इलाके में मिलता है: पानी, कटे हुए खेत या चुगने की कोई और जगह, और रात में सुरक्षित बाड़ा।

क्या कुट्टनाड बत्तख नए पालक के लिए ठीक है?

इसे कम देखभाल चाहिए और यह अपना काफ़ी खाना खुद ढूँढ लेती है (केरल जैव विविधता बोर्ड), इसलिए यह ऐसे छोटे किसान के लिए ठीक है, जिसके पास पानी और चुगने की जगह हो। छोटे से शुरू करें, और पहले बर्ड फ्लू के नियम जान लें: देखें बत्तख पालन: दक्षिण भारत में नस्लें, खरीद और सेहत।

आगे पढ़ें

इसकी तुलना अंडे वाली नस्ल खाकी कैम्पबेल, मांस वाली नस्ल सफ़ेद पेकिन और मस्कोवी (मनीला) बत्तख से करें। पालन, खरीद और बर्ड फ्लू के नियमों के बारे में बत्तख पालन: दक्षिण भारत में नस्लें, खरीद और सेहत पढ़ें, और बिकाऊ बत्तखें देखें।

स्रोत

  1. ICAR-National Bureau of Animal Genetic Resources (NBAGR), Karnal — Chicken, Geese and Duck Breeds of India (registered breeds and accession numbers) · पढ़ा गया 24 अक्टूबर 2026
  2. Indian Council of Agricultural Research (ICAR), New Delhi — ICAR-NBAGR registers 16 new livestock and poultry breeds (news, Karnal, 12 November 2025) · पढ़ा गया 24 अक्टूबर 2026
  3. Gazette of India, Extraordinary, Part II, Section 3(ii), No. 685 (12 February 2026) — Ministry of Agriculture and Farmers' Welfare, Department of Agricultural Research and Education; copy hosted by ICAR-NBAGR — Notification S.O. 722(E), 10 February 2026: newly recognised breeds of livestock and poultry · पढ़ा गया 24 अक्टूबर 2026
  4. Indian Council of Agricultural Research (ICAR), New Delhi — Newly registered breeds (descriptions of the 16 breeds registered in 2025), item 10: Kuttanad duck · पढ़ा गया 24 अक्टूबर 2026
  5. Indian Journal of Animal Sciences 94 (1): 3–10, January 2024 (ICAR) — M K Padhi and S C Giri, ICAR-Directorate of Poultry Research, Regional Station, Bhubaneswar — Status of duck breeding in India (review) · पढ़ा गया 24 अक्टूबर 2026
  6. Indian Journal of Animal Sciences 92 (8): 917–926, August 2022 (ICAR) — P K Naik, B K Swain and C K Beura, ICAR-Directorate of Poultry Research, Regional Station, Bhubaneswar — Duck production in India — A review · पढ़ा गया 24 अक्टूबर 2026
  7. Kerala State Biodiversity Board, Thiruvananthapuram — Poultry Breeds of Kerala (brochure) · पढ़ा गया 24 अक्टूबर 2026
  8. Kerala Veterinary and Animal Sciences University (KVASU), University Poultry and Duck Farm, Mannuthy — University Poultry and Duck Farm, Mannuthy · पढ़ा गया 24 अक्टूबर 2026
  9. Down To Earth (news report, K A Shaji, 11 July 2024) — 'Who will compensate Kuttanad's poultry farmers?' Existential crisis in Kerala's backwaters as panel urges bird ban till next March over avian flu fears · पढ़ा गया 24 अक्टूबर 2026
  10. Animal Husbandry Department, Government of Kerala — Institute of Animal Health and Veterinary Biologicals (IAH&VB), Palode — Institute of Animal Health and Veterinary Biologicals, Palode · पढ़ा गया 24 अक्टूबर 2026
  11. Department of Animal Husbandry and Dairying (DAHD), Government of India; copy hosted by ICAR-National Institute of Veterinary Epidemiology and Disease Informatics (NIVEDI) — Action Plan for Prevention, Control & Containment of Avian Influenza (Revised – 2021) · पढ़ा गया 24 अक्टूबर 2026
  12. Deccan Chronicle (news report, T Sudheesh, 14 April 2017) — Kuttanadan ducks; now from Tamil Nadu · पढ़ा गया 24 अक्टूबर 2026
  13. Livestock Research for Rural Development 21 (10), 2009 — K Gajendran, Madras Veterinary College, and S M K Karthickeyan, Livestock Research Station, Kattupakkam (both TANUVAS) — Status of indigenous ducks in Tamil Nadu, India: a traditional perspective · पढ़ा गया 24 अक्टूबर 2026

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