बिदरी बकरी: वज़न, उपयोग और कर्नाटक में पालन

ಬಿದರಿ

बिदरी, बीदर और कलबुर्गी की पंजीकृत काली मांस वाली बकरी: पहचान, बड़े होने पर वज़न, जुड़वाँ मेमने, चराई पर देखभाल और खरीदने से पहले क्या जाँचें।

अपडेट: 23 अक्टूबर 2026जाँचा गया: 23 अक्टूबर 2026कट्टुतरै टीम ने लिखा

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मूल इलाका
कर्नाटकBidar, Kalaburagi
बड़े होने पर वज़न
बकरा 33–37 किलोबकरी 30–32 किलो
हर ब्यांत में बच्चे
करीब 1.7
किस लिए पालते हैं
मांस
रंग
काला, कुछ में सफ़ेद धब्बे
नस्ल पंजीकरण
पंजीकृत नस्ल (ICAR-NBAGR)
इस पेज पर
  1. बिदरी बकरी कैसे पहचानें
  2. बिदरी बकरियाँ किस लिए पाली जाती हैं
  3. बिदरी बकरियाँ कहाँ से आती हैं
  4. बिदरी बकरियों का पालन
  5. बिदरी बकरी खरीदना
  6. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
  7. आगे पढ़ें

बिदरी उत्तर कर्नाटक के बीदर और कलबुर्गी जिलों की मध्यम आकार की काली बकरी है, जो मांस के लिए पाली जाती है। यह ICAR-NBAGR में पंजीकृत कर्नाटक की दो बकरी नस्लों में से एक है, मुख्य रूप से चराई पर पलती है, और पहली बार ब्याने के बाद अक्सर जुड़वाँ मेमने देती है (NBAGR रजिस्टर, NBAGR नस्ल रिकॉर्ड)।

बिदरी बकरी कैसे पहचानें

  • रंग: काला। कुछ बकरियों के कानों, माथे, गर्दन या घुटनों पर सफ़ेद धब्बे होते हैं; थूथन, पलकें और खुर काले होते हैं (NBAGR नस्ल रिकॉर्ड)। बीदर जिले के 20 झुंडों के एक सर्वेक्षण में करीब 73% बकरियाँ पूरी काली थीं, 18% काली थीं जिन पर सफ़ेद चकत्ते थे, और 9% काली थीं जिनमें भूरा रंग भी था (KVAFSU अध्ययन)।
  • सिर और कान: सीधा माथा और नीचे लटकते लंबे कान।
  • सींग: ज़्यादातर बकरियों के सींग पीछे और बाहर की ओर मुड़े होते हैं; सर्वेक्षण में करीब 9% बकरियाँ बिना सींग की थीं (KVAFSU अध्ययन)।
  • आकार: मध्यम; कंधे तक ऊँचाई करीब 75–79 सेमी। दो सर्वेक्षणों में वयस्क बकरों का औसत वज़न करीब 33–37 किलो और बकरियों का 30–32 किलो रहा (NBAGR नस्ल रिकॉर्ड, KVAFSU अध्ययन)।
  • अयन: छोटा और बालों वाला — इस नस्ल का दूध नहीं निकाला जाता।

बिदरी बकरियाँ किस लिए पाली जाती हैं

  • मांस। बिदरी सिर्फ़ मांस के लिए पाली जाती है; इसके मूल इलाके के किसान इसका दूध नहीं निकालते (NBAGR नस्ल रिकॉर्ड)। कई नर मेमने करीब 6 महीने की उम्र में बेच दिए जाते हैं (KVAFSU अध्ययन)।
  • ज़्यादा मेमने। पहली बार ब्याने पर बकरी आम तौर पर एक ही मेमना देती है; उसके बाद जुड़वाँ आम हैं। NBAGR के रिकॉर्ड में हर ब्यांत में औसतन करीब 1.7 मेमने दर्ज हैं, और KVAFSU के सर्वेक्षण में 40% बकरियों ने जुड़वाँ और 5% ने तीन बच्चे एक साथ दिए (NBAGR नस्ल रिकॉर्ड, KVAFSU अध्ययन)।
  • जल्दी और नियमित प्रजनन। बकरियाँ पहली बार करीब 16–18 महीने की उम्र में ब्याती हैं, और फिर करीब हर 8–9 महीने में (NBAGR नस्ल रिकॉर्ड, KVAFSU अध्ययन)। NBAGR के सर्वेक्षण में पाया गया कि एक बकरी अपने जीवन में 6 से 11 बार ब्याती है (NBAGR अध्ययन)।
  • मज़बूती। NBAGR के अनुसार बिदरी अपने इलाके के हालात में अच्छी तरह ढली हुई है और मुख्य रूप से चराई पर पाली जाती है (NBAGR नस्ल रिकॉर्ड)।

बिदरी बकरियाँ कहाँ से आती हैं

बिदरी का नाम बीदर के नाम पर पड़ा है। इसका मूल इलाका बीदर पठार पर है: बीदर जिला और उससे लगे कलबुर्गी (गुलबर्गा) जिले के हिस्से, जहाँ कर्नाटक की सीमा तेलंगाना के निज़ामाबाद और मेडक जिलों और महाराष्ट्र के लातूर, उस्मानाबाद और नांदेड़ जिलों से मिलती है (NBAGR अध्ययन, KVAFSU अध्ययन)। यह इलाका अर्ध-शुष्क है, जहाँ गर्मियों में बहुत तेज़ गर्मी पड़ती है और साल में करीब 827 मिमी बारिश होती है। ये बकरियाँ पहले बीदर और कलबुर्गी की पहाड़ियों और जंगलों में पाली जाती थीं, और बाद में पूरे इलाके के गाँवों में फैल गईं (NBAGR अध्ययन)। NBAGR के अनुमान के अनुसार 2016 में करीब 1,10,000 बिदरी बकरियाँ थीं (NBAGR नस्ल रिकॉर्ड)।

मूल जिले: Bidar, KalaburagiMap data © OpenStreetMap contributors

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बिदरी बकरियों का पालन

  • चराई वाली नस्ल। मूल इलाके में झुंड करीब सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक चरते हैं, परती ज़मीन, चरागाह और जंगल में 5–6 किमी चलते हैं, और रात सादे, खुले बाड़ों में बिताते हैं (KVAFSU अध्ययन)। बकरों और दूध दे रही बकरियों को कभी-कभी थोड़ा अनाज या दाना मिलता है।
  • जलवायु। बिदरी गर्म, सूखे पठार की आदी है। इस पर हुए अध्ययन सिर्फ़ इसके मूल इलाके के हैं, इसलिए नम, समुद्र-तटीय जिलों में यह कैसी रहती है, इसकी जानकारी कम है। ICAR-CIRG की सलाह है कि दूसरे इलाके से नस्ल लाने के बजाय, अपने कृषि-जलवायु क्षेत्र के हिसाब से ठीक नस्ल के अच्छे बकरों से अपनी स्थानीय बकरियों को सुधारें (ICAR-CIRG)।
  • बाड़े में चारा-दाना। सर्वेक्षणों में बिदरी को चराई पर ही देखा गया है, बाड़े में खिलाने वाले फ़ार्मों में नहीं। अगर आपके पास चराई की जगह कम है, तो कुछ घंटे की चराई और साथ में काटकर लाए चारे की योजना बनाएं — देखें खिलाने के तरीके।
  • सेहत। KVAFSU के सर्वेक्षण में किसान राज्य के पशु चिकित्सा विभाग की मदद से करीब हर 3 महीने में अपनी बकरियों का कृमिनाशन (पेट के कीड़ों की दवा देना) करते थे, और उन्हें पीपीआर और आंत विषाक्तता (एंटरोटॉक्सीमिया) के टीकों की जानकारी थी (KVAFSU अध्ययन)। अपनी बकरियों के लिए टीकाकरण तालिका से योजना बनाएं।

बिदरी बकरी खरीदना

  • नस्ल की पहचान जाँचें: काला शरीर (सफ़ेद रंग हो तो सिर्फ़ कानों, माथे, गर्दन या घुटनों पर धब्बों के रूप में), काले थूथन, पलकें और खुर, सीधा माथा, लंबे लटकते कान और मध्यम कद-काठी।
  • पूछें कि बकरी कहाँ से आई है। महाराष्ट्र की सीमा के ठीक उस पार की उस्मानाबादी बकरियाँ भी ज़्यादातर काली होती हैं। NBAGR ने पाया कि बिदरी आनुवंशिक रूप से (जीन में) पड़ोसी इलाकों की बकरियों से अलग है (NBAGR अध्ययन), लेकिन यह आँख से नहीं दिखता, इसलिए बीदर या कलबुर्गी के किसी जाने-पहचाने झुंड की बकरी खरीदना ज़्यादा सुरक्षित है।
  • संकर बकरियाँ मिल सकती हैं। जहाँ अलग-अलग नस्लों की बकरियाँ साथ चरती हैं, वहाँ बिना रोक-टोक के मेल से नस्लें आपस में मिल जाती हैं (ICAR-CIRG), और संकर बकरी किसी नस्ल के नाम से बेची जा सकती है।
  • विज्ञापन में नस्ल का नाम विक्रेता का बताया हुआ होता है। कट्टुतरै उसकी जाँच नहीं करता। बकरी को खुद देखें, और हो सके तो उसकी माँ को भी।
  • प्रजनन के लिए पशु ऐसे चुनें जो नस्ल के लक्षणों पर खरे उतरें, और ऐसे झुंड से लें जिसका आपके झुंड से कोई रिश्ता न हो (ICAR-CIRG)।

इसके बाद सेहत और उम्र जाँचने और सुरक्षित पेमेंट के लिए पढ़ें: बकरी सुरक्षित कैसे खरीदें: सेहत, उम्र और ठगी से बचाव।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या बिदरी एक पंजीकृत नस्ल है?

हाँ। भारत का नस्ल रजिस्टर रखने वाला ICAR-NBAGR, नंदीदुर्गा के साथ बिदरी को भी कर्नाटक की पंजीकृत बकरी नस्ल के रूप में दर्ज करता है (NBAGR रजिस्टर)।

क्या बिदरी दूध वाली बकरी है?

नहीं। यह सिर्फ़ मांस के लिए पाली जाती है। इसके मूल इलाके के किसान इसका दूध नहीं निकालते, और बकरियों का अयन छोटा होता है (NBAGR नस्ल रिकॉर्ड)।

क्या बिदरी बकरी जुड़वाँ मेमने देती है?

अक्सर देती है, लेकिन आम तौर पर पहली बार ब्याने पर नहीं। औसतन हर ब्यांत में करीब 1.7 मेमने होते हैं (NBAGR नस्ल रिकॉर्ड)।

क्या तमिलनाडु या केरल में बिदरी बकरियाँ पाली जा सकती हैं?

पाल सकते हैं, लेकिन यह नस्ल सिर्फ़ उत्तर कर्नाटक के अपने सूखे मूल इलाके से ही जानी जाती है, और गर्म, नम जिलों में यह कैसी रहती है, इसकी जानकारी कम है। अपने पास की नस्लों से इसकी तुलना के लिए पढ़ें: बकरी की नस्ल कैसे चुनें: दक्षिण भारत की नस्लों की तुलना।

आगे पढ़ें

दक्षिण भारत की दूसरी नस्लों से बिदरी की तुलना के लिए पढ़ें: बकरी की नस्ल कैसे चुनें: दक्षिण भारत की नस्लों की तुलना; या इसकी पड़ोसी उस्मानाबादी और तमिलनाडु की काली बकरी सलेम ब्लैक के बारे में पढ़ें। जब आप तैयार हों, तो बिकाऊ बकरियाँ देखें, और जाँच-सूची के लिए इस गाइड का इस्तेमाल करें: बकरी सुरक्षित कैसे खरीदें: सेहत, उम्र और ठगी से बचाव।

स्रोत

  1. ICAR-National Bureau of Animal Genetic Resources (NBAGR), Karnal — Registered Breeds of Goat · पढ़ा गया 23 अक्टूबर 2026
  2. ICAR-National Bureau of Animal Genetic Resources (NBAGR), Karnal — Information System of Animal Genetic Resources of India — breed descriptor: Bidri (goat) · पढ़ा गया 23 अक्टूबर 2026
  3. ICAR-NBAGR, Indian Journal of Animal Sciences 88 (9): 1058–1063, September 2018 — Tantia M S, Vij P K, Yathish H M, Kulkarni V S, Shettar V B, Gopala G T, Sharma H, Sharma R — Characterization of Nandidurga and Bidri goat populations of Karnataka · पढ़ा गया 23 अक्टूबर 2026
  4. Asian Journal of Dairy and Food Research 40 (4): 365–370, 2021 — Inamdar B, Yathish H M, Naveen Kumar S, Nagaraja R, Naveen Kumar G S (Veterinary Colleges at Bengaluru, Gadag and Hassan, Karnataka Veterinary, Animal and Fisheries Sciences University — KVAFSU), Sudha K V (UAS Dharwad) — Husbandry Practices and Phenotypic Characterization of Bidri Goats in Karnataka · पढ़ा गया 23 अक्टूबर 2026
  5. ICAR-Central Institute for Research on Goats (CIRG), Makhdoom — Good Management Practices for Profitable Goat Farming · पढ़ा गया 23 अक्टूबर 2026
  6. ICAR-Central Institute for Research on Goats (CIRG), Makhdoom — Chatli M K, Singh M K, Dige M S, Verma A K, Gururaj K, Dixit A K, Singh S P, Kumar R — Goat Breeding Strategies for Enhanced Productivity (policy paper, 2024) · पढ़ा गया 23 अक्टूबर 2026

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