सफ़ेद पेकिन तेज़ी से बढ़ने वाली सफ़ेद बत्तख है, जिसे मांस के लिए पाला जाता है। यह नस्ल चीन से आई है, और इसे पेकिन, अमेरिकन पेकिन या लॉन्ग आइलैंड बत्तख भी कहते हैं (ICAR-DPR समीक्षा)। भारत में मन्नुथी के KVASU फ़ार्म जैसे सरकारी फ़ार्म इसे रखते हैं और देते हैं (KVASU)। यह विदेशी नस्ल है और भारत के नस्ल रजिस्टर में नहीं है (ICAR-NBAGR)।
कैसे पहचानें
- रंग। मलाई जैसे सफ़ेद पंख, नारंगी-पीली चोंच, लाल-पीले से चमकीले नारंगी पैर और पंजे, और पीली चमड़ी। आँखें गहरी नीली और गाल भरे हुए होते हैं (ICAR-DPR समीक्षा)।
- बनावट। बड़ी, भारी बत्तख, जो काफ़ी सीधी खड़ी रहती है और थोड़ी घबराने वाली हो सकती है (ICAR-DPR समीक्षा)।
- आकार। बड़े होने पर नर का वज़न करीब 4 किलो और मादा का करीब 3.5 किलो होता है (ICAR-DPR समीक्षा)।
यह किस काम की है
- जल्दी मांस। इसे मुख्य रूप से मांस के लिए पाला जाता है (ICAR-DPR समीक्षा)। अच्छे दाने पर यह 42 दिन, यानी 6 हफ़्ते में करीब 2.2–2.5 किलो की हो सकती है (TNAU)।
- भारत के परीक्षणों में क्या मिला। ओडिशा में ICAR-DPR के परीक्षणों में सफ़ेद पेकिन बत्तखों का वज़न 8 हफ़्ते में करीब 2.2 किलो था, और एक दूसरे अध्ययन में करीब 2.5 किलो (ICAR-DPR समीक्षा)। ICAR-DPR के वैज्ञानिक बताते हैं कि भारत के किसी अध्ययन में 6 हफ़्ते पर 2.5 किलो से ज़्यादा वज़न नहीं दिखा, जबकि चीन में पेकिन बत्तखें तब तक करीब 3.3 किलो की हो जाती हैं (ICAR-DPR)।
- अंडे। अंडे देने के पहले साल में करीब 160–200 बड़े, हल्की रंगत वाले सफ़ेद अंडे (ICAR-DPR समीक्षा)।
- संकर। KVASU में पेकिन और कुट्टनाड माता-पिता से निकले चूजों का वज़न, चाहे पिता पेकिन हो या कुट्टनाड, कुट्टनाड बत्तखों से तेज़ बढ़ा, और जितना दाना खाया, उसके हिसाब से वज़न बढ़ने की दर में कोई बदलाव नहीं आया (KVASU)।
यह नस्ल ज़्यादातर कहाँ मिलती है
यह नस्ल चीन में शुरू हुई, और आज अमेरिका में सबसे लोकप्रिय बत्तख है (ICAR-DPR समीक्षा)। TNAU के अनुसार भारत की सफ़ेद पेकिन बत्तखें वियतनाम से मँगाई गई थीं (TNAU)। ICAR-DPR के वैज्ञानिकों का मानना है कि भारत में ज़्यादातर सफ़ेद पेकिन बत्तखें हेसरघट्टा, बेंगलुरु के केंद्रीय बत्तख प्रजनन फ़ार्म से आई हैं, और वे बताते हैं कि भारत में इस नस्ल के योजनाबद्ध प्रजनन की बहुत कम जानकारी मिली है (ICAR-DPR)। केरल में मन्नुथी का KVASU मुर्गी और बत्तख फ़ार्म सफ़ेद पेकिन रखता है और देता भी है (KVASU)।
सफ़ेद पेकिन बत्तखें चाहिए?
कट्टुतरै पूरे भारत में चलता है। सफ़ेद पेकिन बत्तखों के लिए ऐप में “सफ़ेद पेकिन” खोजें, या अपने पास की बिकाऊ बत्तखें देखें। नस्ल विक्रेता बताता है और कट्टुतरै उसकी जाँच नहीं करता, इसलिए पैसे देने से पहले पक्षियों को खुद देखें।
पालने के सुझाव
- बंद शेड वाले मांस फ़ार्म। ICAR-DPR के वैज्ञानिक सघन मांस फ़ार्मिंग के लिए सफ़ेद पेकिन सुझाते हैं (ICAR-DPR)। बंद शेड में बत्तखें धान की भूसी या कटे पुआल की मोटी बिछावन (डीप लिटर) पर रहती हैं, और दाना और पानी अंदर ही मिलता है (ICAR-DPR समीक्षा)।
- सस्ता दाना। सफ़ेद पेकिन पर ICAR-DPR के परीक्षणों में दाने में गेहूँ की जगह पूरी तरह टूटा चावल दिया गया, और मक्के के 40% तक हिस्से की जगह पानी में भिगोया हुआ कसावा (टैपिओका) का आटा, और बढ़वार पर कोई बुरा असर नहीं पड़ा (ICAR-DPR समीक्षा)।
- फफूंद लगा दाना नहीं। ठीक से न रखे गए मक्के और मूँगफली में फफूंद से बनने वाले ज़हर, एफ़्लाटॉक्सिन, का बत्तखों पर बहुत असर होता है। युवा सफ़ेद पेकिन में यह बढ़वार धीमी कर देता है और जान भी ले सकता है (ICAR-DPR समीक्षा)।
- सेहत। डक प्लेग और बत्तख हैजा के टीकों के बारे में पशु चिकित्सक से पूछें, और अचानक मौतों की खबर तुरंत दें: देखें बत्तखों को स्वस्थ रखें।
खरीदने के सुझाव
- रूप देखें। पूरी तरह मलाई जैसे सफ़ेद पंख, नारंगी-पीली चोंच और नारंगी पैर। जिस सफ़ेद बत्तख के चेहरे पर लाल, उभारदार चमड़ी हो, वह मस्कोवी है, पेकिन नहीं।
- हर सफ़ेद बत्तख पेकिन नहीं होती। विक्रेता की बताई “पेकिन” कोई संकर या मांस वाली कोई दूसरी लाइन भी हो सकती है। उदाहरण के लिए, भारत के केंद्रीय बत्तख फ़ार्म ने 1996 में वियतनाम की एक मांस वाली बत्तख लाइन, विगोवा सुपर एम, मँगाई थी (ICAR-DPR)।
- कुछ पक्षियों को तौलें। उम्र पूछें, कुछ पक्षियों को तौलें, और ऊपर दिए वज़न से मिलाएं।
- जाने-माने फ़ार्म। जहाँ हो सके, बत्तख के चूजे जाने-माने फ़ार्मों से खरीदें, जैसे मन्नुथी में KVASU का फ़ार्म। विज्ञापन में नस्ल का नाम विक्रेता का बताया हुआ होता है, और कट्टुतरै उसकी जाँच नहीं करता।
- सेहत और कागज़। हर पक्षी को जाँचें और टीकाकरण का रिकॉर्ड माँगें: देखें बत्तखें खरीदना।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सफ़ेद पेकिन कितनी तेज़ी से बढ़ती है?
TNAU के अनुसार अच्छे दाने पर 6 हफ़्ते में करीब 2.2–2.5 किलो (TNAU)। भारत में ICAR-DPR के परीक्षणों में पक्षियों का वज़न 8 हफ़्ते में करीब 2.2–2.5 किलो था (ICAR-DPR समीक्षा)।
सफ़ेद पेकिन कितने अंडे देती है?
अंडे देने के पहले साल में करीब 160–200 (ICAR-DPR समीक्षा)। इसे मुख्य रूप से मांस के लिए पाला जाता है।
सफ़ेद पेकिन और सफ़ेद मस्कोवी में फ़र्क कैसे पहचानें?
मस्कोवी की आँखों के आसपास बिना पंखों की, लाल, उभारदार चमड़ी होती है, और वह क्वैक-क्वैक की जगह फुफकारती है। पेकिन का चेहरा चिकना और पंखों से ढका होता है, और चोंच नारंगी-पीली (ICAR-DPR समीक्षा)।
क्या सफ़ेद पेकिन का स्थानीय बत्तखों से संकर कराया जा सकता है?
हाँ। KVASU ने पाया कि पेकिन और कुट्टनाड माता-पिता से निकले चूजे शुद्ध कुट्टनाड बत्तखों से तेज़ बढ़े (KVASU)। ऐसे संकरों को मांस के लिए पालें।
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