बोअर दक्षिण अफ़्रीका में विकसित की गई एक बड़ी मांस वाली बकरी है: सफ़ेद, और सिर व गर्दन लाल-भूरे। भारत में इसका इस्तेमाल ज़्यादातर स्थानीय बकरियों से संकर बकरियाँ तैयार करने के लिए होता है। अच्छे चारे-दाने पर संकर बकरियाँ तेज़ी से बढ़ सकती हैं, लेकिन भारत के अध्ययनों में इनमें मौतें ज़्यादा हुईं और इन्हें ज़्यादा देखभाल की ज़रूरत पड़ी, इसलिए बोअर कम लागत वाली चराई के बजाय अच्छी देखरेख वाले फ़ार्मों के लिए ठीक है (ICAR-CIRG, KVASU समीक्षा)।
बोअर बकरी कैसे पहचानें
- रंग: सफ़ेद शरीर, और सिर व गर्दन का कुछ हिस्सा लाल-भूरा; उन्नत बोअर बकरियों में चेहरे पर ऊपर से नीचे तक एक चौड़ी सफ़ेद पट्टी अच्छी मानी जाती है (FAO)।
- कान: काफ़ी लंबे, चौड़े और लटकते हुए।
- सींग: आम तौर पर नर और मादा, दोनों के सींग होते हैं; बकरों के सींग मज़बूत होते हैं, जो पीछे और बाहर की ओर मुड़ते हैं, और कुछ बकरियाँ बिना सींग की होती हैं।
- शरीर: बड़ा, और बाल छोटे; यह नस्ल तेज़ बढ़त और भरपूर मांसपेशियों के लिए जानी जाती है (FAO, OUAT अध्ययन)।
- वज़न: दक्षिण अफ़्रीका में वयस्क नर का वज़न करीब 120–140 किलो और मादा का करीब 70–90 किलो होता है। FAO के अनुसार दक्षिण अफ़्रीका के बाहर बोअर बकरियाँ आम तौर पर इन आँकड़ों से काफ़ी नीचे रहती हैं (FAO)।
बोअर बकरियाँ किस लिए पाली जाती हैं
- मांस। दक्षिण अफ़्रीका के पूर्वी केप के किसानों ने 1920 के दशक से उन्नत बोअर को मांस के लिए तैयार किया, और इस नस्ल की सोसाइटी (पालकों की संस्था) 1959 में बनी (FAO, बोअर पर समीक्षा)।
- दक्षिण अफ़्रीका में जुड़वाँ। करीब आधे ब्यांतों में जुड़वाँ मेमने होते हैं, और 7% में तीन बच्चे एक साथ (FAO)।
- भारत में संकर। ओडिशा के एक राज्य पशु प्रजनन फ़ार्म पर हुए परीक्षण में, रोज़ 8 घंटे की चराई और दाने के साथ, बोअर संकर मेमनों का वज़न 9 महीने की उम्र में करीब 15 किलो था, जबकि स्थानीय मेमनों का करीब 12.5 किलो (OUAT अध्ययन)।
- ज़्यादा मौतें। उसी परीक्षण में संकर मेमने ज़्यादा मरे: पहले 3 महीनों में 19% नर संकर मेमने मरे, जबकि स्थानीय नर मेमनों में से 11% (OUAT अध्ययन)। केरल में अच्छी देखरेख में बोअर × मालाबारी संकर बकरियाँ बेहतर बढ़ीं, लेकिन वहाँ जिन संकर बकरियों का अध्ययन हुआ, उनमें मालाबारी बकरियों के मुकाबले मौतें भी ज़्यादा हुईं और साँस की दिक्कतें भी (KVASU समीक्षा)।
बोअर बकरियाँ कहाँ से आती हैं
बोअर बकरियाँ दक्षिण अफ़्रीका के पूर्वी केप में, समरसेट ईस्ट के आसपास, वहाँ की स्थानीय बकरियों से विकसित की गईं (बोअर पर समीक्षा, FAO)। तब से यह नस्ल कई देशों में भेजी जा चुकी है (बोअर पर समीक्षा)। भारत में मिशनरियों और स्वयंसेवी संस्थाओं ने आज़ादी से पहले बोअर बकरियाँ मँगवाईं, और बाद में स्थानीय बकरियों को बोअर और दूसरी विदेशी नस्लों से मिलाकर संकर बकरियाँ तैयार कीं (ICAR-CIRG)। सरकारी फ़ार्मों पर बोअर संकर बकरियों को परखा गया है — केरल में मालाबारी बकरियों के साथ (KVASU समीक्षा) और ओडिशा में (OUAT अध्ययन) — और TANUVAS चेन्नई में अपने अनुसंधान फ़ार्म पर जिन नस्लों को रखता है, उनमें बोअर भी है (TANUVAS)। बोअर भारत की पंजीकृत नस्लों में नहीं है, इसलिए यहाँ इसका कोई मूल जिला नहीं है (NBAGR रजिस्टर)।
बोअर बकरी चाहिए?
कट्टुतरै पूरे भारत में चलता है। बोअर बकरियों के लिए ऐप में “बोअर” खोजें, या अपने पास की बिकाऊ बकरियाँ देखें। नस्ल विक्रेता बताता है और कट्टुतरै उसकी जाँच नहीं करता, इसलिए पैसे देने से पहले पशु को खुद देखें।
बोअर और संकर बकरियों का पालन
- हर दिन अच्छा चारा-दाना। संकर बकरियों की तेज़ बढ़त चारे-दाने पर निर्भर है: ओडिशा के मेमनों को चराई के ऊपर से हर दिन दाना मिलता था (OUAT अध्ययन)। इसके बिना वैसे वज़न की उम्मीद न करें। पढ़ें: बकरी का चारा-दाना: हरा-सूखा चारा, दाना मिश्रण और पानी।
- गर्मी और नमी। FAO के अनुसार बोअर सूखे इलाकों में सबसे ठीक रहती है (FAO)। केरल की गर्म, नम जलवायु में मालाबारी बकरियाँ संकर बकरियों से, जिनमें बोअर संकर भी थीं, बेहतर ढल गईं (KVASU समीक्षा)। बाड़ा सूखा और हवादार रखें — देखें छत और हवा।
- मेमनों पर कड़ी नज़र रखें। ओडिशा के परीक्षण में सबसे ज़्यादा मौतें पहले 3 महीनों में हुईं (OUAT अध्ययन)। यह गाइड अपनाएं: बकरी के मेमनों की देखभाल: खीस, क्रीप फ़ीड और दूध छुड़ाना, और टीकाकरण तालिका के हिसाब से टीके लगवाएं।
- अपने राज्य के नियम जाँचें। ICAR-CIRG के 2024 के नीति-पत्र के अनुसार विदेशी नस्लों से बिना योजना के संकर बनाने से — जो महाराष्ट्र, केरल और दक्षिण के दूसरे राज्यों में बिना साफ़ प्रजनन योजना के किया गया — उत्पादन में सुधार सीमित रहा और संकर बकरियों में मौतें ज़्यादा हुईं, और ऐसा संकरण सिर्फ़ अनुसंधान के तौर पर ही होना चाहिए (ICAR-CIRG)। केरल की 2024 की प्रजनन नीति में बिना किसी तय नस्ल की बकरियों के साथ नियंत्रित संकरण के परीक्षणों के लिए बोअर का, और मालाबारी व अट्टपाडी ब्लैक बकरियों के लिए उनकी अपनी नस्ल के बकरों का प्रस्ताव है (KVASU समीक्षा)। अपने पशुपालन विभाग के कार्यालय से पूछें कि आपके राज्य में किस बात की अनुमति है।
बोअर या संकर बकरियाँ खरीदना
- पूछें कि यहाँ “बोअर” का मतलब क्या है। बोअर कहकर बेचा जा रहा पशु शुद्ध बोअर हो सकता है, पहली पीढ़ी का संकर (आधा बोअर) हो सकता है, या ऐसी बकरी जिसमें बोअर का खून बहुत कम हो। पूछें कि कितनी पीढ़ियों में बोअर बकरों का इस्तेमाल हुआ, और माता-पिता को देखें।
- पहचान के निशान देखें: सफ़ेद शरीर, लाल-भूरा सिर, चौड़े लटकते कान और बड़ा, मांसल शरीर। सिर्फ़ रंग से यह साबित नहीं होता कि उसमें बोअर का खून है।
- पूछें कि उसे कैसे पाला गया। बाड़े में दाने पर पली संकर बकरी चराई पर कमज़ोर पड़ सकती है; ऐसे फ़ार्म से खरीदें जो उसी तरह खिलाता हो जैसे आप खिलाएंगे (देखें पूछने लायक सवाल)।
- वादे नहीं, रिकॉर्ड माँगें: विक्रेता के अपने झुंड के रिकॉर्ड, कि किस उम्र में कितना वज़न था। बढ़त चारे-दाने और देखभाल पर निर्भर है, इसलिए तेज़ बढ़त के वादे पर कभी ज़्यादा पैसे न दें।
- विज्ञापन में नस्ल का नाम विक्रेता का बताया हुआ होता है। कट्टुतरै उसकी जाँच नहीं करता। इस गाइड की मदद से बकरी को खुद जाँचें: बकरी सुरक्षित कैसे खरीदें: सेहत, उम्र और ठगी से बचाव।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या नए बकरी पालक के लिए बोअर ठीक है?
पहले कदम के तौर पर आम तौर पर नहीं। बोअर संकर बकरियाँ तेज़ी से बढ़ सकती हैं, लेकिन उन्हें बेहतर चारा-दाना, बाड़ा और देखभाल चाहिए, और भारत के अध्ययनों में इनमें स्थानीय बकरियों से ज़्यादा मौतें हुईं। पहले किसी स्थानीय नस्ल के साथ सीखें — पढ़ें: बकरी की नस्ल कैसे चुनें: दक्षिण भारत की नस्लों की तुलना।
क्या अपनी देसी बकरियों का मेल बोअर बकरे से कराना चाहिए?
पहले अपने पशु चिकित्सालय से पूछें। ICAR-CIRG विदेशी नस्लों से संकरण की सलाह सिर्फ़ योजना बनाकर किए जाने वाले अनुसंधान के तौर पर देता है (ICAR-CIRG), और केरल अपनी देसी नस्लों को उन्हीं की नस्ल के बकरों से सुधारता है (KVASU समीक्षा)। अगर आप फिर भी आगे बढ़ें, तो संकर बकरी का मेल कभी उसके अपने पिता से न कराएं — देखें नज़दीकी रिश्ते में प्रजनन से बचें।
क्या बोअर बकरियाँ गर्म, नम इलाकों में रह सकती हैं?
रह सकती हैं, लेकिन उन्हें बेहतर देखरेख चाहिए: केरल की गर्म, नम जलवायु में संकर बकरियों में, जिनमें बोअर संकर भी थीं, स्थानीय मालाबारी बकरियों से ज़्यादा मौतें और साँस की दिक्कतें हुईं (KVASU समीक्षा)।
आगे पढ़ें
बोअर की तुलना भारत की अपनी नस्लों से करें — जैसे कन्नी बकरी, सलेम ब्लैक और टेलीचेरी (मालाबारी) — और साथ ही शुद्ध नस्लें और संकर और जमुनापारी के बारे में पढ़ें। जब आप तैयार हों, तो बिकाऊ बकरियाँ देखें, और यह गाइड साथ रखें: बकरी सुरक्षित कैसे खरीदें: सेहत, उम्र और ठगी से बचाव।

