जमुनापारी उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के बीहड़ों की एक बड़ी बकरी है, जो दूध और मांस दोनों के लिए पाली जाती है: ज़्यादातर सफ़ेद, बहुत उभरी हुई नाक और बहुत लंबे, लटकते कानों वाली। NBAGR इसे भारत की सबसे ऊँची बकरी नस्ल बताता है (NBAGR नस्ल विवरण)। शुद्ध नस्ल के पशु कम मिलते हैं, और यह नस्ल सूखे, झाड़ियों वाले इलाके से आती है, इसलिए गर्म, नम दक्षिण में इसे अच्छा चारा-दाना और ज़्यादा देखभाल चाहिए।
जमुनापारी बकरी कैसे पहचानें
- कद-काठी: बहुत ऊँची, लंबी टाँगों वाली और बड़ी।
- रंग: ज़्यादातर सफ़ेद, अक्सर सिर और गर्दन पर छोटे हल्के भूरे धब्बे (NBAGR नस्ल विवरण)।
- सिर: बहुत उभरी हुई (“रोमन”) नाक, जिस पर बालों का गुच्छा होता है, और लंबे, चपटे, लटकते कान — करीब 30 सेमी (NBAGR नस्ल रिकॉर्ड)।
- सींग: छोटे और चपटे, पीछे और ऊपर की ओर। दाढ़ी आम है।
- वज़न: वयस्क बकरे का वज़न करीब 45 किलो और बकरी का 38 किलो होता है। मेमने जन्म के समय करीब 4 किलो और 1 साल की उम्र में करीब 30 किलो के होते हैं (NBAGR नस्ल विवरण)।
जमुनापारी बकरियाँ किस लिए पाली जाती हैं
- दूध और मांस। NBAGR के रिकॉर्ड में रोज़ करीब 1.75 किलो दूध, और करीब 8 महीने के एक ब्यांत में करीब 200 किलो दूध दर्ज है (NBAGR नस्ल विवरण)। दूध में बहुत फ़र्क होता है: 2024 में ICAR-CIRG के फ़ार्म पर बकरियों ने पहले 3 महीनों में औसतन करीब 90 लीटर दूध दिया, और 23 बकरियों ने एक ब्यांत में 250 लीटर से ज़्यादा दूध दिया (ICAR-CIRG)।
- जुड़वाँ। करीब 10 में से 4 ब्यांतों में जुड़वाँ मेमने होते हैं (NBAGR नस्ल विवरण)।
- देर से तैयार होती है। बकरियाँ आम तौर पर करीब 2 साल की उम्र में पहली बार ब्याती हैं (NBAGR नस्ल विवरण)।
- नस्ल सुधार। जमुनापारी बकरों का इस्तेमाल लंबे समय से भारत और विदेशों में स्थानीय बकरियों को सुधारने के लिए होता रहा है (ICAR-CIRG)।
जमुनापारी बकरियाँ कहाँ से आती हैं
इस नस्ल का नाम यमुना (जमुना) नदी के नाम पर पड़ा है, और NBAGR के रजिस्टर में यह उत्तर प्रदेश की नस्ल के रूप में दर्ज है (NBAGR रजिस्टर)। इसका घर इटावा जिले के चकरनगर ब्लॉक और पड़ोसी औरैया जिले का बीहड़ वाला इलाका है — झाड़ियों और पेड़ों से भरी अर्ध-शुष्क ज़मीन (ICAR-CIRG)। NBAGR के अनुमान के अनुसार इस मूल इलाके में 5,000 से भी कम शुद्ध पशु थे (NBAGR नस्ल विवरण), और ICAR-CIRG जमुनापारी को उन नस्लों में गिनता है जिनकी संख्या घटी है (ICAR-CIRG)। मथुरा के पास मखदूम में ICAR-CIRG 1985 से जमुनापारी का प्रजनन कार्यक्रम चला रहा है, मूल इलाके से खरीदी गई बकरियाँ उसमें जोड़ता है, और किसानों को पशु उपलब्ध कराता है (ICAR-CIRG)। तमिलनाडु में TANUVAS चेन्नई में अपने अनुसंधान फ़ार्म पर जिन नस्लों को रखता है, उनमें जमुनापारी भी है (TANUVAS)।
जमुनापारी बकरी चाहिए?
कट्टुतरै पूरे भारत में चलता है। जमुनापारी बकरियों के लिए ऐप में “जमुनापारी” खोजें, या अपने पास की बिकाऊ बकरियाँ देखें। नस्ल विक्रेता बताता है और कट्टुतरै उसकी जाँच नहीं करता, इसलिए पैसे देने से पहले पशु को खुद देखें।
जमुनापारी बकरियों का पालन
- जलवायु। ICAR-CIRG जमुनापारी को भारत के उत्तर-पश्चिम की नस्लों में गिनता है (ICAR-CIRG), और चेतावनी देता है कि ऐसी नस्लें गर्म, नम दक्षिण और पूर्व में कम उत्पादन देती हैं और उनमें मौतें ज़्यादा होती हैं (ICAR-CIRG)। ICAR-CIRG के अनुसार जमुनापारी मौसम के बदलाव के प्रति कुछ ज़्यादा संवेदनशील भी है (ICAR-CIRG)।
- चराई या बाड़े में चारा-दाना। अपने इलाके में ये बकरियाँ पेड़ों से काटी गई टहनियाँ और पत्तियाँ, बबूल की फलियाँ और फ़सल कटने के बाद खेत में बचे ठूँठ खाती हैं, और दूध देने वाली बकरियों को अनाज मिलता है; NBAGR के अनुसार यह नस्ल बाड़े में चारा-दाना देने के बजाय चराई के लिए ज़्यादा ठीक है (NBAGR नस्ल रिकॉर्ड)। फिर भी ICAR-CIRG के एक परीक्षण में बाड़े में अच्छा राशन पाने वाले मेमने कुछ समय चरने वाले मेमनों से तेज़ बढ़े — 11 महीने की उम्र में नर मेमनों का वज़न करीब 32 किलो था, जबकि कुछ समय चरने वाले नर मेमनों का करीब 25 किलो (ICAR-CIRG)। बाड़े में चारा-दाना तभी कारगर है जब भरपूर अच्छा चारा और दाना हो; देखें खिलाने के तरीके।
- बड़ी बकरी को ज़्यादा चाहिए। छोटी स्थानीय नस्ल की तुलना में ज़्यादा चारे-दाने और फ़र्श पर ज़्यादा जगह की योजना बनाएं — देखें हर पड़ाव पर खिलाना और हर बकरी के लिए जगह।
- पहला मेल। ICAR-CIRG के अनुसार बकरियाँ 22 किलो से ज़्यादा वज़न और 12 महीने से ज़्यादा उम्र पर पहले मेल के लिए तैयार होती हैं (ICAR-CIRG); देखें पहली बार गाभिन कराना।
जमुनापारी बकरी खरीदना
- यह नाम बहुत चलता है। 2013 के राष्ट्रीय नस्ल सर्वेक्षण में पूरे भारत में करीब 16 लाख बकरियाँ जमुनापारी के रूप में दर्ज हुईं (NBAGR नस्ल रिकॉर्ड) — NBAGR ने मूल इलाके में जितने शुद्ध पशुओं का अनुमान लगाया था, उससे कहीं ज़्यादा। ICAR-CIRG खुद भी पशु देते समय “जमुनापारी नस्ल” और “जमुनापारी टाइप” बकरियों को अलग-अलग गिनता है (ICAR-CIRG)।
- हर निशान जाँचें: बहुत ऊँचा कद, सफ़ेद रंग (सिर और गर्दन पर छोटे हल्के भूरे धब्बे सामान्य हैं), बहुत उभरी हुई नाक, बहुत लंबे चपटे कान और छोटे चपटे सींग। जिस बकरी में ये निशान न हों, उसके शुद्ध नस्ल की होने की संभावना कम है।
- उसकी माँ का दूध निकलवाकर देखें, और पूछें कि माता-पिता कहाँ से आए — मूल इलाके से, ICAR-CIRG से, या रिकॉर्ड रखने वाले किसी पालक से।
- विज्ञापन में नस्ल का नाम विक्रेता का बताया हुआ होता है। कट्टुतरै उसकी जाँच नहीं करता। इस गाइड की मदद से बकरी को खुद जाँचें: बकरी सुरक्षित कैसे खरीदें: सेहत, उम्र और ठगी से बचाव।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या दक्षिण भारत में दूध के लिए जमुनापारी ठीक है?
यह दक्षिण भारत की मांस वाली नस्लों से ज़्यादा दूध दे सकती है, लेकिन सिर्फ़ अच्छे चारे-दाने और देखभाल के साथ, और ICAR-CIRG चेतावनी देता है कि उत्तर-पश्चिम की नस्लें गर्म, नम दक्षिण में कमज़ोर पड़ती हैं (ICAR-CIRG)। खरीदने से पहले बकरी का दूध अपने सामने निकलवाकर देखें।
जमुनापारी का वज़न कितना होता है?
वयस्क बकरे का वज़न करीब 45 किलो और बकरी का करीब 38 किलो होता है (NBAGR नस्ल विवरण)।
शुद्ध जमुनापारी बकरियाँ मिलना मुश्किल क्यों है?
NBAGR के अनुमान के अनुसार मूल इलाके में 5,000 से भी कम शुद्ध पशु थे, और ICAR-CIRG के अनुसार प्रजनन और संरक्षण के कार्यक्रम कमज़ोर रहने से इस नस्ल की संख्या घटी है (ICAR-CIRG)।
क्या अपनी स्थानीय बकरियों के लिए जमुनापारी बकरा इस्तेमाल किया जा सकता है?
जमुनापारी बकरों का इस्तेमाल लंबे समय से बिना तय नस्ल की बकरियों को सुधारने के लिए होता रहा है, खासकर सूखे और अर्ध-शुष्क इलाकों में (ICAR-CIRG)। ICAR-CIRG की सलाह है कि अपने कृषि-जलवायु क्षेत्र के हिसाब से ठीक नस्ल के बकरे इस्तेमाल करें (ICAR-CIRG), इसलिए गर्म, नम दक्षिण में पहले अपने पशु चिकित्सालय से पूछें।
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जमुनापारी की तुलना उत्तर-पश्चिम की एक और नस्ल सिरोही से करें, और विदेशी नस्ल बोअर के बारे में पढ़ें। नस्लों की तुलना के लिए पढ़ें: बकरी की नस्ल कैसे चुनें: दक्षिण भारत की नस्लों की तुलना; फिर बिकाऊ बकरियाँ देखें, और यह गाइड साथ रखें: बकरी सुरक्षित कैसे खरीदें: सेहत, उम्र और ठगी से बचाव।

