जर्सी सबसे छोटी दुधारू नस्ल है, लाल-बादामी रंग की, जो जर्सी द्वीप पर तैयार हुई; भारत में यह अच्छी तरह ढल गई है और स्थानीय गायों से संकर बनाने में खूब इस्तेमाल होती है (TNAU)। दक्षिण में फ़ार्मों पर जो जर्सी गायें हैं, वे ज़्यादातर संकर हैं, और मैदानी इलाकों में खूब पाली जाती हैं (तमिलनाडु का नीति नोट)। जर्सी संकर दूसरी विदेशी नस्लों के संकरों से बेहतर गर्मी झेलते हैं (TNAU), इसीलिए तमिलनाडु ने अपने मैदानी इलाकों के लिए जर्सी को चुना (तमिलनाडु की नीति)।
पहचान कैसे करें
- रंग: आम तौर पर लाल-बादामी (TNAU)।
- सिर और शरीर: बीच से धँसा हुआ माथा और गठा हुआ, कोणदार शरीर; शुद्ध जर्सी दुधारू नस्लों में सबसे छोटी होती है (TNAU)।
- संकर: जर्सी संकर मध्यम आकार की गायें होती हैं (TNAU)।
जर्सी संकर किस लिए पाले जाते हैं
- ज़्यादा फ़ैट वाला दूध। शुद्ध जर्सी गायें एक ब्यांत में करीब 4,500 किलो दूध देती हैं, जिसमें करीब 4.5% फ़ैट होता है (TNAU)।
- स्थानीय माँ से ज़्यादा दूध। स्थानीय गाय कैसी है, इस पर निर्भर करते हुए, पहली पीढ़ी की जर्सी संकर उससे 2–3 गुना दूध दे सकती है (TNAU)।
- किसानों के झुंडों में। तमिलनाडु के सहकारी दुग्ध संघ में दर्ज 75,627 जर्सी संकर गायों पर TANUVAS के एक अध्ययन में एक ब्यांत में औसतन करीब 2,480 किलो दूध मिला, यानी करीब 2,410 लीटर (TANUVAS अध्ययन)।
- अच्छी गाय। तमिलनाडु की प्रजनन नीति उस जर्सी संकर गाय को, जो अपने पहले 305 दिन के ब्यांत में 2,500 किलो या उससे ज़्यादा दूध दे, पंजीकरण लायक उत्तम (एलीट) गाय मानती है (तमिलनाडु की नीति)।
- बछड़े। एक बार में एक। शुद्ध जर्सी बछिया पहली बार 25–30 महीने की उम्र में ब्याती है, और फिर हर 13–14 महीने में (TNAU)।
यह कहाँ से आई
जर्सी, जर्सी द्वीप पर तैयार हुई (TNAU)। यह भारत के नस्ल रजिस्टर में नहीं है, जिसमें देश की अपनी नस्लें दर्ज हैं (ICAR-NBAGR)।
दक्षिण में जर्सी संकर मैदानी इलाकों की मुख्य दुधारू गायें हैं। तमिलनाडु की प्रजनन नीति ने मैदानी इलाकों के लिए जर्सी को इसलिए चुना, क्योंकि वहाँ मोटा चारा (हरा और सूखा) कम मिलता है और दाना महँगा है, और यह नीति संकरों में करीब आधा जर्सी खून रखती है (तमिलनाडु की नीति)। 2021–22 में राज्य के 101 लाख टन दूध में से करीब 91 लाख टन विदेशी और संकर गायों से आया, और थंजावुर जिले के ईचनकोट्टई में विदेशी नस्ल पशु प्रजनन फ़ार्म जैसे सरकारी फ़ार्म जर्सी और जर्सी संकर रखते हैं (तमिलनाडु का नीति नोट)। भारत में सबसे ज़्यादा संकर गाय-बैल तमिलनाडु में हैं, और उनमें से लगभग आधे विल्लुपुरम, तिरुवन्नामलै, सलेम, वेल्लोर, धर्मपुरी, कृष्णगिरि, कुड्डालोर और इरोड में हैं (NBAGR अध्ययन)। कर्नाटक की नीति बेंगलुरु क्षेत्र के बाहर जर्सी संकरों का सुझाव देती है (कर्नाटक की नीति), और केरल विदेशी नस्लों में सिर्फ़ जर्सी और HF की अनुमति देता है (केरल की नीति)।
जर्सी गाय-बैल चाहिए?
कट्टुतरै पूरे भारत में चलता है। जर्सी गाय-बैल के लिए ऐप में “जर्सी” खोजें, या अपने पास की बिकाऊ गायें देखें। नस्ल विक्रेता बताता है और कट्टुतरै उसकी जाँच नहीं करता, इसलिए पैसे देने से पहले पशु को खुद देखें।
जर्सी संकर पालना
- गर्मी में बेहतर, पर गर्मी से पूरी तरह सुरक्षित नहीं। जर्सी संकर मैदानी इलाकों के लिए ठीक हैं और दूसरी विदेशी नस्लों के संकरों से बेहतर गर्मी झेलते हैं (TNAU)। फिर भी गर्मियों में छाया, ठंडा पानी और हवादार शेड दें। जो गाय हाँफती है, जिसके मुँह से लार टपकती है और जो कम खाती है, वह गर्मी से परेशान है और उसे ठंडक चाहिए (हीट स्ट्रेस गाइड)।
- गर्मी से दूध घटता है। थंजावुर के मैदानी इलाके में ईचनकोट्टई की शुद्ध जर्सी गायों ने कई सालों में एक ब्यांत में करीब 1,561 किलो दूध दिया, जो पहाड़ों में पाली गई जर्सी गायों से काफ़ी कम है (TANUVAS अध्ययन)।
- दूध के हिसाब से चारा। हर दिन हरा चारा, सूखा चारा और दाना दें, जितना वह दूध देती है उसके हिसाब से: देखें गाय-बैल कैसे पाले जाते हैं।
- सेहत। संकर गायों को देसी गाय-बैल से एक टीका ज़्यादा चाहिए: देखें गाय-बैल को स्वस्थ कैसे रखें।
जर्सी संकर खरीदना
- उसके खून के बारे में पूछें। “जर्सी” बताकर बेची जा रही गाय लगभग हमेशा संकर होती है। तमिलनाडु में संकरों का आगे प्रजनन शुद्ध जर्सी से नहीं, बल्कि जर्सी संकर साँड़ों से होता है (TNLDA)। पूछें कि उसकी माँ कौन थी और किन साँड़ों का इस्तेमाल हुआ।
- उसकी बनावट देखें: बादामी रंग, धँसा हुआ माथा और गठा हुआ शरीर। बड़ी काली-सफ़ेद गाय के HF संकर होने की संभावना ज़्यादा है: देखें HF गाय (होल्स्टीन फ़्रीशियन): संकर, दूध और गर्मी में देखभाल।
- दुहते हुए देखें। सुबह और शाम, पूरा दूध हाथ से दुहते हुए देखें, और दूध खुद नापें। उसके ब्याने और गर्भाधान की तारीखें पूछें।
- विज्ञापन में नस्ल विक्रेता की बताई हुई होती है। कट्टुतरै उसकी जाँच नहीं करता। उम्र, ब्रुसेलोसिस की जाँच और कान के टैग के लिए देखें गाय या बैल खरीदना।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
जर्सी संकर गाय कितना दूध देती है?
तमिलनाडु के किसानों के झुंडों की 75,627 जर्सी संकर गायों पर TANUVAS के अध्ययन में एक ब्यांत में औसतन करीब 2,480 किलो (करीब 2,410 लीटर) (TANUVAS अध्ययन)। चारा-दाना और देखभाल से फ़र्क पड़ता है, इसलिए पैसे देने से पहले उसे दुहते हुए देखें।
जर्सी संकर खरीदूँ या HF संकर?
गर्म मैदानी इलाकों के लिए आम तौर पर जर्सी संकर: यह गर्मी और गर्म इलाकों की बीमारियाँ बेहतर झेलती है। HF संकर ज़्यादा दूध देती है, पर उसमें फ़ैट कम होता है, और वह ठंडे पहाड़ी इलाकों के लिए ठीक है (TNAU)। तमिलनाडु मैदानों में जर्सी और पहाड़ों में HF का इस्तेमाल करता है (तमिलनाडु की नीति)।
जर्सी के दूध में फ़ैट ज़्यादा क्यों होता है?
यह इस नस्ल का गुण है: शुद्ध जर्सी के दूध में करीब 4.5% फ़ैट होता है, जबकि शुद्ध HF के दूध में करीब 3.45% (TNAU), और जर्सी संकरों के दूध में HF संकरों से ज़्यादा फ़ैट होता है (TNAU)।
आगे पढ़ें
जर्सी की तुलना HF से करें, या रेड सिंधी और साहीवाल जैसी भारतीय दुधारू नस्लों से। देसी गाय या संकर पढ़ें, और बिकाऊ गायें और बिकाऊ बैल देखें।

