बंडूर दक्षिणी कर्नाटक की मांड्या भेड़ का किसानों में चलने वाला नाम है: यह छोटी, गठीली, सफ़ेद भेड़ है, जिसका चेहरा हल्का भूरा होता है और जिसे मांस के लिए पाला जाता है। ICAR-NBAGR ने इस नस्ल को मांड्या नाम से पंजीकृत किया है (ICAR-NBAGR), और इसके दूसरे नाम बंडूर और बन्नूर बताए हैं (ICAR-NBAGR)।
इसे कैसे पहचानें
- रंग: शरीर सफ़ेद और चेहरा हल्का भूरा। भूरा रंग अक्सर गर्दन पर नीचे तक आता है, और कुछ भेड़ें पूरी सफ़ेद होती हैं (ICAR-NBAGR)।
- सींग नहीं: मेढ़े और भेड़ें, दोनों बिना सींग के होते हैं; बहुत कम मेढ़ों में छोटे सींग या सींगों के ठूँठ दिखते हैं (ICAR-NBAGR)।
- बनावट: छोटा, गठीला शरीर। पीछे से देखने पर पिछला हिस्सा उल्टे U जैसा दिखता है (ICAR-NBAGR)।
- सिर: थोड़ी उभरी हुई (रोमन) नाक, और मध्यम से लंबे, पत्ते जैसे लटकते कान (करीब 13 सेमी); कई भेड़ों के गले में लटकन होती है (ICAR-NBAGR)।
- ऊन: बहुत खुरदरी और बालों जैसी (ICAR-NBAGR)।
- वज़न: मेढ़े का वज़न करीब 37 किलो और भेड़ का करीब 27 किलो होता है (ICAR-NBAGR, NBAGR–KVAFSU अध्ययन); जन्म के समय मेमने का वज़न करीब 2.2 किलो होता है (ICAR-NBAGR)।
यह किस काम आती है
- मांस। NBAGR ने इसका उपयोग मांस बताया है और इसके मांस की गुणवत्ता का खास तौर पर ज़िक्र किया है (ICAR-NBAGR); FAO के एक सर्वेक्षण में इसकी मांसल बनावट की तारीफ़ की गई थी (FAO)।
- ऊन कम: इसकी खुरदरी ऊन साल में सिर्फ़ 0.40–0.45 किलो होती है (ICAR-NBAGR)।
- एक बार में एक मेमना, और देर से। NBAGR के रिकॉर्ड के अनुसार हर ब्यांत में 1 मेमना होता है, पहला करीब 32 महीने की उम्र में, और दो ब्यांतों के बीच 14–15 महीने का अंतर रहता है (ICAR-NBAGR)।
यह मुख्य रूप से कहाँ मिलती है
NBAGR के नस्ल रिकॉर्ड के अनुसार इसका मूल इलाका मांड्या जिला और उससे लगे मैसूरु और बेंगलुरु ग्रामीण जिलों के हिस्से हैं (ICAR-NBAGR)। पुराने बेंगलुरु ग्रामीण जिले के जो तालुका मांड्या से लगते हैं, वे अब बेंगलुरु दक्षिण जिले में हैं, जिसका पहले का नाम रामनगर था।
इतने नाम क्यों? मांड्या जिले का नाम है। बंडूर और बन्नूर वे गाँव हैं जहाँ माना जाता है कि यह नस्ल शुरू हुई (ICAR-NBAGR); FAO का एक सर्वेक्षण भी बंडूर को ही इसका मूल गाँव बताता है (FAO)।
इसकी संख्या घट रही है: 2003 में यह करीब 3.4 लाख थी, जो 2013 में करीब 2.4 लाख रह गई (ICAR-NBAGR)। मांड्या जिले में नागमंगला के पास KVAFSU का पशुधन अनुसंधान एवं सूचना केंद्र (भेड़) शुद्ध नस्ल को बचाने का काम करता है (KVAFSU)।
बंडूर भेड़ चाहिए?
अपने पास बिकाऊ बंडूर भेड़ें ढूँढने के लिए कट्टुतरै ऐप में “बंडूर” खोजें (कट्टुतरै पर भेड़ें ‘बकरी’ श्रेणी में हैं)। नस्ल विक्रेता बताता है और कट्टुतरै उसकी जाँच नहीं करता, इसलिए पैसे देने से पहले पशु को खुद देखें।
पालने के सुझाव
- चराई, और घर पर थोड़ा खिलाना। झुंड आधी चराई, आधा बाड़े में भी पाले जाते हैं, और खुली चराई पर भी (ICAR-NBAGR); देखें बकरी का चारा-दाना: हरा-सूखा चारा, दाना मिश्रण और पानी।
- गर्मी। कुछ झुंड मार्च से मई तक कर्नाटक के भीतर ही एक जगह से दूसरी जगह जाते हैं (ICAR-NBAGR)। अगर आपकी भेड़ें घर पर ही रहती हैं, तो सूखा चारा जमा करके रखें या अपना चारा खुद उगाएं।
- जवान भेड़ों को अच्छा खिलाएं। NBAGR के रिकॉर्ड में भेड़ों का पहला मेमना करीब 32 महीने की उम्र में जाकर हुआ (ICAR-NBAGR); अच्छा खिलाना और वज़न देखकर गाभिन कराना, दोनों इस उम्र को पहले ला सकते हैं।
- रात का आसरा: देखें बकरी का बाड़ा (शेड): हर बकरी की जगह, फ़र्श और छत।
- सेहत: भेड़ों को भी बकरियों जैसी ही रोज़ की जाँच, टीकाकरण और कृमिनाशन (पेट के कीड़ों की दवा देना) चाहिए। बकरी की सेहत: टीकाकरण कैलेंडर और कृमिनाशन में बताई गई बातें अपनाएं, और अपने पशु चिकित्सक से पूछें कि आपके इलाके में भेड़ों को कौन-से टीके चाहिए।
खरीदने के सुझाव
- नस्ल की पहचान जाँचें: सफ़ेद शरीर, हल्का भूरा चेहरा, सींग नहीं, उल्टे U जैसे पिछले हिस्से वाला गठीला शरीर, पत्ते जैसे लटकते कान, और अक्सर गले में लटकन (ICAR-NBAGR)। शरीर पर गहरे रंग के धब्बे, सींग, या लंबी टाँगों वाला ऊँचा शरीर इस नस्ल से मेल नहीं खाते।
- मेढ़े के अंडकोष जाँचें। FAO के सर्वेक्षण में दर्ज है कि इस नस्ल में ऐसे मेढ़े आम थे जिनके अंडकोष नीचे नहीं उतरे थे (FAO), इसलिए प्रजनन वाले मेढ़े के दो अंडकोष होने चाहिए, दोनों बराबर आकार के; देखें सेहत की जाँच।
- विज्ञापन में नस्ल का नाम विक्रेता का बताया हुआ होता है। कट्टुतरै उसकी जाँच नहीं करता, इसलिए भेड़ को खुद देखें और उसका झुंड दिखाने को कहें। किसी जाने-माने शुद्ध झुंड का मेढ़ा चाहिए, तो नागमंगला के पास KVAFSU के भेड़ केंद्र में पूछें, जो चुनिंदा मांड्या भेड़ों का एक झुंड रखता है और ICAR की एक परियोजना के तहत किसानों को 393 प्रजनन वाले मेढ़े दे चुका है (KVAFSU), या अपने नज़दीकी पशु चिकित्सालय में पूछें।
- उम्र: बकरियों की तरह आगे के बड़े दाँत गिनें (दाँतों की तालिका), पर उससे निकली उम्र को मोटा अंदाज़ा ही मानें, और बकरी सुरक्षित कैसे खरीदें: सेहत, उम्र और ठगी से बचाव में बताई गई बातें अपनाएं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या बंडूर, बन्नूर और मांड्या एक ही भेड़ हैं?
हाँ। मांड्या पंजीकृत नाम है; बंडूर और बन्नूर इसी नस्ल के दूसरे नाम हैं (ICAR-NBAGR)।
बंडूर भेड़ का वज़न कितना होता है?
मेढ़े का वज़न करीब 37 किलो और भेड़ का करीब 27 किलो होता है।
क्या बंडूर भेड़ से ऊन मिलती है?
बहुत कम: इसकी खुरदरी, बालों जैसी ऊन साल में सिर्फ़ 0.40–0.45 किलो ही निकलती है। इसे मांस के लिए पाला जाता है।
क्या बंडूर नए भेड़ पालक के लिए ठीक है?
यह उस किसान के लिए ठीक है जिसके पास चराई की जगह है और जिसे छोटी, मांसल भेड़ चाहिए। भेड़ें देर से जवान होती हैं और एक बार में एक ही मेमना देती हैं, इसलिए झुंड धीरे-धीरे बढ़ता है; थोड़ी भेड़ों से शुरुआत करें।
आगे पढ़ें
उत्तर कर्नाटक की दक्कनी भेड़ से, या तमिलनाडु की मेचेरी और मद्रास रेड से इसकी तुलना करें। यह भी पढ़ें: बकरी पालन में प्रजनन: गर्मी के लक्षण, मेल और ब्याना। सभी नस्लों की गाइड देखें, और बिकाऊ बकरियाँ और भेड़ें देखें।
