कन्नी बकरी तमिलनाडु के सूखे दक्षिणी हिस्से की मध्यम आकार की मांस वाली बकरी है, जिसे उसके काले चेहरे के दोनों तरफ़ ऊपर से नीचे जाती एक-एक सफ़ेद धारी से आसानी से पहचाना जा सकता है। यह राज्य की तीन पंजीकृत बकरी नस्लों में से एक है, और इसका घर विरुधुनगर, थूथुकुडी और तेनकासी जिले हैं। इस पेज पर जानें कि असली कन्नी कैसे पहचानें, यह क्या देती है, और खरीदने से पहले क्या जाँचें।
इसे कैसे पहचानें
- रंग: काला, और चेहरे के दोनों तरफ़ सींग की जड़ से मुँह के कोने तक एक-एक सफ़ेद धारी। पेट और पैरों का अंदरूनी हिस्सा सफ़ेद होता है, कानों के किनारों पर सफ़ेद रेखा होती है, और ज़्यादातर बकरियों की गर्दन के दोनों तरफ़ सफ़ेद धब्बा या रेखा होती है (ICAR-NBAGR)।
- रंग के दो प्रकार: सफ़ेद निशानों वाली बकरियों को किसान पाल कन्नी कहते हैं, और जिनके निशान सफ़ेद की जगह लाल-भूरे होते हैं, उन्हें चेन कन्नी (TNAU)।
- सिर और कान: सीधा चेहरा, मध्यम से चौड़ा माथा, और पत्ते जैसे कान, 16 सेमी से ज़्यादा लंबे, जो आधे झुके रहते हैं।
- सींग: दो, ज़्यादातर पीछे और बाहर की ओर; बकरों में मध्यम आकार के और बकरियों में छोटे।
- दाढ़ी: करीब आधे बकरों (55%) और कुछ बकरियों (15%) के दाढ़ी होती है।
- आकार और वज़न: ऊँची बकरी। वयस्क बकरे का औसत वज़न करीब 34 किलो और बकरी का करीब 28 किलो होता है (ICAR-NBAGR)।
यह किस काम आती है
- मांस। NBAGR कन्नी बकरी को मांस वाली नस्ल मानता है (ICAR-NBAGR), और TNAU के अनुसार तमिलनाडु की बकरी नस्लें मुख्य रूप से मांस और खाल के लिए पाली जाती हैं (TNAU)।
- बढ़त। मेमनों का वज़न जन्म के समय करीब 2 किलो, 6 महीने पर करीब 12 किलो और 1 साल पर 21–22 किलो होता है।
- मेमने। हर ब्यांत में औसतन करीब 1.9 मेमने। नस्ल सर्वेक्षण में बकरियों का पहला मेल करीब 9 महीने की उम्र में हुआ, पहले मेमने करीब 14 महीने पर हुए, उसके बाद वे करीब हर 7 महीने में फिर ब्याईं, और एक बकरी के जीवन में 10–12 ब्यांत हुए (ICAR-NBAGR)।
- दूध। कम: ब्यांत की शुरुआत में रोज़ करीब 0.7 लीटर, जो तीसरे महीने तक घटकर करीब 0.4 लीटर रह जाता है — मेमनों के लिए काफ़ी, बेचने के लिए नहीं।
यह मुख्य रूप से कहाँ मिलती है
NBAGR का नस्ल विवरण इसका छोटा-सा मूल इलाका बताता है: विरुधुनगर जिले के सात्तूर और शिवकाशी तालुका, थूथुकुडी जिले के कोविलपट्टी और विलात्तिकुलम तालुका, और शंकरनकोविल तालुका, जो नस्ल का विवरण लिखे जाते समय तिरुनेलवेली जिले में था और अब तेनकासी जिले में है (ICAR-NBAGR)। NBAGR ने कन्नी बकरी को तमिलनाडु की नस्ल के रूप में पंजीकृत किया है (नस्ल रजिस्टर)। किसान इसे इस इलाके से काफ़ी बाहर तक पालते हैं: सरकार के 2013 के नस्ल सर्वेक्षण में करीब 7 लाख बकरियाँ कन्नी बकरी के रूप में दर्ज हुईं (NBAGR डेटाबेस)।
कन्नी बकरी चाहिए?
कन्नी बकरियाँ जिन जिलों से आती हैं, वहाँ के बकरी के विज्ञापन देखें, या अपने पास ढूँढने के लिए कट्टुतरै ऐप में “कन्नी” खोजें। नस्ल विक्रेता बताता है और कट्टुतरै उसकी जाँच नहीं करता, इसलिए पैसे देने से पहले पशु को खुद देखें।
1 नवंबर 2026 को इसके मूल जिलों में बकरी और भेड़ के विज्ञापन:
पालने के सुझाव
- दिन में चराई, रात में बाड़ा। मूल इलाके में कन्नी बकरियाँ झुंड में चरने जाती हैं और सिर्फ़ रात में घर के पास खुले बाड़ों या शेड में बंद की जाती हैं। ये पेड़ों से काटी गई टहनियाँ और पत्तियाँ, झाड़ियाँ, कटाई के बाद बची फ़सल और खेतों की मेड़ों पर उगी खरपतवार खाकर पलती हैं (TANUVAS अध्ययन)। झुंड आम तौर पर चरने के लिए रोज़ 5–10 किमी चलते हैं (NBAGR डेटाबेस)।
- कमी के महीनों की योजना बनाएं। NBAGR के रिकॉर्ड में वयस्क बकरियों के लिए चराई के साथ चारा और दाना भी लिखा है (NBAGR डेटाबेस)। सूखे मौसम के लिए हरे और सूखे चारे की योजना बनाएं — पढ़ें: बकरी का चारा-दाना: हरा-सूखा चारा, दाना मिश्रण और पानी।
- मेमनों की देखभाल करें। TANUVAS के अध्ययन में करीब चार में से एक मेमना मर गया, और ज़्यादातर किसान टीका तभी लगवाते थे जब कोई बीमारी फैल चुकी होती थी (TANUVAS अध्ययन)। इसके बजाय मेमनों को जल्दी खीस पिलाएं, उन्हें सूखा रखें और समय पर टीके लगवाएं — पढ़ें: बकरी के मेमनों की देखभाल: खीस, क्रीप फ़ीड और दूध छुड़ाना, और टीकाकरण तालिका देखें।
- मेल पर नियंत्रण रखें। उसी अध्ययन में बकरे साल भर झुंड के साथ रहते थे। हर 2–3 साल में बकरा बदल दें, ताकि वह अपनी ही बेटियों से मेल न करे: देखें नज़दीकी रिश्ते में प्रजनन से बचें।
खरीदने के सुझाव
- पहले चेहरा देखें। असली कन्नी बकरी काली होती है, चेहरे के दोनों तरफ़ सफ़ेद (या लाल-भूरी) धारी, सफ़ेद पेट और पैरों के सफ़ेद अंदरूनी हिस्से के साथ। बिना धारियों वाली काली बकरी कन्नी नहीं है, और पीठ या बगल पर सफ़ेद धब्बे संकर होने का इशारा करते हैं।
- इसे कोडी बकरी समझने की भूल न करें। उसी इलाके की कोडी बकरी सफ़ेद होती है, जिस पर काले या लाल-भूरे छींटे होते हैं, और वह बहुत ऊँची होती है, लंबी गर्दन और लंबे शरीर वाली (TNAU)। पढ़ें: कोडी बकरी: नस्ल, वज़न और यह कहाँ मिलती है।
- संकर बकरियाँ आम हैं, इसलिए कन्नी कहकर बेची जा रही बकरी संकर हो सकती है। विज्ञापन में नस्ल का नाम विक्रेता का बताया हुआ होता है, और कट्टुतरै उसकी जाँच नहीं करता। माँ और झुंड को देखें, पूछें कि माता-पिता कहाँ से आए, और ऊपर बताए निशान खुद जाँचें।
- पैसे देने से पहले सेहत और उम्र जाँचें, इसके लिए दाँतों की तालिका और इस गाइड की जाँच-सूची देखें: बकरी सुरक्षित कैसे खरीदें: सेहत, उम्र और ठगी से बचाव।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या नए बकरी पालक के लिए कन्नी बकरी ठीक है?
हो सकती है, अगर आप इसके मूल जिलों में या उनके पास रहते हैं, झुंड के लिए चराई की जगह है, और आपके इलाके के खरीदार इसे माँगते हैं। अपने मूल इलाके में पाली जाने वाली नस्लें आम तौर पर दूर से लाई गई नस्लों से बेहतर रहती हैं: देखें अपने इलाके के हिसाब से नस्ल चुनें।
वयस्क कन्नी बकरी का वज़न कितना होता है?
औसतन बकरे का करीब 34 किलो और बकरी का 28 किलो, और 1 साल की उम्र में 21–22 किलो (ICAR-NBAGR)। आपकी अपनी बकरियों का वज़न चारे-दाने और देखभाल के हिसाब से अलग हो सकता है।
पाल कन्नी और चेन कन्नी में क्या फ़र्क है?
सिर्फ़ निशानों के रंग का: पाल कन्नी पर सफ़ेद, चेन कन्नी पर लाल-भूरे (TNAU)। दोनों कन्नी बकरियाँ ही हैं; NBAGR इन्हें इस नस्ल की दो किस्मों के रूप में दर्ज करता है।
क्या कन्नी बकरियों का दूध निकाला जा सकता है?
ये कम दूध देती हैं — शुरू में रोज़ करीब 0.7 लीटर — और वह मेमनों के लिए ज़रूरी है। कन्नी बकरियाँ मांस के लिए पालें; अगर आपके लिए दूध ज़रूरी है, तो देखें अपने मकसद से शुरू करें।
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कन्नी की तुलना तमिलनाडु की दूसरी बकरी नस्लों — कोडी बकरी और सलेम ब्लैक — से करें, या देखें बकरी और भेड़ की सभी नस्लें। अपने पास कन्नी बकरियाँ ढूँढने के लिए बिकाऊ बकरियाँ देखें।

